गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा/रायगढ़। अपर सत्र न्यायालय घरघोड़ा के विद्वान अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमान अभिषेक शर्मा ने जमीन विवाद में भतीजे की नृशंस हत्या करने के सनसनीखेज मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी पिता समारू मांझी और उसके पुत्र श्रवण उर्फ संचय मांझी को हत्या का दोषी पाते हुए आजीव कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों पर ₹1000-₹1000 का अर्थदंड भी लगाया है।
यह मामला चौकी रैरूमा खुर्द (थाना धरमजयगढ़) के अपराध क्रमांक 23/2023 से संबंधित है।
क्या है पूरा मामला? (घटना की पृष्ठभूमि)
पुलिस और अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, 23 जनवरी 2023 को मृतक सबल साय की मां रुगबुगी बाई ने चौकी रैरूमा खुर्द में उपस्थित होकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वह 20 जनवरी 2023 को मेहमानी में ग्राम तिलडेगा गई थी।
22 जनवरी 2023 को उसकी नातिन ने फोन पर सूचना दी कि उसके पुत्र सबल साय की उसके देवर समारू मांझी ने जमीन बंटवारे के विवाद को लेकर मारपीट कर हत्या कर दी है।
सूचना मिलते ही मां जब वापस घर लौटी, तो उसने देखा कि घर के आंगन में खून बिखरा पड़ा था और बरामदे में उसके पुत्र सबल साय का शव पड़ा था। मृतक के बाएं कान के ऊपर सिर पर गंभीर चोट के निशान थे, खून बह रहा था और गले में रस्सी से गला घोंटने जैसे निशान बने हुए थे।
जांच में हुआ सनसनीखेज खुलासा
प्रार्थिया की रिपोर्ट पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की और साक्षियों के बयान दर्ज किए। गवाहों के बयानों से हत्या की पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ:
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जमीन का विवाद: मृतक सबल साय के पिता की मृत्यु के बाद पारिवारिक जमीन पर उसके चाचा समारू मांझी और मृतक दोनों का नाम दर्ज हो गया था। इसी जमीन के बंटवारे को लेकर अभियुक्त समारू मांझी अक्सर अपने भतीजे सबल साय से लड़ाई-झगड़ा करता था।
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साजिश के तहत पिलाई शराब: घटना वाले दिन अभियुक्त समारू और उसका पुत्र श्रवण उर्फ संचय मांझी, मृतक सबल साय को ‘कोसना’ (देशी शराब) पिला रहे थे और यह दिखावा कर रहे थे कि अब वे आगे कोई झगड़ा नहीं करेंगे।
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बीच-बचाव करने आई पत्नी को भी दौड़ाया: नशे की हालत में जब सबल साय घर में आकर सो गया और उसकी पत्नी नहाने गई, तभी अभियुक्तों ने मौका पाकर सबल साय पर लकड़ी की फाली से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जब मृतक की पत्नी ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो आरोपियों ने कहा कि “जेल तो जाना ही है, आज दोनों को मार देंगे” और उसकी तरफ दौड़े। डर के मारे पत्नी ने अरहर की बाड़ी में छिपकर अपनी जान बचाई।
कोर्ट का फैसला
प्रकरण में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर दोष सिद्ध होने पर, अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने पिता-पुत्र दोनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302/34 (हत्या) का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
