गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा/रायगढ़। Gharghoda RBC 6-4 Compensation Probe की आहट से रायगढ़ जिले का प्रशासनिक अमला सतर्क हो गया है। न्यायधानी बिलासपुर में राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC 6-4) के तहत प्राकृतिक आपदा और दुर्घटना राहत मुआवजे में गड़बड़ी की जांच की खबरें सामने आने के बाद अब घरघोड़ा तहसील क्षेत्र में भी बांटे गए मुआवजे की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रवासी और सामाजिक कार्यकर्ता यह आशंका जता रहे हैं कि क्या घरघोड़ा में भी मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई है?

RTI की जानकारी से सामने आएगा पूरा सच
इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों के मिलने के बाद साफ होने की उम्मीद है। घरघोड़ा तहसील क्षेत्र के अंतर्गत निर्धारित अवधि के दौरान RBC 6-4 के तहत कितनी मौतें दर्ज की गईं, कितने प्रकरणों में शासकीय स्वीकृति मिली, कुल कितनी राशि जारी की गई और भुगतान किन-किन व्यक्तियों के बैंक खातों में हुआ—इन सभी अहम सवालों का जवाब सरकारी रिकॉर्ड से खंगाला जाएगा।

पंचनामा, पीएम रिपोर्ट से लेकर स्वीकृति आदेश तक की होगी जांच
निष्पक्ष पड़ताल के लिए प्रत्येक प्रकरण से संबंधित मृत्यु के कारण, पुलिस पंचनामा, पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट, पुलिस जांच आख्या, पात्रता निर्धारण की जांच, अनुविभागीय अधिकारी (SDM)/तहसीलदार के स्वीकृति आदेश और बैंक भुगतान पत्रक का मिलान किया जाएगा। मुख्य रूप से यह जांचना बेहद जरूरी होगा कि सरकारी दस्तावेजों में दर्ज कारण और धरातल पर घटी वास्तविक घटना की परिस्थितियां आपस में मेल खाती हैं या नहीं।

लाभार्थियों के बयानों और बैंक खातों का होगा भौतिक सत्यापन
पड़ताल केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगी। RBC 6-4 का लाभ पाने वाले परिवारों से भी सीधा संपर्क कर जानकारी जुटाई जाएगी। उनसे यह समझा जाएगा कि आवेदन किस माध्यम से जमा हुआ, स्वीकृत राशि की क्या जानकारी दी गई और उनके बैंक खातों में वास्तव में कितना पैसा पहुंचा। यदि सरकारी फाइल, जारी राशि और हितग्राहियों के बयानों में कोई अंतर पाया जाता है, तो यह गड़बड़ी का बड़ा आधार बनेगा।
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घरघोड़ा में उठ रहे यह 4 बड़े प्रशासनिक सवाल
बिलासपुर प्रकरण के बाद घरघोड़ा में प्रशासनिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर यह सवाल खड़े हो रहे हैं:
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पात्रता की जांच: क्या हर मामले में नियमानुसार मौका मुआयना और तकनीकी जांच की गई?
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वास्तविक हितग्राही: क्या मुआवजा पाने वाला हर परिवार कानूनन राहत राशि का सही हकदार था?
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भुगतान की पारदर्शिता: क्या स्वीकृत पूरी राशि बिना किसी कमीशन या कटौती के वास्तविक पीड़ित तक पहुंची?
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दस्तावेजी हेरफेर: क्या किसी मामले में गलत कागजात के आधार पर अयोग्य व्यक्ति को पात्र बनाया गया?
अब सभी की निगाहें RTI के माध्यम से मिलने वाले आधिकारिक जवाब और दस्तावेजों पर टिकी हैं, जिसके बाद ही घरघोड़ा के RBC 6-4 मुआवजे की पूरी हकीकत सामने आ सकेगी।
