मुंबई। सैलरी वाला झुनझुने से निराश चल रहा था। जब नया टैक्स रिजीम आया, तब गजब कन्फ्यूजन था। शाम तक समझ आया कि नहीं ये नया टैक्स रिजीम है, इसमें कोई 80-सी, हाउस रेंट वाली छूट नहीं है। तब सारा उत्साह फुस्स हो गया। फिर धीरे-धीरे न्यू टैक्स रिजीम को चमकाने का काम शुरू हुआ। देखते ही देखते सात लाख तक की इनकम टैक्स फ्री हो गई। फिर 72 प्रतिशत टैक्स देने वाले उस ओर चले गए। शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सात लाख की लिमिट को 12 लाख कर दिया। अब 80 प्रतिशत से ज्यादा सैलरी वाले इसी में आ जाएंगे। 75000 रुपए स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ने पर 12.75 लाख रुपए की सालाना इनकम टैक्स फ्री होगी। फिर हिसाब लगाया तब पता चला ओल्ड टैक्स रिजीम अभी भी फायदेमंद है। हां, नए न्यू टैक्स रिजीम में जाने पर टैक्स सेविंग की कठिन प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा। इसमें कोई शक नहीं कि 80 प्रतिशत टैक्स देने वाले फायदे में रहने वाले है। स्विगी-जोमैटो के शेयर इसीलिए भागे।
इस लिहाज से वित्त मंत्री का आठवां बजट खपत बढ़ाने वाला है। मध्यम वर्ग का ध्यान सालों बाद रखा गया है। लेकिन वित्त मंत्री ने बुनियाद नहीं छोड़ी। मोदी सरकार अगले साल भी 11 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पैसा रेल, रोड, बंदरगाह, एनर्जी जैसे सेक्टर्स पर खर्च करेगी। इनकम टैक्स छूट से एक लाख करोड़ रुपए सरकारी खजाने में कम जमा होने हैं, लेकिन सरकारी खर्चे में कोई कमी नहीं होगी। इतिहास बताता है कि टैक्स में छूट देने पर टैक्स देने वाले बढ़ते जाते हैं। इसके बाद हो सकता हैं कि अगले साल टैक्स देने वालों की संख्या 10 करोड़ पहुंच जाए।
इस बल्ले-बल्ले के बीच एक खाई बहुत चौड़ी होती हुई दिख रही है। टैक्स देने वालों और न देने वालों के बीच की। 140 करोड़ की आबादी में सिर्फ 8 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं। यानी कुल आबादी के सात प्रतिशत से भी कम लोग रिटर्न फाइल करते है। इसमें भी पांच करोड़ जीरो टैक्स देने वाले हैं। मतलब सिर्फ रिटर्न फाइल करते हैं क्योंकि ऐसा करना लोन लेने सहित कई और बातों के लिए जरूरी है।
अब एक और आंकड़ा देखिए। हमारे देश की प्रति व्यक्ति आय करीब एक लाख 72 हजार रुपए सालाना है। इसका मतलब प्रति व्यक्ति आय का सात गुना कमाने वाला भी टैक्स के दायरे से बाहर रहेगा। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत टैक्स नेट से है। 12 लाख 75 हजार रुपए से ज्यादा कमाने वाले सारे लोगों को इनकम टैक्स के दायरे में लाना चाहिए। अभी ये साफ लग रहा है कि 12.75 लाख रुपए से ज्यादा वाले कमर कस लें। ओल्ड रिजीम छोड़ दें और कुछ ज्यादा टैक्स देकर नए रिजीम में आ जाएं। वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज मिल रहा है। 2024 से 2029 जनवरी तक मिलता रहेगा। मोदी सरकार इस पर 11.80 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी। लगभग उतना ही जितना 2025-26 में सरकार के पूंजीगत खर्चों का बजट है। दो लाख करोड़ रुपए हर साल का खर्च इस योजना पर हो रहा है। अगर हमें इस तरह की ऐतिहासिक योजनाओं को जारी रखना है, तब टैक्स नेट बढ़ाने पर फोकस करना ही होगा।
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