नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध का दोषी करार दिया है. तीन जजों की ट्रिब्यूनल ने इस मामले में शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई है. जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अगुवाई वाली तीन जजों की ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला छह पार्ट में सुनाया, जो 400 पेज में है.
जस्टिस मुर्तजा की अगुवाई वाली ट्रिब्यूनल में जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक एनाम चौधरी भी हैं. ट्रिब्यूनल ने कहा है कि हमने मानवाधिकार संगठन और अन्य संगठनों की कई रिपोर्ट्स पर विचार किया है. हमने क्रूरताओं का विवरण भी दिया है. शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किए.
ट्रिब्यूनल ने फैसले में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. शेख हसीना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हेलीकॉप्टर से बम गिराने के आदेश दिए थे. ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि अवामी लीग के कार्यकर्ता कथित रूप से सड़कों पर उतर आए और पार्टी नेतृत्व की पूरी जानकारी में सुनियोजित हमले किए.
ट्रिब्यूनल ने कहा कि ज्यादातर मौतें बांग्लादेशी सुरक्षाबलों की ओर से आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले घातक धातु के छर्रों से भरी सेना की बंदूकों से चली गोलियों के कारण हुईं. शेख हसीना की सरकार में सेना, पुलिस और आरएबी ने न्याय प्रक्रिया से हटकर हत्याएं कीं. शेख हसीना और अन्य आरोपियों ने संयुक्त रूप से आपराधिक साजिश रची थी.
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि शेख हसीना के साथ ही इस मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून भी आरोपी हैं. ट्रिब्यूनल ने कहा कि तीनों ने मिलकर मानवता के खिलाफ अपराध किए. राजनीतिक नेतृत्व की ओर से दिए गए सीधे आदेशों की वजह से प्रदर्शनकारियों और अन्य नागरिकों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ.
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