गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। रायगढ़ जिला पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने जिले के जंगलों से खैर एवं तेंदू प्रजाति की बेसकीमती लकड़ियों की अवैध कटाई, डंपिंग और अंतर्राज्यीय तस्करी करने वाले एक बड़े संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसएसपी शशि मोहन सिंह, डीएफओ अरविंद पीएम, एडिशनल एसपी अनिल सोनी और सीएसपी मयंक मिश्रा ने इस बड़े खुलासे की विस्तृत जानकारी साझा की।
यह सिंडिकेट छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश के जंगलों से अवैध कटाई करवाकर लकड़ियों को हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में ऊंचे दामों पर खपाता था। पुलिस ने मामले में 3 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है, जबकि 1 आरोपी फरार है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिंडिकेट का नेटवर्क रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन परिक्षेत्र में फैला हुआ था। आरोपी ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर जंगलों से अवैध कटाई करवाते थे।
इसके बाद मुख्य आरोपी रोहित मित्तल ने जूटमिल थाना क्षेत्र के जामटीकरा (गढ़उमरिया) स्थित एक गोदाम को किराये पर लेकर लकड़ियों को डंप करना शुरू किया। वहां बिजनेश पार्टनर मनीष अग्रवाल के साथ लकड़ियों की छिलाई कराई जाती थी और ट्रांसपोर्टर भरत मेश्राम व सलाउद्दीन खान के जरिए दूसरे राज्यों में भेजा जाता था।
मई 2025 में वन विभाग ने गढ़उमरिया गोदाम में छापेमारी कर ट्रक में लदे 42 लट्ठे और गोदाम से 146 लट्ठे जब्त किए थे। उस समय आरोपियों ने फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट (TP) पेश किया था, जिस पर रेंजर के हस्ताक्षर ही नहीं थे।
विस्तृत जांच के बाद डीएफओ रायगढ़ के आवेदन पर 2 सितंबर 2026 को जूटमिल थाने में नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 (संगठित अपराध), धोखाधड़ी और भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत अपराध दर्ज किया गया। सीएसपी मयंक मिश्रा के नेतृत्व में बनी विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि फरार भरत मेश्राम की तलाश जारी है।
