Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Knock India
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    Knock India
    Home » Blog » ट्राइबल म्यूजियम, साय सरकार ने जनजातीय संस्कृति को दुनियाभर में नई पहचान दिलाई
    Raipur

    ट्राइबल म्यूजियम, साय सरकार ने जनजातीय संस्कृति को दुनियाभर में नई पहचान दिलाई

    Knock IndiaBy Knock IndiaJuly 25, 2025No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    ट्राइबल म्यूजियम, साय सरकार ने जनजातीय संस्कृति को दुनियाभर में नई पहचान दिलाई
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    रायपुर। नवा रायपुर में बनाए गए पहला ट्राइबल म्यूजियम की तारीफ दुनियाभर में किए जा रहे है। आदिवासी इलाकों में जनजातीय समुदाय की परंपरा, उनके रहन-सहन, पहनावे, जेवर और उनकी मान्यताओं को दिखाती कई गैलेरीज हैं। यहां किसी आदमी के साइज के स्कल्पचर (प्रतिमाएं) रखी गई है। इन्हें देखकर लगेगा कि सब कुछ लाइव आपके सामने हो रहा है। दरअसल, सभी मूर्तियां एक्शन में है। देखकर लगता है कि आप किसी आदिवासी गांव में आ गए हैं। म्यूजियम में एक लाल बंगला भी बनाया गया है। बताया गया है कि, ये भुंजिया जनजाति की रसोई है। इसे रंधनी कुरिया या लाल बंगला कहते हैं। यह लाल मिट्‌टी से बनती है। इसे आदिवासी अपने रहने वाली झोपड़ी से अलग बाहर बनाते हैं। इसमें भुंजिया समुदाय के अलावा कोई और नहीं जा सकता, कोई चला गया तो पूरी रसोई को नष्ट कर देते हैं।

    परिवार में या समुदाय में किसी की मौत होने पर ही इसे आग लगाकर या तोड़कर नया बनाया जाता है। इसमें बाध्यता यह है कि, दोबारा बनने पर इसे नई जगह पर ही बनाया जाएगा। पुरानी जगह पर नहीं। इसमें खाना बनाने के लिए भी हांडी, हंसिया, कांसे की थाली लोटा गिलास कटोरी बाटलोई जैसे परंपरागत बर्तन इस्तेमाल होते हैं। इसे बनाने के लिए महिला और पुरुष के काम भी बंटे हुए हैं। लाल बंगला में उपयोगी लकड़ी जंगल से लाने, मिट्टी बनाने, छत बनाना यह सब पुरुष करते हैं। इसमें महिलाओं के सम्मिलित होने की मनाही है। फर्श पर लिपाई दीवारों पर पुताई, चूल्हा बनाने का काम महिलाएं करती हैं। बाहरी दीवारों की छबाई दोनों मिलकर करते हैं। विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि, इस सेंटर को 9 करोड़ 27 लाख में तैयार किया गया है। करीब 10 एकड़ क्षेत्र में आकर्षक आदिवासी संग्रहालय (ट्राइबल म्यूजियम) बनाया गया है। राज्य के पहले ट्राइबल म्यूजियम में आम लोगों को जानकारियां मिल रही है।

    दुनिया भर में ट्राइबल कल्चर पर रिसर्च करने वालों को भी काफी नई चीजें पता चलेंगी। आदिवासियों के हथियार, बाजार, गांव, सबकुछ देखने को मिलेगा। प्रदेश के 43 जनजातीय समुदाय और इनकी उपजातियां यहां बताई गई हैं। म्यूजियम में जनजातीय समुदाय का संसार, इनका खानपान, पहनावा, संगीत, लोककला, वाद्ययंत्र, नृत्य इन सबकी झलक दिखेगी। इसमें 14 गैलरी हैं और हर गैलरी एक विशेष थीम पर बनाई गई है।

    जनजातियों के तीज-त्योहार, पर्व-महोत्सव, विशिष्ट संस्कृति को दिखाया गया है। साथ ही आवास एवं घरेलू उपकरण, शिकार उपकरण, वस्त्र (परिधान), आभूषण, कृषि तकनीक भी बताई गई है। इसके अलावा जनजातीय नृत्य, जनजातीय वाद्ययंत्रों, आग जलाने, लौह निर्माण, रस्सी निर्माण, फसल मिंजाई (पौधों से बीज अलग करना), कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई निर्माण को दिखाया गया है। अन्न कुटाई और पिसाई, तेल प्रसंस्करण के लिए उपयोग में लाने जाने वाले उपकरणों और परंपरागत तकनीकों को दर्शाया गया हैं।

