इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्री परिषद की बैठक राजवाड़ा में वंदे मातरम के गान के साथ शुरू हुई। इसमें मध्य प्रदेश सरकार ने राहवीर योजना को शुरू करने का फैसला लिया है। योजना के तहत सड़क हादसे में घायलों को अस्पताल ले जाने वाले को राहवीर माना जाएगा। 25 हजार रूपये भी दिए जाएंगे। बैठक में फैसला हुआ कि इंदौर और भोपाल में महानगर विकास प्राधिकरण बनाया जाएगा।
कैबिनेट की बैठक में हुए फैसलों की जानकारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दी। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी 31 मई को भोपाल आएंगे। दो लाख महिलाओं के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। महिला कामगारों के लिए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से सभी औद्योगिक क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। पीएम इंदौर मेट्रो, दतिया और सतना एयरपोर्ट का लोकार्पण करेंगे।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि आज की बैठक में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर मेट्रोपॉलिटन विकास प्राधिकरण बनाने का फैसला किया गया। इसमें कुछ हिस्सा देवास और धार का भी मिलाया जाएगा। इसके नियमों को मंजूरी दी गई। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि नगर निगमों के काम प्रभावित न हों। सीएम इसके चेयरमैन होंगे।
यहां आने वाले दिनों में पीने के पानी की जरूरत कितनी होगी? खेती के लिए कितने पानी की जरूरत होगी? कितने वाहनों के आवागमन की व्यवस्था करनी होगी? ये सब काम इसमें किए जाएंगे। इसमें सभी विधायक भी अपने सुझाव दे सकेंगे।
सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टर को इस योजना पर अमल के निर्देश दिए हैं। योजना में प्रावधान है कि अगर कोई नागरिक सड़क हादसे में किसी घायल व्यक्ति को उसके गोल्डन-ऑवर (प्रारंभिक 1 घंटे) में चिकित्सा के लिए अस्पताल तक पहुंचाता है और उसकी जान बच जाती है तो उस स्थिति में उसे 25 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा।
अगर कोई नागरिक घायल व्यक्ति को सीधे अस्पताल ले जाता है, उस स्थिति में अस्पताल की ओर से पुलिस को सूचना दी जाएगी। संबंधित व्यक्ति को भी इस पत्र की रिसीविंग दी जाएगी। पुलिस द्वारा कलेक्टर को भी इस संबंध में एक पत्र लिखा जाएगा। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर परिवहन विभाग की ओर से संबंधित व्यक्ति के खाते में सीधे राशि ट्रांसफर की जाएगी।
डॉ. मोहन यादव कैबिनेट की बैठक आज इंदौर के राजवाड़ा के गणेश हॉल में हुई। हॉल में देवी अहिल्या की मूर्ति को सीएम से आगे रखा गया। मूर्ति के दांयीं तरफ सीएम बैठे थे। बैठक से पहले देवी अहिल्या का स्मरण कर पुष्पांजलि दी गई। सीएम और कुछ मंत्री धोती-कुर्ता पहने भगवा दुपट्टा डालकर बैठक में पहुंचे थे।
1945 में हुई थी आखिरी बैठक
देवी अहिल्या बाई के समय में राजवाड़ा शासन और न्याय का मुख्य केंद्र था। उन्हीं की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए होलकर परिवार के सदस्य इस दरबार हॉल में कई अहम फैसले लेते थे। 1945 में यशवंतराव तृतीय ने यहां आखिरी बार मंत्रिमंडल की बैठक की थी।
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