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    मंत्रालय में हुई लोकमाता की 300वीं जयंती की आयोजन समिति की बैठक : मुख्यमंत्री यादव ने लोकमाता की जन्मस्थली में कार्यक्रम के दिए निर्देश…

    News DeskBy News DeskMarch 29, 2025No Comments5 Mins Read
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    मंत्रालय में हुई लोकमाता की 300वीं जयंती की आयोजन समिति की बैठक : मुख्यमंत्री यादव ने लोकमाता की जन्मस्थली में कार्यक्रम के दिए निर्देश…
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    भोपाल:  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई के कार्यों से नई पीढ़ी को अवगत करवाने के लिए विविध आयोजनों के साथ ही सामान्य ज्ञान स्पर्धा भी आयोजित की जाए। लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर गत एक वर्ष में महेश्वर में केबिनेट के आयोजन, बटालियन का नामकरण देवी अहिल्या बाई के नाम पर करने, नाट्य मंचन और चित्र प्रदर्शनी जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां हुई हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी अहिल्या बाई की महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित जन्मस्थली में भी कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिये। स्कूली पाठ्यक्रम में लोकमाता के जीवन का विवरण शामिल किया गया है। विद्यालयों में बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण, इंदौर विश्वविद्यालय में देवी अहिल्या शोध पीठ की स्थापना और लोकमाता के अप्रकाशित पत्रों का प्रकाशन भी किया गया है।

    लोकमाता के जीवन से जुड़े स्थानों महेश्वर, चित्रकूट, ओरछा, इंदौर, जानापाव, उज्जैन, ममलेश्वर, ओंकारेश्वर, गौमुखघाट, अमरकंटक, बड़वानी, मंदसौर, शिवपुरी आदि स्थानों पर लोक गायन, लोक नृत्य और नृत्य नाटिकाएं गत सितम्बर से फरवरी 2025 तक की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार की शाम मंत्रालय में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300 वीं जयंती के आयोजन के लिए गठित समारोह समिति की बैठक में बताया गया कि आगामी 31 मई को लोकमाता पर केन्द्रित स्मारिका का लोकार्पण प्रस्तावित है। इसके साथ ही 29 से 31 मई तक लोकमाता की 300वीं जयंती के वृहद समापन समारोह के अंतर्गत राजधानी भोपाल सहित विभिन्न स्थानों पर तीन दिवसीय कार्यक्रम होंगे।

    कई राज्यों में हुए थे लोकमाता के जनकल्याण कार्य

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के साथ ही लोकमाता के जनकल्याण के कार्य क्षेत्र में महाराष्ट्र, हरियाणा, उड़ीसा, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और अनेक स्थान रहे हैं। महेश्वरी साड़ी को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर बिक्री केन्द्र प्रारंभ किए जाएं।

    प्रदेश में महेश्वर साड़ी के निर्माण में महिलाओं को हाथकरघा बुनाई, रंगाई और आकल्पन से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया है। लोकमाता के शासनकाल में महेश्वरी साड़ी की वैश्विक पहचान बनी थी। खरगोन जिले में स्थित ऐतिहासिक महेश्वर किले की दीवारों पर निर्मित कलात्मक आकल्पन को महेश्वरी साड़ियों में उकेरा जाता है।

    लोकमाता के कृतित्व पर फिल्म का निर्माण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर सुशासन, धर्म स्थलों पर सामुदायिक भवनों और धर्मशालाओं के निर्माण और महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कार्य करने वाली प्रशासिका थीं। उनकी 300वीं जयंती पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समिति गठित कर गतिविधियों का कैलेंडर बनाया गया है।

    इसके अनुसार देवी अहिल्याबाई के जीवन और अवदान से संबंधित अनेक गतिविधियां सम्पन्न हुई हैं। संस्कृति विभाग द्वारा लोकमाता के व्यक्तित्व और कृतित्व पर फिल्म का निर्माण भी किया गया है।

