दंतेवाड़ा। बस्तर संभाग में पिछले तीन दिनों से मूसलाधार बारिश आई बाढ़ से दंतेवाड़ा जिले में 100 से ज्यादा गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट चुका है। 200 से ज्यादा मकान ढह गए। पनेड़ा के पास नेशनल हाईवे के पास पुल का अप्रोच बह जाने से करीब 20 घंटों तक यहां आवाजाही बंद रही। वायसेना भी रेस्क्यू में जुटी रही। 2196 लोग राहत शिविर में शिफ्ट किए गए। अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है।
पुल के दोनों तरफ ट्रक और बसों की लंबी लाइन लग गई। दंतेवाड़ा नगर समेत आस-पास के गांवों में कुल करीब 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। बता दें कि दंतेवाड़ा में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इससे शंखनी-डंकनी नदी का पानी नहीं बह पाया और आसपास के गांवों में भारी तबाही मच गई। करीब 53 साल पहले सन 1972 में डंकनी नदी का ऐसा रौद्ररूप देखने को मिला था।
सीएम विष्णु देव साय ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर में राहत और बचाव कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने अफसरों से कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहत और बचाव के काम तेजी से करें।
राहत शिविरों में ठहरे सभी लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए। राजस्व सचिव एवं आपदा राहत आयुक्त रीना बाबासाहेब कंगाले ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 4 जिलों में 43 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
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