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    Home » Blog » बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने की ओर बढ़ते कदम, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से घरों की छतें बनीं ऊर्जा उत्पादन की इकाइयां, सरगुजा में 1,733 घरों में स्थापित हुए रूफटॉप सोलर संयंत्र….
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    बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने की ओर बढ़ते कदम, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से घरों की छतें बनीं ऊर्जा उत्पादन की इकाइयां, सरगुजा में 1,733 घरों में स्थापित हुए रूफटॉप सोलर संयंत्र….

    News DeskBy News DeskSeptember 18, 2026No Comments7 Mins Read
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    बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने की ओर बढ़ते कदम, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से घरों की छतें बनीं ऊर्जा उत्पादन की इकाइयां, सरगुजा में 1,733 घरों में स्थापित हुए रूफटॉप सोलर संयंत्र….
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    रायपुर: देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में सहभागी बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना ने घरों की छतों को केवल मकान का हिस्सा नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें बिजली उत्पादन की छोटी इकाइयों में बदलने का रास्ता खोला है। रूफटॉप सोलर संयंत्र के माध्यम से परिवार अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करने के साथ अतिरिक्त बिजली को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विद्युत ग्रिड में भेज सकते हैं। इस तरह बिजली का एक सामान्य उपभोक्ता ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में सहभागी बनकर ‘ऊर्जा दाता’ की भूमिका की ओर बढ़ रहा है।

    सूर्य की रोशनी से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई राह

    भारत में सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए घरों की खाली छतों का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करना स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्र परिवार अपने घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करा सकते हैं और निर्धारित प्रावधानों के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

    योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी से संयंत्र स्थापित करने की प्रारंभिक लागत का बोझ कम होता है। वहीं, सौर ऊर्जा से घर की बिजली जरूरतों की पूर्ति होने पर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता और घरेलू बिजली खर्च में कमी आने की संभावना रहती है। आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने की व्यवस्था नागरिकों को ऊर्जा व्यवस्था से सीधे जोड़ती है।

    सरगुजा में योजना के प्रति बढ़ा उत्साह, लक्ष्य से अधिक आए आवेदन

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को सरगुजा जिले में भी नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 2,000 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 3,282 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3,222 आवेदनों में वेंडरों का चयन किया जा चुका है, जबकि 1,733 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

     विशेष लेख : बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा दाता बनने की ओर बढ़ते कदम

    शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में योजना की पहुंच बढ़ रही है। अम्बिकापुर शहर में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 2,158 आवेदन प्राप्त हुए और 1,360 घरों में संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं अम्बिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,124 आवेदन प्राप्त हुए तथा 373 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

    ये आंकड़े बताते हैं कि सरगुजा में नागरिक सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए तेजी से आगे आ रहे हैं। योजना के प्रति बढ़ती रुचि यह भी दर्शाती है कि परिवार बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में अपनी भागीदारी को लेकर भी जागरूक हो रहे हैं।

    विनोद कुमार राय की छत बनी ऊर्जा उत्पादन का माध्यम

    अम्बिकापुर के राजेंद्र प्रसाद वार्ड, दर्रीपारा निवासी श्री विनोद कुमार राय के परिवार का अनुभव इस बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करता है। सोलर संयंत्र स्थापित करने से पहले उनके घर का बिजली बिल कई बार 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाता था। इससे परिवार के मासिक बजट पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था।

    प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद श्री राय ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया और अपने घर की छत पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। लगभग 2 लाख रुपये की लागत वाले संयंत्र पर उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस तरह उन्हें कुल 1.08 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्राप्त हुई।

    श्री राय ने सब्सिडी की राशि सोलर संयंत्र के लिए लिए गए बैंक ऋण में जमा की। अब उनके लिए सौर ऊर्जा केवल बिजली खर्च कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि बिजली उत्पादन में स्वयं की भागीदारी का अवसर भी है। कई बार उनके घर में सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली घरेलू खपत से अधिक हो जाती है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है और निर्धारित नियमों के अनुसार उसका लाभ मिलता है।

