Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Knock India
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    Knock India
    Home » Blog » मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को मिली वैश्विक पहचान, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना हर्ष और गौरव का विषय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव…
    Breaking News

    मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को मिली वैश्विक पहचान, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना हर्ष और गौरव का विषय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव…

    News DeskBy News DeskMarch 12, 2025No Comments3 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को मिली वैश्विक पहचान, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना हर्ष और गौरव का विषय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव…
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है कि यूनेस्को ने प्रदेश की चार ऐतिहासिक धरोहरों को सीरियल नॉमिनेशन के तहत टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया है।

    सम्राट अशोक के शिलालेख, चौसठ योगिनी मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेला शासकों के महल और किलों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में घोषित होना प्रमाणित करता है कि मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश में विशेष स्थान रखता है। गत वर्ष भी यूनेस्को ने प्रदेश की 6 धरोहरों, ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खुनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, मंडला स्थित रामनगर के गोंड स्मारक और धमनार का ऐतिहासिक समूह को टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया था। मध्यप्रदेश में अब यूनेस्को द्वारा घोषित 18 धरोहरों है।

    जिसमें से 3 स्थाई और 15 टेंटेटिव सूची में है। यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में प्रदेश के खजुराहो के मंदिर समूह, भीमबेटका की गुफाएं एवं सांची स्तूप यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल स्थायी सूची में शामिल है। वहीं यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में मांडू में स्मारकों का समूह, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, नर्मदा घाटी में भेड़ाघाट-लमेटाघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और चंदेरी भी शामिल है। यह उपलब्धि हमारी धरोहरों के संरक्षण तथा संवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिये एमपी टूरिज्म बोर्ड, संस्कृति विभाग, पुरातत्वविदों, इतिहास प्रेमियो, संस्थाओं और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी है जिन्होंने ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में अमूल्य योगदान दिया हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मध्यप्रदेश को विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई ऊंचाइयाँ देगी, साथ ही हमारे गौरवशाली अतीत को नई पहचान दिलाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से आव्हान किया कि हम सब मिलकर अपनी धरोहरों के संरक्षण के लिए संकल्पबद्ध रहें और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।

    मौर्य कालीन अशोक के शिलालेख

    मौर्य कालीन अशोक के शिलालेख स्थल भारत के प्राचीनतम लिखित अभिलेख हैं। इन शिला और स्तंभ लेखों में सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म, शासन और नैतिकता से संबंधित संदेश अंकित हैं, जो 2,200 से अधिक वर्षों से संरक्षित हैं। मध्य प्रदेश में पर्यटक साँची स्तंभ अभिलेख, जबलपुर में रूपनाथ लघु शिलालेख, दतिया में गुज्जरा लघु शिलालेख और सीहोर में पानगुरारिया लघु शिलालेख को शामिल किया गया हैं।

                                                                                  सांची मे अशोक के शिलालेख

    चौंसठ योगिनी मंदिर

    प्रदेश में 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच निर्मित चौंसठ योगिनी मंदिर तांत्रिक परंपराओं का प्रतीक हैं। इन मंदिरों की गोलाकार, खुले आकाश के नीचे बनी संरचनाएँ, जटिल शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय हैं। इसमें खजुराहो, मितावली (मुरैना), जबलपुर, बदोह (जबलपुर), हिंगलाजगढ़ (मंदसौर), शहडोल और नरेसर (मुरैना) के चौसठ योगिनी मंदिर को शामिल किया गया है।

    मितावली, मुरैना

    उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिर

    प्रदेश में सांची, उदयगिरि (विदिशा), नचना (पन्ना), तिगवा (कटनी), भूमरा (सतना), सकोर (दमोह), देवरी (सागर) और पवाया (ग्वालियर) में स्थित गुप्तकालीन मंदिर को यूनेस्को द्वारा शामिल किया गया है। गुप्तकालीन मंदिर भारतीय मंदिर वास्तुकला में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाते हैं। मंदिर उत्कृष्ट नक्काशी, शिखर शैली और कलात्मक सौंदर्य को प्रदर्शित करते हैं।

    सांची, गुप्‍त कालीन मंदिर

    बुंदेला काल के बुंदेला काल के किला-महल

    बुंदेला काल के गढ़कुंडार किला, राजा महल, जहाँगीर महल, दतिया महल और धुबेला महल, राजपूत और मुगल स्थापत्य कला के बेहतरीन संगम को दर्शाते हैं। ये महल बुंदेला शिल्पकला, सैन्य कुशलता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अद्भुत मिसाल हैं।

    News Desk

    Related Posts

    भारत ने चक्रवात प्रभावित मेडागास्कर को मेडिकल सहायता और राहत सामग्री भेजी

    March 11, 2026

    आध्यात्मिक मूल्यों एवं संस्कारों की पाठशाला है अघोर गुरु पीठ बनोरा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    February 15, 2026

    रफ्तार का कहर: रायपुर में ट्रक की चपेट में आने से श्रमिक की मौत, उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार

    February 15, 2026

    महाशिवरात्रि पर सीएम साय ने बाबा धाम में की पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

    February 15, 2026

    भकुर्रा महादेव की महिमा अपरंपार महाशिवरात्रि पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, बोल बम के जयघोष से गूंज उठा भूतेश्वर धाम

    February 15, 2026

    Rajim Kumbha Kalpa 2026 : आज राजिम कुंभ के समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री साय

    February 15, 2026
    RO.NO.= 13848/141
    विज्ञापन
    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक - KHURSHID ALAM
    मोबाइल - 07828272058
    ईमेल - [email protected]
    कार्यालय - Near Ratan Bhawan Phool Chowk Nayapara,CSEB Road Raipur (C.G.)
    July 2026
    M T W T F S S
     12345
    6789101112
    13141516171819
    20212223242526
    2728293031  
    « Jun    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.