नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, लेकिन कांग्रेस के लोकल नेताओं व पार्टी कार्यकर्ताओं ने जमीनी कार्य करने में जोश नहीं दिखाया है, जिसे लेकर पार्टी शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है। इसे लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य शीर्ष नेताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए चुनाव प्रचार-प्रसार की रणनीति बनाने और उस पर सौ प्रतिशत कार्य करने की नसीहत दे दी है।
कांग्रेस सांसद व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड सांसद व पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी दिल्ली चुनाव प्रचार अभियान को लेकर काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं, इसे देखते हुए स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता पार्टी के चुनावी प्रयासों को कमजोर करती दिखी है। यही वजह है कि बीते सोमवार राहुल और प्रियंका गांधी ने कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के साथ ऑनलाइन मीटिंग की। इस मीटिंग में चुनाव प्रचार की धीमी रफ्तार और स्थानीय नेताओं के कम उत्साह पर सख्त नाराजगी जताई गई। इस बैठक में राहुल गांधी ने कहा, कि चुनाव सिर्फ शीर्ष नेतृत्व के भरोसे नहीं जीता जा सकता। जबकि प्रियंका गांधी ने स्थानीय नेताओं को आक्रामक प्रचार रणनीति अपनाने और जनता के बीच कांग्रेस की योजनाओं को ले जाने जैसे निर्देश दिए हैं।
स्थानीय नेताओं को सख्त निर्देश
कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी काजी निजामुद्दीन और प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने स्थानीय नेताओं को निर्देश दिया कि वे आक्रामक अभियान चलाएं और पार्टी की योजनाओं को जनता तक प्रभावी तरीके से पहुंचाएं।
कांग्रेस की पांच गारंटियां
यहां बताते चलें कि कांग्रेस ने दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान में पांच गारंटियों को प्रमुखता दी है। इनमें महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष घोषणाएं शामिल हैं। रिपोर्ट बताती है कि स्थानीय नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता के चलते पार्टी का यह संदेश जनता तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है। इसे देखते हुए राहुल गांधी दिल्ली चुनाव में अब सक्रिय हो रहे हैं और लगातार रैली और जनसभाओं के जरिए मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने को तैयार हैं।
राहुल की रैलियां
राहुल गांधी अब अपनी जनसभाओं की ताबड़तोड़ शुरुआत करने जा रहे हैं, इसके तहत-
22 जनवरी: सदर बाजार – मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण मतदाताओं पर नजर।
23 जनवरी: मुस्तफाबाद – मुस्लिम बहुल क्षेत्र।
24 जनवरी: मादीपुर – अनुसूचित जाति की सुरक्षित सीट, जहां सिख मतदाताओं का भी प्रभाव है।
कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पूरी सक्रियता से प्रचार अभियान में जुटा है, लेकिन स्थानीय नेताओं की निष्क्रियता पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। राहुल गांधी की आगामी रैलियां कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास हैं। अब देखना होगा कि क्या कांग्रेस अपने स्थानीय नेताओं को सक्रिय कर दिल्ली में अपनी स्थिति मजबूत कर पाती है।
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