गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा/रायगढ़। लैलूंगा थाना क्षेत्र के ग्राम कोड़ामाई में हुए बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायालय श्रीमान अभिषेक शर्मा, अपर सत्र न्यायाधीश घरघोड़ा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मृतक लच्छीराम सिदार की हत्या के जुर्म में उसकी पत्नी रुधनी सिदार और पुत्र परमेश्वर सिदार को धारा 302 भारतीय दंड संहिता के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों आरोपियों पर ₹1,000 – ₹1,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह मामला 25 अगस्त 2021 की रात का है। ग्राम कोड़ामाई में लच्छीराम सिदार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना मिलने पर तत्कालीन थाना प्रभारी/निरीक्षक आर. एन. साय की टीम मौके पर पहुंची। घर के भीतर खून फैला हुआ था और लच्छीराम मृत अवस्था में पड़ा था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संभावित पहलुओं से जांच शुरू की। आरोपियों ने इस वारदात को आत्महत्या का रूप देने का भरपूर प्रयास किया था, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी और गहन विवेचना के आगे उनकी एक न चली।
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे:
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विवाद की वजह: 25 अगस्त 2026 की रात लगभग 8 से 9 बजे के बीच लच्छीराम अत्यधिक शराब के नशे में धुत होकर घर पहुंचा और खाना मांगने लगा। खाना खाते समय वह अपनी पत्नी और बेटे को डांट-फटकार रहा था। इस दौरान उसने बेहद घिनौना आचरण किया, जिससे घर में कहासुनी बढ़ गई।
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रस्सी से घोंटा गला: अत्यधिक विवाद और आवेश में आकर पत्नी रुधनी सिदार और पुत्र परमेश्वर सिदार ने प्लास्टिक की रस्सी का फंदा बनाया और लच्छीराम के गले में फंसाकर दोनों तरफ से खींच दिया, जिससे उसकी दम घुटने से मौके पर ही सांसें थम गईं।
मामले की संपूर्ण विवेचना के बाद निरीक्षक आर. एन. साय ने न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। अदालत ने सभी साक्षियों के बयान और साक्ष्यों का अनुशीलन करते हुए मां-बेटे को हत्या का दोषी पाया। सजा सुनाने के साथ ही माननीय न्यायालय ने पीड़ित/मृतक के आश्रितों को विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से ₹1,00000 (एक लाख रुपये) की क्षतिपूर्ति राशि दिलाए जाने की महत्वपूर्ण अनुशंसा भी की है।
