गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा। नगरवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग और सामूहिक प्रयासों के बाद हाल ही में साफ किए गए ऐतिहासिक बागमुड़ा तालाब को दोबारा गंदा करने की कथित कोशिशों का मामला सामने आया है। जिस तालाब में कभी भारी मात्रा में जलकुंभी और गंदगी फैली रहती थी, उसे नगर पंचायत व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से नया स्वरूप दिया गया था। हालांकि, अब सफाई के बाद तालाब में फिर से जलीय वनस्पतियां डालने और मेड़ से छेड़छाड़ किए जाने के आरोपों ने स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कुछ असामाजिक और विकास विरोधी तत्वों द्वारा रात के अंधेरे में तालाब के निकासी मार्ग और मेड़ के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। हाल ही में छोटे मुड़ा क्षेत्र की ओर से कचरा, पत्तियां और दूषित पानी बागमुड़ा तालाब की तरफ प्रवाहित होने की स्थिति बनी, जिसकी सूचना मिलते ही नगर पंचायत की टीम ने मौके पर पहुंचकर पानी के बहाव को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई की। इस घटना के बाद से नगर के लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर के गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्धजनों और पत्रकारों ने नगर पंचायत अध्यक्ष के निवास पर पहुंचकर इस विषय पर विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और जनहित के विकास कार्यों में अड़चन पैदा करने वाली प्रवृत्तियों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि तालाब की पुरानी और वर्तमान स्थिति की तथ्यात्मक जानकारी जनता के बीच साझा की जाएगी, ताकि लोग स्वयं सच्चाई से अवगत हो सकें और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण में अपना योगदान दे सकें।
नगरवासियों का स्पष्ट कहना है कि यदि किसी विकास कार्य या प्रशासनिक प्रक्रिया में कोई वास्तविक अनियमितता है तो उसकी विधिवत शिकायत और जांच होनी चाहिए, लेकिन विकास कार्यों को बाधित करना नगर के व्यापक हित में नहीं है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि प्राकृतिक कारणों का स्थायी समाधान निकाला जाए और यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर तालाब को नुकसान पहुंचा रहा है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं।
