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    छत्तीसगढ़

    छत्तीसगढ़ के DGP की दौड़ में 3 सीनियर IPS, अरुण और देव के लिए नेताओं की लॉबी, जीपी को मुखिया बनाने में लगे अफसर

    News DeskBy News DeskMay 17, 2025No Comments4 Mins Read
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    छत्तीसगढ़ के DGP की दौड़ में 3 सीनियर IPS, अरुण और देव के लिए नेताओं की लॉबी, जीपी को मुखिया बनाने में लगे अफसर
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    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में अब जल्द ही पूर्णकालिक डीजीपी (Director General of Police) की नियुक्ति होने वाली है। इसको लेकर आज यूपीएससी (UPSC) की सलेक्शन कमेटी की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने भाग लिया।छत्तीसगढ़ के नए डीजीपी के लिए UPSC से 3 अधिकारियों के नाम काे क्लीयरेंस मिल गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ के स्थायी डीजीपी बनने की रेस में IPS अरुण देव गौतम के अलावा, IPS पवन देव और IPS जीपी सिंह का नाम शामिल है।

    वर्तमान में DGP की जिम्मेदारी IPS अरुण देव गौतम के पास है। सरकार ने गौतम को डीजीपी पद की अस्थायी जिम्मेदारी दी है। बताया जा रहा है कि IPS अरुण देव गौतम के लिए प्रदेश के नेताओं की लॉबी लगी हुई है। वहीं IPS पवन देव के लिए बिहार के राजनेता लॉबी कर रहे हैं।

    इसी तरह से IPS जीपी सिंह के लिए प्रदेश के राजनेताओं के अलावा दिल्ली के राजनेता और अफसर लॉबी कर रहे हैं। इन तीनों में से कोई एक छत्तीसगढ़ पुलिस का स्थायी मुखिया होगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अरुण देव का नाम सबसे टॉप पर है।

    UPSC से छत्तीसगढ़ वापस आ गई फाइल

    गृह विभाग के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, यूपीएससी से सीएम सचिवालय फाइल और लेटर आ चुका है। राज्य सरकार के जिम्मेदारों ने यूपीएससी से आए पत्र पर अंतिम निर्णय लेने की कवायद शुरू कर दी है।जून माह तक नए डीजीपी का नाम सार्वजनिक किया जाएगा।

    4 फरवरी को IPS गौतम को मिली थी डीजीपी की जिम्मेदारी

    राज्य सरकार ने 4 फरवरी को आईपीएस अरुण देव गौतम को डीजीपी की अस्थायी जिम्मेदारी दी थी। इस संबंध में गृह विभाग के विशेष सचिव ने निर्देश जारी किया था। जिस समय आईपीएस गौतम को डीजीपी बनाया गया था, उस समय उनके पास नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक की भी जिम्मेदारी थी।

    स्थायी DGP की रेस में शामिल IPS वर्तमान में यहां हैं पदस्थ

        IPS अरुण देव गौतम: अस्थायी डीजीपी, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा नवा रायपुर के महानिदेशक, लोक अभियोजन नवा रायपुर के संचालक
        IPS पवन देव: चेयरमेन पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन
        IPS जीपी सिंह: डीजी पीएचक्यू

    पहले मुख्यमंत्री सीधे करते थे डीजीपी की नियुक्ति

    छत्तीसगढ़ में पहले मुख्यमंत्री खुद ही डीजीपी की नियुक्ति करते थे। इस प्रक्रिया को लेकर कोई निर्धारित नियम नहीं था। 2011 में एएन उपध्याय की नियुक्ति के बाद तक यूपीएससी को नाम भेजने का नियम लागू नहीं हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गाइडलाइन जारी की गई, जिसमें कहा गया था कि डीजीपी की नियुक्ति कम से कम दो साल के लिए की जानी चाहिए। साथ ही अगर नियुक्ति के बाद छह महीने से कम समय में रिटायरमेंट का समय बचा हो, तो भी उन्हें दो साल का कार्यकाल पूरा करना होगा।

    छत्तीसगढ़ में इस गाइडलाइन का पालन करते हुए, अशोक जुनेजा को इसका लाभ मिला था। अब इस नियम के तहत छत्तीसगढ़ को जल्द ही अपना नया और पूर्णकालिक डीजीपी मिलेगा, जो राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूती से संभालेगा।

    केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल:

    यूपीएससी सलेक्शन कमेटी केंद्रीय गृह मंत्रालय को तीन नामों का पैनल तैयार कर भेजेगा। वहां से छत्तीसगढ़ सरकार को फिर पेनल आएगा। जिस पर मुख्यमंत्री को अधिकार होगा कि वह इन तीन नामों के पेनल में से किसी एक नाम पर वे टिक लाएंगे, हालांकि, पहले डीजीपी की नियुक्ति मुख्यमंत्री सीधे करते थे। और एएन उपध्याय की नियुक्ति होने तक यूपीएससी को नाम भेजने का कोई नियम नहीं बना था। मुख्यमंत्री उस समय सीधे डीजीपी अपाइंट करते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसके बाद गाइडलाइन आ गया, जिसके अब कम-से-कम दो साल के लिए डीजीपी की नियुक्ति होगी।

    अशोक जुनेजा को इसका लाभ :

    इसके साथ ही अगर उनकी नियुक्ति के बाद रिटायरमेंट में छह महीने भी टाईम बचा हो तो भी उन्हें दो साल का नियुक्ति के बाद अवसर दिया जाएगा। इसका लाभ छत्तीसगढ़ में अशोक जुनेजा को मिला है।छह महीने से छत्तीसगढ़ के डीजीपी के लिए मामला यूपीएससी में लटका था। वहीं इससे पहले डीपीसी हुई भी मगर जीपी सिंह की इंट्री के बाद एक बार फिर से कई तरह की जानकारियां राज्य सरकार से  यूपीएससी ने मंगवाई थी। ज्ञात हो कि डीजीपी सलेक्शन के लिए  सरकार ने दिसंबर 2024 में प्रस्ताव भेज दिया था। लेकिन अब यह समझा जाता है कि भारत सरकार को यूपीएससी जल्द अब पेनल बनाकर भेज सकती है।

    News Desk

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