गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोडकेल से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज और पेचीदा मामला सामने आया है। यहां वर्षों पुराने कथित निजी संबंधों को ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) में रफा-दफा करने का लिखित इकरारनामा तैयार किया गया था। हालांकि, समझौते की इस रकम के लेनदेन और कथित बंदरबांट के बाद अब मामला एक-दूसरे को सलाखों के पीछे भेजने की होड़ में बदल चुका है। पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में दोनों पक्षों की ओर से परस्पर विरोधी शिकायती आवेदन सौंपे गए हैं, जिनमें एक पत्रकार की संदिग्ध भूमिका, पुलिस के नाम पर धन उगाही और दोबारा दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाने जैसी धमकियों के संगीन आरोप लगाए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कोडकेल निवासी उजागर सिदार और फूलवती यादव के बीच पिछले 15 वर्षों से संबंध थे। दोनों पक्षों द्वारा दिए गए दस्तावेजों के मुताबिक फरवरी 2026 में दोनों पक्षों ने आपसी विवाद को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से 5 लाख रुपये की तयशुदा राशि पर एक इकरारनामा निष्पादित किया था। इस इकरारनामे की शर्त के तहत दोनों को भविष्य में एक-दूसरे के व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप न करने और कोई भी कानूनी या पुलिस शिकायत दर्ज न कराने पर सहमत होना था।
इकरारनामे के कुछ ही हफ्तों बाद मामले में उस वक्त नया मोड़ आया, जब फूलवती यादव ने 22 अप्रैल 2026 को एसपी कार्यालय पहुंचकर एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। इसमें छत्तीसगढ़ मीडिया एसोसिएशन के संभाग उपाध्यक्ष व पत्रकार रवि गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए गए। फूलवती का दावा था कि 5 लाख रुपये की तय राशि में से उसे केवल 3 लाख रुपये ही दिए गए, जबकि शेष 2 लाख रुपये “स्थानीय पत्रकारों और तत्कालीन थाना प्रभारी” को मैनेज करने के नाम पर उक्त पत्रकार द्वारा अपने पास रख लिए गए।
इसके बाद अगस्त 2026 में मामले ने नया तूल पकड़ लिया, जब 3 अगस्त 2026 को एसपी दफ्तर में दो अलग-अलग अर्जियां दाखिल हुईं:
-
उजागर सिदार का आरोप: उजागर ने एसपी को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया कि 5 लाख रुपये की पूरी रकम लेने के बाद भी पत्रकार रवि गुप्ता और फूलवती यादव उससे अतिरिक्त पैसों की अनुचित मांग कर रहे हैं। मांग पूरी न करने पर उसे बलात्कार के झूठे केस में फंसाकर जेल भिजवाने की खुली धमकी दी जा रही है।
-
फूलवती का पलटवार: उसी दिन फूलवती यादव ने उजागर के खिलाफ आवेदन देकर नया रुख अपनाया। उसने 15 साल तक पति-पत्नी की तरह साथ रहने और संतान होने का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उजागर ने उसे धोखे में रखकर दूसरी शादी कर ली है, लिहाजा उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि जब फरवरी 2026 में 5 लाख रुपये में लिखित समझौता निष्पादित हो चुका था, तो फिर कुछ ही महीनों बाद दोबारा शिकायतें क्यों दर्ज कराई गईं? क्या वास्तव में खाकी और कलम के नाम पर ₹2 लाख की अवैध वसूली की गई या फिर कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल केवल ब्लैकमेलिंग और उगाहने के हथियार के रूप में किया जा रहा है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए रायगढ़ पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस की निष्पक्ष जांच में इस पूरे ब्लैकमेलिंग और वसूली के खेल की सच्चाई सामने आती है या फिर यह मामला भी प्रशासनिक फाइलों में दबकर रह जाता है।
