गौरी शंकर गुप्ता/लैलूंगा (रायगढ़)। रायगढ़ जिले के जनपद पंचायत लैलूंगा परिसर स्थित कैंटीन भवन के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होते ही गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। जनपद पंचायत द्वारा जारी नीलामी आदेश और उसकी शर्तों पर सवाल उठाते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीणों ने इसे पारदर्शी प्रक्रिया के बजाय चुनिंदा पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की कवायद करार दिया है।
शासकीय दस्तावेजों के मुताबिक, जनपद पंचायत द्वारा 29 जुलाई 2026 को कैंटीन भवन को 11 माह के अल्पकालिक किराए पर देने हेतु सूचना जारी की गई थी, जिसके तहत इच्छुक आवेदकों से 12 अगस्त 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा विरोध सुरक्षा राशि (Earnest Money Deposit – EMD) को लेकर हो रहा है। प्रशासन ने कैंटीन नीलामी में शामिल होने के लिए ₹2 लाख की अमानत राशि जमा करना अनिवार्य किया है। स्थानीय स्तर के छोटे व्यवसायियों का कहना है कि महज 11 महीने के छोटे कार्यकाल के लिए इतनी भारी-भरकम सुरक्षा राशि तय करना सामान्य प्रशासनिक समझ से परे है और यह सीधे तौर पर स्थानीय युवाओं को प्रक्रिया से बेदखल करने की साजिश लगती है।
| नीलामी प्रक्रिया की प्रमुख शर्तें | स्थानीय व्यापारियों द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल |
| आवेदन की समयावधि | 29 जुलाई 2026 से 12 अगस्त 2026 तक |
| किराए की अवधि | 11 माह (अल्पकालिक अनुबंध) |
| सुरक्षा राशि (EMD) | ₹2,00,000 (दो लाख रुपये अनिवार्य) |
| प्रतिस्पर्धा पर प्रभाव | भारी अमानत राशि के कारण स्थानीय छोटे व्यापारी व बेरोजगार युवा बोली से बाहर |
| मुख्य आरोप | पारदर्शिता का अभाव व आर्थिक रूप से सक्षम खास व्यापारी को लाभ पहुंचाने की कोशिश |
कैंटीन आवंटन की इन शर्तों को लेकर अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि क्या पूरी प्रक्रिया को किसी खास आर्थिक रूप से मजबूत व्यापारी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ही तैयार किया गया है? अगर स्थानीय और छोटे व्यापारियों को समान अवसर नहीं मिलेगा, तो निष्पक्षता और सुशासन के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल, इस बढ़ते जन-विरोध और निष्पक्षता के सवालों के बीच अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इन शर्तों पर पुनर्विचार करेगा या इसी व्यवस्था के तहत नीलामी संपन्न कराई जाएगी।
