गौरी शंकर गुप्ता/ घरघोड़ा (रायगढ़)। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम चारमार में पैतृक कृषि भूमि को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित किसान परिवार ने आरोप लगाया है कि न्यायालय में बंटवारे का मामला लंबित होने के बावजूद बिना सभी हिस्सेदारों की सहमति के जमीन का नामांतरण कर दिया गया और बाद में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उक्त भूमि की रजिस्ट्री बी.एस. स्पंज प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दी गई।
71.767 हेक्टेयर संयुक्त जमीन पर विवाद
पीड़ित पक्ष चिंतामणी गुप्ता एवं सरधाकर गुप्ता का कहना है कि उनकी लगभग 71.767 हेक्टेयर पैतृक भूमि आज भी राजस्व अभिलेखों में संयुक्त खाते के रूप में दर्ज है। इस जमीन के बंटवारे का प्रकरण नायब तहसीलदार न्यायालय, घरघोड़ा में वर्तमान में लंबित है। इसके बावजूद नियम-कायदों को ताक पर रखकर कुछ खसरा नंबरों का नामांतरण अन्य व्यक्तियों के नाम पर दर्ज कर दिया गया।

विरोध करने पर रिकॉर्ड में संशोधन का आरोप
शिकायतकर्ताओं का संगीन आरोप है कि जब उन्होंने इस अवैध नामांतरण का विरोध किया और तहसील प्रशासन से शिकायत की, तो संबंधित राजस्व अभिलेखों में आनन-फानन में फेरबदल कर दिया गया। आरोप है कि फर्जी तरीके से किए गए पुराने नामांतरण को वैध ठहराने के लिए रिकॉर्ड में बैकडेटेड संशोधन किए गए हैं।
5 मई को कंपनी को हुई रजिस्ट्री, निर्माण कार्य जारी
शिकायत पत्र के अनुसार, गत 5 मई 2026 को विवादित भूमि की रजिस्ट्री बी.एस. स्पंज प्रा. लि. के पक्ष में निष्पादित कर दी गई। पीड़ित परिवार का दावा है कि मामले की शिकायत लंबित होने के बावजूद कंपनी द्वारा विवादित स्थल पर बाउंड्री वॉल, पिलर और अन्य पक्के निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। पीड़ितों ने मौके के फोटो व वीडियो साक्ष्य जुटाकर अब मामले को कलेक्टर रायगढ़ के समक्ष ले जाने की तैयारी कर ली है।
प्रशासन की कार्यशैली पर टिकी नजरें
यह मामला सिर्फ दो पक्षों के बीच भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका भी कटघरे में है। ग्रामीणों व पीड़ितों ने मांग की है कि निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाते हुए स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए।
नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत दावों पर आधारित है। मामले में आधिकारिक पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