    नीधि वर्मा के परिवार को बिजली खर्च में राहत

    अम्बिकापुर के मायापुर निवासी श्रीमती नीधि वर्मा ने भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अपने घर में सोलर बिजली संयंत्र स्थापित कराया। उनके अनुसार संयंत्र लगने से पहले घर का बिजली बिल लगभग 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह आता था। सौर ऊर्जा से घरेलू बिजली की जरूरतें पूरी होने के बाद बिजली खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली है।

    श्रीमती वर्मा को भी योजना के तहत लगभग 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी मिली, जिसमें केंद्र सरकार की 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की 30 हजार रुपये की सहायता शामिल है। उनका कहना है कि पहले उनका परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब घर की छत से बिजली का उत्पादन भी कर रहा है। अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाने से उनका परिवार ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से सहभागी बना है।

    स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से खपत पर नजर

    रूफटॉप सोलर व्यवस्था के साथ डिजिटल तकनीक भी बिजली उपयोग को अधिक समझने और नियंत्रित करने में मदद कर रही है। स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपने घर की बिजली खपत से संबंधित जानकारी देख सकते हैं।

    श्री विनोद कुमार राय बताते हैं कि स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से वे प्रतिदिन की बिजली खपत पर नजर रखते हैं। इससे परिवार को अनावश्यक रूप से चल रहे विद्युत उपकरणों को बंद करने और बिजली के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूकता मिली है।

    इस तरह प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों में ऊर्जा बचत, स्मार्ट बिजली उपयोग और जिम्मेदार उपभोक्ता व्यवहार को भी बढ़ावा दे रही है।

    बिजली बिल में राहत के साथ पर्यावरण संरक्षण

    सौर ऊर्जा का महत्व केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन में करने से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है। एक घर की छत पर स्थापित सोलर संयंत्र छोटी इकाई जरूर है, लेकिन जब हजारों और लाखों परिवार इससे जुड़ते हैं तो सामूहिक रूप से यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का बड़ा माध्यम बन सकता है।

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना इसी जनभागीदारी को व्यापक स्वरूप देने का प्रयास है। योजना के माध्यम से परिवार अपनी ऊर्जा जरूरतों के प्रति अधिक आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।

    उपभोक्ता से उत्पादककृऊर्जा व्यवस्था में जनभागीदारी का नया आयाम

    परंपरागत व्यवस्था में आम नागरिक विद्युत ग्रिड से बिजली प्राप्त कर उसका उपयोग करता है और बिल का भुगतान करता है। रूफटॉप सोलर इस व्यवस्था में एक नया आयाम जोड़ता है। अब वही उपभोक्ता अपने घर की छत पर बिजली का उत्पादन कर सकता है, पहले अपनी जरूरत पूरी कर सकता है और परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त बिजली ग्रिड को उपलब्ध करा सकता है।

    यही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक हैकृऊर्जा उत्पादन में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी।

    हर छत बने ऊर्जा का स्रोत

    सरगुजा में प्राप्त आवेदनों और स्थापित सोलर संयंत्रों की संख्या यह संकेत देती है कि सौर ऊर्जा को लेकर नागरिकों की रुचि बढ़ रही है। शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण परिवार भी अपने घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।

    विनोद कुमार राय और नीधि वर्मा जैसे परिवारों के अनुभव इस बदलाव को जमीन पर साकार होते दिखाते हैं। जिन घरों में कभी बिजली बिल मासिक बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा होता था, उन्हीं घरों की छतें अब बिजली उत्पादन का माध्यम बन रही हैं।

    सौर ऊर्जा से बिजली खर्च में राहत, अतिरिक्त बिजली से ग्रिड को सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षणकृप्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना घर-घर को ऊर्जा आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जब अधिक से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपनाएंगे, तो ऊर्जा उत्पादन में जनभागीदारी का दायरा भी बढ़ेगा। इस तरह देश की हर ऐसी छत, जिस पर सौर पैनल स्थापित है, स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में अपना योगदान देते हुए ‘विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़’ की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण इकाई बन सकती है।

    News Desk

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