अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को रोकने के बाद, भारत के केंद्रीय बैंक (RBI) की नीतिगत फैसलों पर इसका क्या असर पड़ेगा, खासकर जब बजट के बाद 7 फरवरी को RBI अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा।
यदि हम इस सवाल को विस्तार से समझें, तो:
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व का निर्णय: अमेरिका में ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने का निर्णय विश्वभर के आर्थिक हालात पर असर डाल सकता है, क्योंकि फेड की नीतियों का प्रभाव भारतीय बाजारों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
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RBI का रुख: भारतीय रिजर्व बैंक का प्राथमिक लक्ष्य महंगाई को नियंत्रण में रखना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। अगर अमेरिकी फेड के फैसले के बाद वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो यह संभावना बनती है कि RBI अपनी मौद्रिक नीति में स्थिरता बनाए रखेगा और ब्याज दरों में कोई खास बदलाव नहीं करेगा।
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EMI पर असर: अगर RBI अपनी ब्याज दरें घटाता है, तो इसका सीधा असर आपके लोन और ईएमआई पर पड़ेगा। लेकिन, फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं दिखते कि RBI ब्याज दरों में कटौती करेगा, खासकर अगर अमेरिका की आर्थिक नीति में कोई बड़े बदलाव न हों।
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बजट का प्रभाव: 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट भी आरबीआई की मौद्रिक नीति पर असर डाल सकता है। अगर बजट में आर्थिक सुधार के कदम उठाए जाते हैं, तो RBI अधिक लचीला रुख अपना सकता है।
इसलिए, यह कहना मुश्किल है कि RBI निश्चित रूप से अपनी नीतियों में बदलाव करेगा, लेकिन दुनिया भर की मौद्रिक नीतियों का भारतीय ईएमआई पर असर जरूर होगा।
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