Raipur. रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में इस वर्ष के राज्य सेवा परीक्षा में विभिन्न पदों पर चयनित छत्तीसगढ़ सरस्वती शिक्षा संस्थान के पूर्व विद्यार्थियों से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर चयनित अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए राज्यपाल ने उन्हें शुभकामनाएं दी और मानवीय संवेदनाओं के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने का निर्देश दिया। राज्यपाल ने कहा कि सार्वजनिक सेवा में चयनित अधिकारियों की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने अधिकारियों को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि वे अपने कार्य में ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता का निर्वहन करें। इसके साथ ही राज्य की जनता के कल्याण के लिए उनके प्रयासों को प्रेरक और निष्ठापूर्ण होना चाहिए।
राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोकभवन में इस वर्ष के राज्य सेवा परीक्षा में विभिन्न पदों पर चयनित छत्तीसगढ़ सरस्वती शिक्षा संस्थान के पूर्व विद्यार्थियों ने सौजन्य भेंट की। राज्यपाल ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी और मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्य करने का निर्देश दिया।1/2 pic.twitter.com/tx80wRlGfm
— Governor Chhattisgarh (@GovernorCG) December 7, 2025
इस अवसर पर सरस्वती शिक्षा संस्थान के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। संस्थान के प्रतिनिधियों ने चयनित विद्यार्थियों के प्रयास और मेहनत को सराहा और कहा कि संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को न केवल शिक्षा प्रदान करना है, बल्कि उन्हें सामाजिक और नैतिक मूल्यों से भी संपन्न करना है। चयनित अधिकारियों ने राज्यपाल को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी सलाह और मार्गदर्शन भविष्य में उनके कार्य को और प्रभावी बनाने में मददगार होगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वे अपने पद पर रहते हुए समाज और राज्य के हित में पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे।
इस सौजन्य भेंट के दौरान अधिकारियों और संस्थान के पदाधिकारियों के बीच अनुभव और मार्गदर्शन का आदान-प्रदान भी हुआ। राज्यपाल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सेवा भाव और समर्पण किसी भी प्रशासनिक कार्य में सफलता की कुंजी है। सरस्वती शिक्षा संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि संस्थान के पूर्व विद्यार्थियों ने पिछले वर्षों में विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। उनका यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल चयनित अधिकारियों को सम्मानित करना था, बल्कि उन्हें सही मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करना भी था, ताकि वे अपने कर्तव्यों का पालन उच्च मानकों के साथ कर सकें।
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