    मध्यप्रदेश सरकार ने लोकमाता के सम्मान में आयोजित कीं बहुआयामी गतिविधियां

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवस्थलों के प्रबंधन, अन्न क्षेत्रों के संचालन और नर्मदा परिक्रमावासियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाने जैसे कार्य लोकमाता के जन-जन के लिए समर्पित जीवन का प्रतीक हैं। वे वित्त प्रबंधन, स्वदेशी को महत्व, सैन्य रणनीति, नागरिक अनुशासन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में कार्य करती रहीं।

    उनके कुशल प्रशासन, समाज सुधार और धार्मिक सहिष्णुता के भाव को मध्यप्रदेश सरकार ने पूरा सम्मान देते हुए बहुआयामी गतिविधियां की हैं। लोकमाता की 300वीं जयंती के उपलक्ष में हुए कार्यक्रम उनके जीवन और भारतीय संस्कृति में दिए गए योगदान को उजागर करते हैं।

    प्रदेश की महिला उद्यमियों और शिल्पियों को प्रोत्साहन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समिति के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत सुझावों के अनुरूप लोकमाता के जीवन से जुड़ी विशेषताओं के प्रचार-प्रसार के लिए आगे भी कार्य करेगी। बैठक में प्रमुख सचिव संस्कृति श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि देवी अहिल्याबाई द्वारा निर्मित मंदिरों की सूची तैयार की गई है। लोकमाता द्वारा अनेक मंदिरों का जीर्णोद्धार भी कराया गया। ऐसे ज्ञात 118 स्थानों में से 90 स्थानों पर 234 चित्रांकन वॉटर कलर द्वारा तैयार करवाए गए। इस कार्य में देश के लब्ध प्रतिष्ठित चित्रकारों द्वारा योगदान दिया गया।

    चित्र प्रदर्शनी गत दिसम्बर में बैंगलोर में मध्यप्रदेश दिवस, जनवरी में भोपाल में गीता महोत्सव और लोकरंग के साथ ही जनवरी और फरवरी 2025 में प्रयागराज महाकुंभ में भी संयोजित की गई। आगामी महीनों में लोकमाता से जुड़े स्थानों पर हो रहे आयोजनों में भी यह चित्र प्रदर्शनी जन आकर्षण का केन्द्र रहेगी। विभिन्न आयोजनों में महिला उद्यमियों और शिल्पियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है। महिला स्टार्ट-अप पॉलिसी भी बनाई जा रही है।

    लोकमाता के जीवन ओर कार्यों पर नृत्य नाट्य और लाइट एंड साउंड शो

    समिति की बैठक में जानकारी दी गई कि विश्व मांगल्य सभा नागपुर से एक नृत्य नाट्य तैयार करवाया गया जो लोकमाता के जीवन की झलक प्रस्तुत करता है। इसकी प्रस्तुति प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर प्रारंभ की गई है। विश्व संवाद केन्द्र न्यास, इंदौर ने नर्मदा साहित्य मंथन अहिल्या पर्व के रूप में मनाया।

    पर्यटन निगम ने महेश्वर किले पर लोकमाता के जीवन पर लाइट और साउंड शो तैयार करवाया गया है। इसे देवी अहिल्याबाई की पुण्यगाथा के नाम से प्रस्तुत किया जाएगा। धर्मपाल शोधपीठ में मोढ़ी लिपि के प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की है। इस प्राचीन लिपि का कई शताब्दियों तक चलन रहा है। मराठी भाषा लिखने के लिए कभी इसी लिपि का इस्तेमाल होता है।

    लोकमाता के शासनकाल में भी अनेक पुस्तकों का इस लिपि में प्रकाशन हुआ था, जिनके हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद के लिए मराठी साहित्य अकादमी द्वारा विषय-विशेषज्ञों का सहयोग लिया जा रहा है। नर्मदा परिक्रमा पथ पर लोकमाता की मूर्तियों की स्थापना के लिए भी परीक्षण किया जा रहा है।

    News Desk

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