Narayanpur. नारायणपुर। छत्तीसगढ़ में माओवादी संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। नारायणपुर जिले में शासन की पुनर्वास नीति ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के तहत 11 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में वापसी की है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में 6 पुरुष और 5 महिला कैडर शामिल हैं, जिन पर कुल 37 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सभी माओवादियों ने नारायणपुर पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इस मौके पर पुलिस एवं
प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादी संगठन के 3 मिलिट्री कंपनी सदस्य, 1 एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) और 7 पीएम (पार्टी मेंबर) शामिल हैं, जो संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये सभी माओवादी लंबे समय से संगठन के भीतर सक्रिय थे और कई गंभीर नक्सली घटनाओं में उनकी संलिप्तता रही है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, बढ़ता दबाव, जंगलों में कठिन जीवन और शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया। ‘पूना मारगेम’ योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का अवसर दिया जा रहा है। एसपी रॉबिनसन गुड़िया ने कहा कि शासन की नीति स्पष्ट है कि जो भटके हुए लोग मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें पूरा संरक्षण और पुनर्वास दिया जाएगा। आत्मसमर्पित माओवादियों को प्रारंभिक सहायता के रूप में 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान किया गया है।
इसके साथ ही शासन की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें आगे आवास, रोजगार, शिक्षा एवं कौशल विकास से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में अब तक नारायणपुर जिले में कुल 298 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह आंकड़ा माओवादी संगठन के कमजोर होते नेटवर्क और शासन की प्रभावी रणनीति को दर्शाता है। लगातार हो रहे आत्मसमर्पण से यह स्पष्ट है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों, सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई और जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। पुलिस प्रशासन ने अन्य सक्रिय माओवादियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ें। प्रशासन का कहना है कि सरकार ऐसे सभी लोगों को नया जीवन शुरू करने का अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। नारायणपुर में हुए इस आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में और भी कैडरों के मुख्यधारा में लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
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