नूंह: साइबर अपराध के खिलाफ नूंह पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम ने 14 सितंबर को गिरफ्तार किए गए राशिद पुत्र इसराईल निवासी ग्राम पढेनी तावडू से पूछताछ में एक संगठित ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस रिमांड में सामने आया कि आरोपी द्वारा फर्जी सिम कार्ड बेचकर करीब 90 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया गया है।
एएसपी आयुष यादव ने गुरुवार को मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि राशिद एक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालक था। वह अपनी दुकान पर आने वाले लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करता और उनसे फर्जी सिम कार्ड तैयार कर उन्हें साइबर ठगों को बेचता था। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल देशभर में ठगी की वारदातों में किया गया। तकनीकी जांच में खुलासा हुआ कि राशिद द्वारा बेचे गए इन फर्जी सिम कार्ड्स की मदद से तमिलनाडु और तेलंगाना के कई लोगों को शिकार बनाया गया।
एएसपी ने बताया कि इस मामले में इससे पहले अरबाज और जैतुन को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनकी गिरफ्तारी के बाद मनी ट्रेल और तकनीकी डाटा की गहन जांच में राशिद का नाम सामने आया। राशिद साइबर अपराधियों को फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने के साथ-साथ बैंक खातों में गलत डाटा फीड करने का काम भी करता था। आरोपी के पास से कई मोबाइल फोन, फर्जी सिम कार्ड और एक पीओएस मशीन बरामद की गई है। इन डिजिटल साक्ष्यों से यह साफ हो गया है कि यह गिरोह लंबे समय से लोगों को ठगने में सक्रिय था।
एएसपी आयुष यादव ने आगे कहा कि पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि राशिद और उसके साथियों ने कितने राज्यों में अपना जाल फैला रखा है और कितने लोगों को अब तक ठगी का शिकार बनाया है। अब तक सात मामलों में राशिद का नाम सामने आ चुका है।
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