गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा/रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र अंतर्गत मार्च 2021 में हुए चर्चित और सनसनीखेज हत्याकांड में न्याय की जीत हुई है। अपर सत्र न्यायालय घरघोड़ा के माननीय न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपिया यशोदा उर्फ दशोदा सारथी को अपने प्रेमी देवा उर्फ लखन सिदार की हत्या करने और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया है। अदालत ने आरोपिया को धारा 302 एवं 201 भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और कुल ₹2,000 (1000+1000) के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
इसके साथ ही, संवेदनशीलता का परिचय देते हुए न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से मृतक के आश्रितों को ₹1,00000 (एक लाख रुपये) की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा की है।
क्या था पूरा मामला? (कापू थाना अपराध क्र. 37/2021)
मामले का संक्षिप्त विवरण देते हुए अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बताया कि घटना 1 मार्च 2021 की है। ग्राम भोजपुर (थाना कापू) के कोटवार नैहर दास ने 2 मार्च 2021 को थाने में उपस्थित होकर सूचना दी थी कि गांव की रहने वाली यशोदा उर्फ दशोदा सारथी का प्रेमी देवा उर्फ लखन सिदार (निवासी महुआ पाली, खरसिया) 1 मार्च की रात लगभग 8:30 बजे भोजपुर आया था। कोटवार के अनुसार, आरोपिया ने दावा किया था कि देवा ने रात 9:30 बजे अपने शरीर पर केरोसिन (मिट्टी का तेल) छिड़ककर माचिस मारकर आत्महत्या कर ली है।
पुलिस विवेचना में खुला ‘हत्या और साजिश’ का राज
सूचना मिलने पर तत्कालीन विवेचना अधिकारी धनी राम राठौर ने मर्ग कायम कर गहनता से जांच शुरू की। पुलिस विवेचना के दौरान चौंकाने वाला सच सामने आया:
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त्रिकोण प्रेम प्रसंग: घटना की रात मृतक देवा उर्फ लखन सिदार अपनी प्रेमिका यशोदा से मिलने पहुंचा था। लेकिन वहां पहले से ही यशोदा का एक अन्य प्रेमी (फरार आरोपी दुष्यंत यादव) मौजूद था।
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विवाद और हत्या: दोनों प्रेमियों का आमना-सामना होते ही उनके बीच विवाद और हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान आरोपिया यशोदा और उसके दूसरे प्रेमी दुष्यंत यादव ने मिलकर देवा का गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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सबूत मिटाने की कोशिश: कत्ल करने के बाद आरोपियों ने वारदात को आत्महत्या का रूप देने और साक्ष्य मिटाने की नीयत से मृतक के शव पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी।
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झूठी सूचना: अगले दिन सुबह आरोपिया यशोदा ने कोटवार को गुमराह करते हुए कहानी गढ़ी कि देवा ने खुद को आग लगाकर खुदकुशी कर ली है।
कड़े साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मिली सजा
पुलिस ने जांच के दौरान आरोपिया यशोदा को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने सह-आरोपी दुष्यंत यादव के साथ मिलकर हत्या करने और साक्ष्य मिटाने की बात स्वीकार की।
पुलिस ने सभी महत्वपूर्ण फॉरेंसिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को संकलित किया तथा स्वतंत्र साक्षियों के बयान दर्ज कर यशोदा सारथी और फरार आरोपी दुष्यंत यादव के विरुद्ध न्यायालय में चालान (चार्जशीट) प्रस्तुत किया।
न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला
अदालत में विचारण के दौरान अपर लोक अभियोजक ने अभियोजन पक्ष की ओर से मजबूत साक्ष्य और गवाह पेश किए। माननीय अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का सूक्ष्मता से अनुशीलन करने के बाद आरोपिया यशोदा उर्फ दशोदा सारथी को हत्या और साक्ष्य छुपाने का पूर्ण दोषी ठहराया और आजीवन कारावास का दंडादेश सुनाया।
प्रकरण में शामिल अन्य आरोपी दुष्यंत यादव वर्तमान में फरार है, जिसकी पुलिस द्वारा तलाश की जा रही है।
