बिलासपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं), बिलासपुर संभागीय कार्यालय ने हाईस्कूल नियमित, स्वाध्यायी एवं अवसर परीक्षा वर्ष 2026 को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। मंडल ने साफ तौर पर कहा है कि 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले अथवा अपात्र छात्र-छात्राओं को किसी भी स्थिति में प्रवेश पत्र वितरित नहीं किया जाएगा। यदि ऐसे परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित होते हैं, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित संस्था और प्राचार्य की होगी।
संभागीय कार्यालय, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, बिलासपुर द्वारा 23 जनवरी 2026 को जारी पत्र में संभाग अंतर्गत आने वाले सभी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों को यह निर्देश दिया गया है। पत्र के अनुसार, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा संचालित हाईस्कूल नियमित, स्वाध्यायी एवं अवसर परीक्षा वर्ष 2026 के प्रवेश पत्रों का वितरण 28 जनवरी 2026 से किया जाएगा। प्रवेश पत्र पहले जिला स्तर की समन्वयक संस्थाओं को उपलब्ध कराए जाएंगे, जहां से संबंधित विद्यालयों द्वारा इन्हें प्राप्त किया जाएगा।
मंडल ने निर्देश दिया है कि प्रवेश पत्र प्राप्त होने के बाद छात्र-छात्राओं को वितरित करते समय उनकी पात्रता और उपस्थिति का विशेष रूप से सत्यापन किया जाए। जिन परीक्षार्थियों की उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम पाई जाती है या जो अन्य किसी कारण से अपात्र हैं, उन्हें प्रवेश पत्र नहीं दिया जाए। ऐसे सभी प्रवेश पत्रों को स्पष्ट कारण दर्शाते हुए “CANCEL” किया जाए और उन्हें संभागीय कार्यालय, बिलासपुर में अनिवार्य रूप से जमा कराया जाए।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी संस्था द्वारा लापरवाही बरती जाती है और अपात्र अथवा कम उपस्थिति वाले परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित हो जाते हैं, तो इसके लिए संस्था प्रमुख या प्राचार्य पूरी तरह जिम्मेदार होंगे। ऐसी स्थिति में मंडल द्वारा संबंधित संस्था के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकती है।
मंडल के इस निर्देश को परीक्षा की शुचिता और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि केवल वही छात्र परीक्षा में शामिल हों, जिन्होंने शैक्षणिक सत्र के दौरान नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थिति दर्ज कराई है और जो परीक्षा नियमों के अनुरूप पात्र हैं।
संभागीय कार्यालय ने सभी प्राचार्यों से अपील की है कि वे मंडल के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचें। साथ ही प्रवेश पत्र वितरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमसम्मत तरीके से संपन्न करना सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद या अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति न बने।

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