गौरी शंकर गुप्ता/बीजापुर। बस्तर के घने जंगलों, दुर्गम रास्तों और भारी बारिश के बीच कीचड़ को पार करते हुए मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज बीजापुर जिले के सुदूर नक्सल प्रभावित गांवों यमपुर (पामेड़) और नेलाकांकेर पहुंचे। उनकी इस संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का मुख्य उद्देश्य नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवारों का हालचाल जानना, उनकी पीड़ा को करीब से समझना और इस कठिन घड़ी में उनके साथ खड़े होना था।
यात्रा के दौरान यमपुर पहुंचने से पहले भारी बारिश और दलदल के कारण महाराज जी का काफिला फंस गया। एक वाहन कीचड़ में धंस गया जबकि दूसरा खराब हो गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी यात्रा नहीं रोकी। इस यात्रा के दौरान डॉ. प्रेमा साईं ने नक्सल हिंसा में अपनी जान गंवाने वाले कुल चार परिवारों से मुलाकात कर उन्हें आर्थिक सहायता व राहत सामग्री प्रदान की।
| गांव का नाम (Village) | नक्सल पीड़ित परिवार/मृतक (Victim Family) | सहायता राशि (Financial Help) | अन्य राहत सामग्री एवं घोषणाएं (Other Relief & Announcements) |
| यमपुर (पामेड़) | स्व. सुन्नम सम्मैया (पत्नी नर्सम्मा) | ₹21,000 | साड़ी, बच्चों को कपड़े, कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स, चप्पल व भभूति |
| यमपुर (पामेड़) | स्व. वेक्को संदीप (पत्नी आरती) | ₹21,000 | महिलाओं को साड़ी, बच्चे को शैक्षणिक सामग्री व दिव्य कवच |
| नेलाकांकेर | स्व. तिरुपति सोढ़ी (पत्नी शांति) | ₹31,000 | बेटी संध्या की शादी का पूरा खर्च उठाने और स्वयं कन्यादान करने का ऐलान |
| नेलाकांकेर | स्व. रवि कट्टम (23 वर्ष, इकलौती संतान) | ₹31,000 | स्कूल बैग, कपड़े, जूते-चप्पल और भविष्य में भी सहायता का भरोसा |
नेलाकांकेर में तिरुपति सोढ़ी के परिवार से मुलाकात के दौरान जब महाराज जी को पता चला कि उनकी पांच संताने हैं, तो उन्होंने एक ऐतिहासिक और भावुक घोषणा करते हुए कहा कि वे मृतक की बेटी संध्या की शादी का संपूर्ण खर्च स्वयं उठाएंगे और उसका कन्यादान भी करेंगे। इस दौरान उनका बच्चों के प्रति बेहद आत्मीय व्यवहार देखा गया; उन्होंने स्वयं अपने हाथों से बच्चों को चप्पलें पहनाईं, कपड़े और स्कूल बैग वितरित किए। महाराज जी ने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन भी किया और उनकी समस्याएं सुनीं।
ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों से संवाद करते हुए डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने देश और राज्य के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा का उल्लेख करते हुए उन्हें ‘देव पुरुष’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से बस्तर में शांति, सुरक्षा और सामान्य जीवन की बहाली की उम्मीद मजबूत हुई है।
अपनी यात्रा के अंत में डॉ. प्रेमा साईं ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों का दर्द किसी एक व्यक्ति या परिवार का नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का है। सहायता प्रदान करने का मुख्य ध्येय केवल वित्तीय मदद देना नहीं, बल्कि इन परिवारों के भीतर यह विश्वास जगाना है कि समाज और देश उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
