शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने महाकुंभ में हुई भगदड़ को लेकर यूपी सरकार पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ कुंभ मेले के मार्केटिंग पर ध्यान दे रही थी, लेकिन भक्तों की सुविधाओं के लिए सही व्यवस्था नहीं की गई. गृह मंत्री और रक्षा मंत्री जब स्नान के लिए गए, तो पूरा इलाका सील कर दिया गया, जिससे आम श्रद्धालुओं को परेशानी हुई. यूपी के मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को पार्टी के प्रचार के बजाय भक्तों की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए था. उन्होंने कहा, "10 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत के बाद ही सरकार ने आपात बैठकें बुलाईं, लेकिन इससे कुछ फर्क नहीं पड़ा. सड़क पर सोने के बाद भक्तों को स्नान करना पड़ा, यह कैसा प्रबंधन है? 1954 में पंडित नेहरू ने खुद कुंभ मेले की व्यवस्थाओं की जांच की थी, लेकिन आज के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उस तरह सक्रिय नहीं दिख रहे.
अखिलेश के कार्यकाल का कुंभ मेला सबसे बेहतर था
संजय राउत ने कहा, "अखिलेश यादव के कार्यकाल का कुंभ मेला सबसे बेहतर था, ऐसा श्रद्धालु खुद कहते हैं. अगर दूसरे दलों को भी आयोजन में शामिल किया जाता, तो हालात इतने खराब नहीं होते. सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये का बजट रखा, लेकिन यह राशि जमीन पर नजर नहीं आ रही. कोरोना काल में हमारी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले अब यह बताएं कि कुंभ के 10,000 करोड़ रुपये कहां गए? उन्होंने कहा, "10 हजार करोड़ रुपये व्यवस्था पर खर्च किए गए थे, आखिर यह पैसे कहां गए? बीजेपी कुंभ की मार्केंटिंग का फायदा उठाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है. अब दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए. प्रयागराज में हुई मौत यह प्रशासन द्वारा की गई हत्या है. करोड़ों लोगों को कुंभ में लाकर बीजेपी अपना प्रचार कर रही है, लेकिन इतने लोगों के लिए क्या आपके पास व्यवस्था है?
संजय राउत ने अखिलेश यादव के कार्यकाल की याद दिलाई
संजय राउत ने कहा, "लोग सड़क पर बैठे हैं, महिलाओं की हालत देखिए. लोग अभी भी अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान जो व्यवस्था हुई थी उसको याद करते हैं. आज तीन करोड़ आए, आज चार करोड़ आए, आज 15 करोड़ आए, यह आंकड़े आप बताते हैं लेकिन व्यवस्था क्या है? जब रक्षा मंत्री आए तब एक दिन तक घाट बंद था, जब गृह मंत्री आए तब पूरा प्रयागराज बंद था, जब केंद्रीय मंत्री आते हैं तब पूरा घाट बंद रहता है. इन सब से व्यवस्था पर असर पड़ता है, भीड़ बढ़ जाती है तब ऐसी घटनाएं होती हैं."
फडणवीस पर कसा तंज
देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली दौरे पर तंज कसते हुए संजय राउत ने कहा, "फडणवीस महाराष्ट्र छोड़कर हमेशा दौरे पर रहते हैं. उन्हें समझना चाहिए कि महाराष्ट्र की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. वे बीजेपी के स्टार प्रचारक हैं, लेकिन महाराष्ट्र में पार्टी की जीत का श्रेय उन्हें दिया जा रहा है. अगर बीजेपी को महाराष्ट्र का फॉर्मूला दूसरे राज्यों में इस्तेमाल करना है, तो प्रचार किए बिना भी पार्टी चुनाव जीत सकती है.
गणेश नाईक को सम्मान मिलना चाहिए
गणेश नाईक और एकनाथ शिंदे की तुलना करते हुए संजय ने कहा, "गणेश नाईक और एकनाथ शिंदे से वरिष्ठ और अधिक अनुभवी नेता हैं. नाईक को मंत्री के रूप में उचित सम्मान मिलना चाहिए. शिंदे को नवी मुंबई जाकर गणेश नाईक से मिलकर चर्चा करनी चाहिए. गणेश नाईक का राजनीतिक सफर बड़ा है, वे शिवसेना में भी थे. भविष्य में जब शिंदे भी 2-3 पार्टियां बदलेंगे, तब उनकी तुलना नाईक से की जाएगी."
धनंजय मुंडे को लेकर क्या कहा
संजय ने आगे कहा कि शिंदे को मंत्री पद से हटाया भी जाए, तब भी वे चिपके रहेंगे क्योंकि उन पर ईडी और सीबीआई की जांच की तलवार लटक रही है. वे कभी नहीं कहेंगे कि वे नाराज हैं. वहीं धनंजय मुंडे के दिल्ली दौरे पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि मुंडे को अपना पद बचाने के लिए दिल्ली जाना पड़ा. उनके पार्टी अध्यक्ष मुंबई और बारामती में हैं, फिर भी मंत्री को दिल्ली जाकर सफाई देनी पड़ रही है. यह महाराष्ट्र की राजनीति की स्थिति को दर्शाता है.
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