गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। जिले का घरघोड़ा नगर स्टेडियम लंबे समय से क्रिकेट प्रेमियों और स्थानीय खिलाड़ियों के लिए एक प्रमुख खेल केंद्र बना हुआ है। सुबह से लेकर शाम तक मैदान में युवाओं की चहल-पहल बनी रहती है। हालांकि, इसी स्टेडियम परिसर और आसपास बच्चों के मनोरंजन और युवाओं की फिटनेस के लिए लगाए गए झूले व ओपन जिम के उपकरणों की मौजूदा बदहाली प्रशासन के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
क्रिकेट के लिए बेहतर, लेकिन अन्य सुविधाओं की अनदेखी: घरघोड़ा स्टेडियम को क्षेत्र में क्रिकेट गतिविधियों का मुख्य आधार माना जाता है। लेकिन स्टेडियम की जिम्मेदारी सिर्फ क्रिकेट पिच तक सीमित रह गई है। परिसर में स्थित ओपन जिम और बच्चों के झूलों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है:
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जर्जर उपकरण: व्यायाम के कई उपकरण उखड़ चुके हैं, कुछ के लोहे के ढांचे पूरी तरह टूटकर अनुपयोगी पड़े हैं।
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बच्चों की सुरक्षा पर खतरा: शाम को परिजनों के साथ पहुंचने वाले बच्चों के लिए लगाए गए झूले टूटे-फूटे हैं, जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
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रखरखाव का अभाव: सार्वजनिक धन से स्थापित ये सुविधाएं समय पर मरम्मत न होने के कारण धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो रही हैं।

सीएसआर मद और जनप्रतिनिधियों से जीर्णोद्धार की अपील: स्थानीय निवासियों का कहना है कि घरघोड़ा क्षेत्र में औद्योगिक एवं खनन कंपनियां बड़े पैमाने पर कार्यरत हैं। कंपनियां अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) मद से या स्थानीय जनप्रतिनिधि पहल करके इस परिसर को गोद ले सकते हैं। इससे झूलों का जीर्णोद्धार और आधुनिक फिटनेस उपकरणों की स्थापना संभव हो सकेगी।
नगरवासियों ने संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि स्टेडियम परिसर का तत्काल निरीक्षण कर खराब उपकरणों की सूची बनाई जाए, जर्जर झूलों को हटाकर नए उपकरण लगाए जाएं और नियमित देखभाल की स्थायी व्यवस्था की जाए।
