न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादियों का नेटवर्क अब अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है। लगातार आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों के दबाव के चलते माओवादियों की संख्या तेजी से घटी है। हालांकि, कुछ कट्टर कैडर अब भी अंडरग्राउंड रहकर गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।
बड़े कमांडरों के सरेंडर से पड़ा असर
माओवादी कमांडर पापाराव के जगदलपुर में और PLGA इंचार्ज सोढ़ी केसा के तेलंगाना में आत्मसमर्पण के बाद संगठन को बड़ा झटका लगा है। इससे बस्तर में सक्रिय माओवादियों का नेटवर्क कमजोर हुआ है।
IG का कड़ा संदेश
बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने स्पष्ट कहा है कि बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर बॉर्डर पर अब गिनती के माओवादी ही बचे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह आत्मसमर्पण का आखिरी मौका है, इसके बाद सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज कर दी जाएगी।
तेलंगाना DGP की अपील
तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने भी माओवादियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। उनके अनुसार, 2024 में जहां 125 माओवादी सक्रिय थे, अब यह संख्या घटकर केवल 5 रह गई है।
बड़े नाम अब भी फरार
हालांकि, कुछ बड़े माओवादी नेता जैसे गणपति और महिला माओवादी रूपी अब भी अंडरग्राउंड हैं। ये माओवादी संगठन के बचे हुए ढांचे को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
निर्णायक मोड़ पर बस्तर
बस्तर में माओवाद का ढांचा लगभग ढह चुका है, लेकिन बचे हुए माओवादियों के सामने अब दो ही रास्ते हैं—आत्मसमर्पण या मुठभेड़। आने वाले समय में उनका फैसला ही उनकी दिशा तय करेगा।
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