गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा। सावन का पवित्र महीना अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। सावन का आखिरी सोमवार 24 अगस्त को मनाया जाएगा। भगवान शिव को समर्पित सोमवार का महत्व सावन के महीने में और भी बढ़ जाता है। ऐसे में घरघोड़ा नगर और आसपास के क्षेत्रों में अंतिम सावन सोमवार को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
सावन के पहले सोमवार को ही घरघोड़ा में शिवभक्ति की ऐसी बयार बही थी कि नगर और आसपास के शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। मंदिरों में भगवान शिव के जयकारे गूंजते रहे और जगह-जगह ‘ॐ नमः शिवाय’ की धुन सुनाई देती रही। अब सावन के आखिरी सोमवार को भी इसी तरह का भक्तिमय माहौल बनने की उम्मीद है।
श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे। मंदिरों के साथ-साथ बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में भी भगवान शिव की पूजा-अर्चना करेंगे।
शुभ योगों के संयोग से खास होगा अंतिम सावन सोमवार
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष सावन के आखिरी सोमवार पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है। इसमें प्रीति योग और आयुष्मान योग के साथ अन्य शुभ संयोगों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा सिंह राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग बनने की बात भी कही जा रही है।
मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसे श्रद्धालु जो सावन के पहले सोमवार को व्रत नहीं रख पाए, वे अंतिम सोमवार को भी श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा कर सकते हैं।
बेलपत्र और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जाप से होगी शिव आराधना
सावन के आखिरी सोमवार को श्रद्धालु सुबह स्नान कर भगवान शिव की पूजा का संकल्प ले सकते हैं। इसके बाद शिवालय पहुंचकर शिवलिंग पर जल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
भगवान शिव को 11 या 21 बेलपत्र अर्पित कर प्रत्येक बेलपत्र के साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर दीपक जलाकर आरती करने की धार्मिक मान्यता है।
भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव चालीसा, रुद्राष्टक या भगवान शिव के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं। सावन के अंतिम सोमवार पर रुद्राभिषेक कराने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
घरघोड़ा के शिवालयों में पहले सोमवार से ही दिखा था भक्तिमय माहौल
सावन के पहले सोमवार को घरघोड़ा नगर और आसपास के शिवालयों में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली थी। सुबह से ही भक्त भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए मंदिरों की ओर जाते नजर आए।
मंदिर परिसरों में ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। घरों में भी श्रद्धालुओं ने धूप, दीप और पुष्पों से भगवान शिव की आराधना की। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक कर भगवान शिव से सुख-शांति और परिवार की समृद्धि की कामना की।
अब अंतिम सोमवार को भी नगर के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। सावन के अंतिम सोमवार को लेकर धार्मिक वातावरण के साथ बाजारों में भी रौनक बढ़ने की उम्मीद है।
दान-पुण्य और सेवा का भी रहेगा महत्व
सावन सोमवार पर पूजा-अर्चना के साथ जरूरतमंद लोगों की मदद और दान-पुण्य करने की भी परंपरा है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल सहित जरूरत की अन्य सामग्री का दान कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की आराधना के साथ जरूरतमंदों की सेवा करने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि सावन के अंतिम सोमवार को कई श्रद्धालु पूजा के साथ दान-पुण्य भी करते हैं।
पूजा के लिए ये शुभ समय बताए गए
सावन के आखिरी सोमवार को पूजा के लिए बताए गए प्रमुख चौघड़िया इस प्रकार हैं—
- अमृत चौघड़िया: सुबह 5:55 बजे से 7:32 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: सुबह 9:09 बजे से 10:46 बजे तक
- लाभ चौघड़िया: दोपहर 3:38 बजे से 5:15 बजे तक
श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय मंदिर की पूजा व्यवस्था के अनुसार भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।
सावन का अंतिम सोमवार शिव भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का विशेष अवसर माना जा रहा है। घरघोड़ा में भी मंदिरों से लेकर घरों तक एक बार फिर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे सुनाई देने की उम्मीद है। भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।
