Raigarh News Update: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। रायगढ़ जिले के शासकीय हाई स्कूल कुपाकानी में सरस्वती साइकिल योजना के तहत बालिकाओं को साइकिल वितरण के दौरान अचानक उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बांटी जा रही साइकिलों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आरोप है कि योजना के नाम पर गरीब और आदिवासी परिवारों की बेटियों को अत्यंत घटिया और कबाड़ किस्म की साइकिलें थमाई जा रही थीं।
इस दौरान भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाले जनप्रतिनिधि रवि भगत को पुलिस द्वारा थाने में बैठाए जाने के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ चुका है।
टेप और स्टीकर चिपकाकर बांटी जा रही थीं साइकिलें!
शासकीय हाई स्कूल कुपाकानी में आयोजित इस कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें बांटी जा रही साइकिलों की दयनीय स्थिति साफ देखी जा सकती है:
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खराब गुणवत्ता: बांटी जा रही साइकिलों के न तो ब्रेक ठीक ढंग से काम कर रहे थे और न ही उनमें घंटी लगी थी।
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फर्जीवाड़े का आरोप: पुरानी या कबाड़ साइकिलों पर अलग-अलग कंपनियों के स्टीकर और रंग-बिरंगे टेप चिपकाकर उन्हें नई साइकिल का रूप देने का प्रयास किया गया था।
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रसीद व बिल नदारद: जब मौके पर मौजूद रवि भगत और अन्य नेताओं ने संबंधित विभागीय अधिकारियों व स्कूल प्रबंधन से साइकिलों के खरीद बिल, जीएसटी रसीद और वारंटी कार्ड मांगे, तो कोई भी जिम्मेदार अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
“छत्तीसगढ़ की आदिवासी बेटियों को कबाड़ साइकिलें क्यों?”
घटनास्थल से सामने आए वीडियो में रवि भगत और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारियों से तीखे सवाल करते नजर आ रहे हैं।
रवि भगत ने अधिकारियों को घेरते हुए कहा:
“क्या यह साइकिलें गुणवत्तापूर्ण हैं? आप अपने मुंह से कहिए! छत्तीसगढ़ शासन जो फंड दे रहा है, क्या उससे बच्चों को ऐसी घटिया साइकिलें बांटी जाएंगी? राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री हैं और यहां की आदिवासी बेटियों को ऐसी घटिया और कबाड़ साइकिलें बांटी जा रही हैं… इसका जिम्मेदार कौन है और इसका जवाब कौन देगा?”
आवाज उठाने पर रवि भगत को थाने में क्यों बैठाया गया?
स्कूल परिसर में चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। बेटियों के अधिकार और सरकारी योजना में हो रही धांधली के खिलाफ आवाज उठाने वाले रवि भगत को पुलिस द्वारा थाने में ले जाकर बैठा दिया गया।
जब मीडिया और स्थानीय नागरिकों ने इस संबंध में पुलिस प्रशासन से संपर्क साधा और पूछा कि रवि भगत पर क्या कार्रवाई की जा रही है या उन्हें किस आधार पर बैठाया गया है, तो संबंधित थाना प्रभारी ने केवल इतना कहकर बात टाल दी कि “वे अभी मीटिंग में व्यस्त हैं।”
सुशासन के दावों पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी घटना के बाद स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। एक तरफ जहां राज्य सरकार द्वारा पारदर्शिता और सुशासन के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं धरातल पर स्कूली छात्राओं के हक की सामग्री में इस तरह की लापरवाही और घटिया सामान बांटे जाने से प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब जनता और पीड़ित परिवार सीधे तौर पर सवाल पूछ रहे हैं कि:
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कबाड़ साइकिलों की खरीद और वितरण का टेंडर लेने वाले ठेकेदारों व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
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जनता के प्रतिनिधि को थाने में बैठाने के पीछे क्या कोई राजनीतिक दबाव है?
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थाना प्रभारी द्वारा ‘मीटिंग’ का बहाना बनाकर जवाबदेही से बचने का प्रयास क्यों किया जा रहा है?
