गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा। Gharghoda Government Buildings Condition की बदहाली का आलम यह है कि रायगढ़ जिले के घरघोड़ा में सरकारी दफ्तरों और आवासीय कॉलोनियों की छतें जर्जर हो चुकी हैं। खनिज संपदा और उद्योगों के माध्यम से सरकारी खजाने में हर साल करोड़ों रुपये की राशि जमा होने के बावजूद घरघोड़ा में शासन के अपने ही कार्यालय और कर्मचारी आवास दयनीय हालत में हैं। स्थिति यह है कि मानसून की बारिश शुरू होते ही इमारतों की छतों से पानी टपकने लगता है और सरकारी व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ जाती है।
घरघोड़ा स्थित तहसील कार्यालय, कृषि विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस), जल संसाधन विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग और वन विभाग जैसे कई महत्वपूर्ण शासकीय दफ्तर जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। बारिश के दिनों में इन कार्यालयों की छतों से पानी टपकने के कारण कर्मचारियों की पहली प्राथमिकता जनसमस्याओं के निपटारे से हटकर सरकारी फाइलों व महत्वपूर्ण दस्तावेजों को पानी से बचाने की हो जाती है। पानी रोकने के लिए दफ्तरों में बाल्टियाँ रखी जाती हैं और छतों पर तिरपाल का सहारा लिया जा रहा है।
समस्या केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के आवासीय परिसरों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। शिक्षक कॉलोनी, वन विभाग कॉलोनी, पुलिस विभाग कॉलोनी, जल संसाधन कॉलोनी और सामान्य कर्मचारी कॉलोनी के कई मकान बेहद जर्जर हो चुके हैं। बारिश के मौसम में छतों से पानी टपकने और दीवारों में सीलन के कारण कई परिवार अपनी छतों पर तिरपाल डालकर रहने को मजबूर हैं। सरकार कर्मचारियों से निष्ठा और जिम्मेदारी से काम की उम्मीद करती है, लेकिन जर्जर आवासों की स्थिति देखकर कर्मचारी अब सुरक्षित छत की मांग उठा रहे हैं।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाते हुए स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि जब जिले के पास विकास और रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध है, तो फिर इन भवनों की मरम्मत में देरी क्यों हो रही है? कागजी औपचारिकताएं और प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया के बजाय अब इन जर्जर भवनों का तत्काल भौतिक निरीक्षण कराकर मरम्मत व पुनर्निर्माण का स्थायी समाधान निकाला जाना आवश्यक हो गया है।