    आदिवासी समुदाय की युवतियां नुकीले कंगन पहनती हैं। कई बार वह अकेले काम करने या लकड़ी लाने की वजह से जंगलों में जाती हैं। जंगली जानवरों के हमले से खुद को बचाने के लिए भी इन नुकीले कंगन का इस्तेमाल वह अपनी रक्षा के लिए करती हैं। किसी तरह की छेड़छाड़ या हमलावरों से खुद को बचाने के लिए भी सेल्फ डिफेंस के तौर पर यह मोटे नुकीले कंगन काम आते हैं। जान बचाने वाले इन कंगन को भी आदिवासी म्यूजियम के आभूषण गैलेरी में रखा गया है।

    जनजातीय संग्रहालय में कुल 14 गैलरियां हैं, जिनमें जनजातीय जीवनशैली के सभी पहलुओं का बहुत ही खूबसूरत ढ़ंग से जीवंत प्रदर्शन किया गया है। इनमें जनजातियों के भौगोलिक विवरण, तीज-त्यौहार, पर्व-महोत्सव तथा विशिष्ट संस्कृति, आवास एवं घरेलू उपकरण, शिकार उपकरण, वस्त्र (परिधान) एवं आभूषण, कृषि तकनीक एवं उपकरणों, जनजातीय नृत्य, जनजातीय वाद्ययंत्रों, आग जलाने, लौह निर्माण, रस्सी निर्माण, फसल मिंजाई (पौधों से बीज अलग करना), कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई निर्माण, मंद आसवन, अन्न कुटाई व पिसाई, तेल प्रसंस्करण हेतु उपयोग में लाने जाने वाले उपकरणों व परंपरागत तकनीकों, सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत अबुझमाड़िया में गोटुल, भुंजिया जनजाति में लाल बंगला इत्यादि, जनजातीय में परम्परागत कला कौशल जैसे बांसकला, काष्ठकला, चित्रकारी, गोदनाकला, शिल्पकला आदि का एवं अंतिम गैलरी में विषेष रूप से कमजोर जनजाति समूह यथा अबूझमाड़िया, बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर एवं राज्य शासन द्वारा मान्य भुंजिया एवं पण्डो के विशेषीकृत पहलुओं का प्रदर्शन किया गया है।

    cg news chhattisgarh news cm news CM Vishnudev Sai hindi news INDIA NEWS News knock india Tribal Museum
    Knock India

    Related Posts

    इतिहास, संस्कृति और स्वदेशी से आत्मनिर्भरता तक—‘मन की बात’ में देश की विकास यात्रा के विविध आयामों पर प्रधानमंत्री का प्रेरक संदेश…..

    August 30, 2026

    नेपाल में बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों के लापता होने पर मंत्री राजेश अग्रवाल चिंतित, अंबिकापुर की डॉ. मीना गुप्ता की सुरक्षित वापसी के लिए विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं अधिकारी…..

    August 30, 2026

    रंग-तरंग में सजेगा छत्तीसगढ़ का लोक-संगीत, संस्कृति और आधुनिक सुरों का संगम….

    August 30, 2026

    राज्यपाल रमेन डेका से एम्स के कार्यपालक निदेशक ने की सौजन्य मुलाक़ात…..

    August 30, 2026

    ‘मन की बात’ देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचारों और प्रेरक प्रयासों को देती है राष्ट्रीय पहचान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….

    August 30, 2026

    Lailunga Crime News: प्रलोभन और धमकियों के आगे नहीं झुकी 14 साल की पीड़िता, बोली- ‘न्याय के लिए लड़ूंगी, दोषियों को कराऊंगी जेल’

    August 30, 2026
    RO.NO.= 13954/ 80
    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक - KHURSHID ALAM
    मोबाइल - 07828272058
    ईमेल - [email protected]
    कार्यालय - Near Ratan Bhawan Phool Chowk Nayapara,CSEB Road Raipur (C.G.)
    August 2026
    M T W T F S S
     12
    3456789
    10111213141516
    17181920212223
    24252627282930
    31  
    « Jul    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.