गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र में 11 साल पुराने एक प्रेम संबंध के विवाद में समझौते के नाम पर लाखों रुपयों की सौदेबाजी, ब्लैकमेलिंग और साजिशन दबाव बनाने का मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण में स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली, साक्ष्यों की अनदेखी और एक कथित पत्रकार रवि गुप्ता को प्रत्यक्ष संरक्षण देने के संगीन आरोपों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायतकर्ता उजागर सिदार ने कैमरे पर बयान जारी करते हुए दावा किया कि फूलमती यादव के साथ जारी विवाद में सुलह कराने के नाम पर उससे भारी रकम का लेन-देन हुआ। उजागर के अनुसार, उस पर कोर्ट-कचहरी और जेल भेजने का भय दिखाकर दबाव बनाया गया कि वह महिला को अपने साथ रखे। उसने बताया कि उसने लगभग 5 लाख रुपये दिए थे, लेकिन इसके बावजूद मामले को खींचकर उसे लगातार धमकाया और ब्लैकमेल किया जाता रहा।
2 लाख की उगाही दबाने के लिए आवेदनों में हेरफेर का आरोप
मामले में आरोप है कि रवि गुप्ता द्वारा समझौते के नाम पर कथित रूप से 2 लाख रुपये लिए गए थे। पीड़िता के प्रारंभिक आवेदन और बयानों में भी इस रकम के लेन-देन का स्पष्ट उल्लेख था। हालांकि, जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो पुलिस और रवि गुप्ता की कथित मिलीभगत से 2 लाख रुपये की अवैध वसूली पर पर्दा डालने के लिए शिकायतकर्ता के मूल आवेदन और बयानों में हेरफेर किया गया। दावा है कि एक वीडियो/ऑडियो साक्ष्य में आरोपी द्वारा थाना प्रभारी के समक्ष पैसे लेने की बात स्वीकार की गई है, फिर भी कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं हुई।
27,000 रुपये की आड़ में महिला पत्रकारों को फंसाने की साजिश
प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 2 लाख रुपये की बड़ी उगाही को दबाने के लिए महज 27,000 रुपये की राशि को आधार बनाकर एक नई स्क्रिप्ट रची गई। दावा है कि यह 27,000 रुपये स्वयं महिला ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए दिए थे। इसी राशि को ढाल बनाकर अन्य पत्रकारों, विशेष रूप से महिला पत्रकारों को निशाना बनाया गया और उनके फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किए गए, ताकि मुख्य वसूलीकर्ता को बचाया जा सके।
3 जुलाई की शिकायत ठंडे बस्ते में, जांच पर उठे सवाल
उजागर सिदार द्वारा 3 जुलाई 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रायगढ़ को लिखित शिकायत देकर रवि गुप्ता, प्रतीक सिंघल और अन्य पर घर आकर ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए गए थे। आरोप है कि निष्पक्ष एफआईआर दर्ज करने के बजाय उजागर सिदार को घरघोड़ा थाने बुलाकर दबाव में बयान दर्ज कराए गए। घरघोड़ा थाना प्रभारी गौरव साहू पर आरोपी को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं। पीड़ितों ने स्थानीय जांच पर अविश्वास जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
