Justice Yashwant Verma : इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। 14 मार्च 2025 को उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने की घटना के बाद यह मामला सामने आया था, जिसमें 500 रुपये के जले हुए नोटों के बंडल मिलने से विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद उनका ट्रांसफर दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था।
Justice Yashwant Verma : उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ तो ली, लेकिन जांच पूरी होने तक उन्हें कोई न्यायिक जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। 9 अप्रैल को उन्होंने इस्तीफा भेजा, जिसकी जानकारी 10 अप्रैल को सार्वजनिक हुई।
अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि वह गहरे दुख के साथ तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं और इस पद पर सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने जांच के बाद जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया था। यह समिति 22 मार्च को बनाई गई थी और उसने 4 मई को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।
Justice Yashwant Verma : जस्टिस वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव भी लाया गया था, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने दलील दी थी कि राज्यसभा में प्रस्ताव पास नहीं हुआ, फिर भी लोकसभा द्वारा जांच समिति बनाना उचित नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत लोकसभा स्पीकर को जांच समिति गठित करने का अधिकार है, भले ही राज्यसभा में प्रस्ताव पारित न हुआ हो।
Justice Yashwant Verma : कानून के अनुसार, 1968 के जजेज (जांच) अधिनियम के तहत किसी जज को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पारित होने के बाद स्पीकर या चेयरमैन तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन करते हैं, जो आरोपों की जांच करती है।
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