गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़/लैलूंगा। Nishaanebaz.com-Lailunga Minor Crime Case: रायगढ़ जिले के लैलूंगा थाना क्षेत्र अंतर्गत नारायणपुर के मूड़ापारा (ग्राम पंचायत) में एक 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध के मामले में जमीनी स्तर पर लीपापोती और समझौते के सनसनीखेज प्रयास सामने आ रहे हैं। इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बावजूद प्रभावशाली लोगों और स्थानीय दबंगों द्वारा पीड़िता के परिवार को डराने-धमकाने और पूरे मामले को दबाने की गंभीर कोशिशें की जा रही हैं।
‘प्यासा कुएं के पास आता है…’: सवालों पर पल्ला झाड़ते जनप्रतिनिधि
मामले की जमीनी पड़ताल के दौरान जब ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि शंकर से इस गंभीर अपराध और पंचायत स्तर पर की गई कार्रवाई को लेकर तीखे सवाल पूछे गए, तो उनका संवेदनहीन और गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आया।
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पल्ला झाड़ने की कोशिश: जब उनसे पूछा गया कि गांव की 14 साल की मासूम बच्ची के साथ इतना बड़ा अपराध हुआ, तो पंचायत ने क्या संज्ञान लिया? इस पर सरपंच प्रतिनिधि ने कहा कि “प्यासा कुएं के पास आता है, कुआं प्यासे के पास नहीं जाता। जब तक पीड़ित पक्ष हमारे पास नहीं आएगा, हम क्या करेंगे?”
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दबंगों के डर की बात कबूली: बाद में तीखे सवालों के आगे सरपंच प्रतिनिधि ने स्वीकार किया कि गांव में ‘गौंटीया’ और रसूखदार तबके का गहरा दबाव है। उन्होंने दबी जुबान में माना कि दबंगों के डर और गांव में किसी अनहोनी के भय के चलते वे खुद इस मामले में दखल देने से कतराते रहे हैं।
5 लाख रुपये और जमीन देकर समझौता कराने की साजिश
बातचीत के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी पक्ष (सूर्यांश और उसके परिवार) की ओर से पीड़िता के परिवार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
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बड़ा प्रलोभन: मामले को रफा-दफा करने के लिए करीब 5 लाख रुपये नकद, जमीन और मकान देने का प्रलोभन दिया गया, ताकि दर्ज कराई गई एफआईआर वापस ले ली जाए।
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बयान बदलने की धमकी: पीड़िता की मां पर यह दबाव डाला जा रहा है कि वह बयान बदले और अन्य लड़कों को फंसाने की धमकी देकर मामले की दिशा भटकाए।
सियासी रसूख और स्थानीय गुटबाजी का साया
मामले में ललित यादव और स्थानीय रसूखदारों के हस्तक्षेप व दबाव की बातें भी तेजी से चर्चा में हैं। गांव में प्रभाव रखने वाले बड़े लोगों और गौंटीया तबके के प्रभाव के कारण जनप्रतिनिधि खुद को असहाय बता रहे हैं। सरपंच प्रतिनिधि के अनुसार, चुनाव और स्थानीय समीकरणों के चलते वे इन प्रभावशाली लोगों के खिलाफ खुलकर बोलने की स्थिति में नहीं हैं।
‘मैं न्याय के लिए लड़ूंगी’ – पीड़िता की जंग जारी
दबंगों के तमाम दबावों, प्रलोभनों और पंचायत की निष्क्रियता के बावजूद 14 वर्षीय नाबालिग पीड़िता न्याय की मांग पर अडिग है। पीड़िता ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी समझौते के आगे नहीं झुकेगी और दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचा कर रहेगी। पीड़िता ने गांव के माहौल से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर आगे की पढ़ाई और सुरक्षा की गुहार लगाई है।
प्रशासनिक और कड़े कानूनी शिकंजे की दरकार
एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म जैसे बेहद संवेदनशील और गैर-जमानती मामले में पंचायत स्तर पर समझौते की बैठकें होना, पैसे का प्रलोभन देना और पीड़िता के परिवार को धमकाना सीधे तौर पर कानून को चुनौती देना है। अब देखना यह होगा कि रायगढ़ पुलिस प्रशासन इस पूरे सिंडिकेट और मामले को दबाने की कोशिश करने वाले रसूखदारों पर क्या सख्त कानूनी कार्रवाई करता है।
(मामले में अगला अपडेट जल्द…)
