रायपुर। पद्मश्री पीयूष पांडे के निधन पर CM साय ने दुःख जताया है, विज्ञापन जगत के एक अद्भुत व्यक्तित्व के रूप में उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से कहानी कहने की कला को एक नई परिभाषा दी और हमें “कुछ खास है जिंदगी में, दो बूंद जिंदगी की, हर घर कुछ कहता है, चल मेरी लूना, फिर एक बार मोदी सरकार” जैसी अनेक अविस्मरणीय एवं कालजयी रचनाएं दीं।
कौन थे पीयूष पांडे?
पीयूष पांडे का जन्म 1955 में जयपुर, राजस्थान में हुआ था। 1982 में वो ओगिल्वी में शामिल हुए। 27 साल की उम्र में, उन्होंने अंग्रेजी-प्रधान विज्ञापन जगत में कदम रखा और उसे हमेशा के लिए बदल दिया। एशियन पेंट्स (“हर खुशी में रंग लाए”), कैडबरी (“कुछ खास है”), फेविकोल और हच जैसे ब्रांडों में आवाज देकर विज्ञापनों की दुनिया में एक अलग मिशाल पेश की। अपने अभियानों के जरिए, पीयूष पांडे ने हिंदी और बोलचाल के भारतीय मुहावरों को मुख्यधारा के विज्ञापनों में शामिल किया। उनकी भाषा में हास्य और अपनेपन का अनुभव होता था। उनके एक पुराने सहयोगी ने कहा, “उन्होंने न सिर्फ भारतीय विज्ञापन की भाषा बदली, बल्कि उसका व्याकरण भी बदल दिया।” पीयूष पांडे को 2016 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, 2024 में उन्हें LIA लीजेंड अवॉर्ड भी मिला।
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