गौरी शंकर गुप्ता/पत्थलगांव (जशपुर)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना’ (PMBJP) के तहत किसानों को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराए जाने वाले सब्सिडी युक्त ‘भारत यूरिया’ की कालाबाजारी का एक बड़ा मामला जशपुर जिले के पत्थलगांव से सामने आया है।
जशपुर रोड स्थित ‘श्री बालाजी खाद भंडार’ पर आरोप है कि वह यूरिया की किल्लत और किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से लगभग दो गुना अधिक कीमत वसूल रहा है।
किसान की आपबीती: न पक्का बिल, न डिजिटल भुगतान
ग्राम पंगसूआ (कुमेकेला) के पीड़ित किसान लोहर साय नाग ने खाद दुकान में अपने साथ हुई आपबीती साझा करते हुए बताया:
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यूरिया में भारी ओवरचार्जिंग: 45 किलोग्राम की ‘भारत यूरिया’ की बोरी, जिस पर सरकारी एमआरपी ₹266.50 अंकित है, उसके लिए पहले ₹500 की मांग की गई। मिन्नतें करने के बाद सौदा ₹450 प्रति बोरी में तय हुआ।
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DAP की तय दर से अधिक वसूली: डीएपी (DAP) का सरकारी रेट ₹1,350 के आसपास होने के बावजूद किसान से ₹1,600 प्रति बोरी मांगा गया और कोई छूट देने से साफ मना कर दिया गया।
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बिल देने से साफ इनकार: जब किसान ने अपनी खरीद का पक्का जीएसटी बिल मांगा, तो विक्रेता ने स्पष्ट रूप से बिल देने से मना कर दिया।
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कैश में लेनदेन की शर्त: ऑनलाइन भुगतान (PhonePe/UPI) स्वीकार करने से इनकार करते हुए विक्रेता ने केवल नकद (Cash) देने का दबाव बनाया, जिसके लिए किसान को एटीएम से जाकर पैसे निकालने पड़े।
नियमों का खुला उल्लंघन और टैक्स चोरी की आशंका
दुकान के बाहर लगे बोर्ड पर ‘श्री बालाजी खाद भंडार’ और संचालक धीरज अग्रवाल का नाम व मोबाइल नंबर दर्ज है। बोरी पर अंकित सरकारी मूल्य की अनदेखी कर मनमानी कीमत वसूलना सीधे तौर पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 (Fertilizer Control Order) का गंभीर उल्लंघन है।
इसके अलावा, पक्का बिल न देना और डिजिटल भुगतान से परहेज करना इस बात की ओर इशारा करता है कि दुकान में बिक्री का रिकॉर्ड छिपाया जा रहा है ताकि कागजों में पॉस (POS) मशीन और वास्तविक स्टॉक का मिलान न हो सके और टैक्स चोरी की जा सके।
प्रशासनिक कार्रवाई और लाइसेंस निरस्त्रीकरण की मांग
स्थानीय किसानों, ग्रामीणों और किसान संगठनों ने जशपुर जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग से तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है:
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पॉस (POS) एवं स्टॉक की जांच: दुकान के पॉस मशीन रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और बिल-बुक की तत्काल भौतिक जांच की जाए।
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सख्त कानूनी कार्रवाई: ‘उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985’ और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर दुकान का उर्वरक लाइसेंस रद्द किया जाए।
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अवैध वसूली की वापसी: किसानों से अवैध रूप से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस दिलाई जाए।
“सरकार द्वारा हर साल हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी इसलिए दी जाती है ताकि खेती की लागत कम हो सके। यदि ऐसे विक्रेताओं पर त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी योजना का लाभ किसानों के बजाय बिचौलियों की जेब में जाता रहेगा।”
— पीड़ित किसान एवं स्थानीय ग्रामीण (पत्थलगांव)
