माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है. एक साल में कुल 4 नवरात्रि आती हैं. इसमें 2 गुप्त नवरात्रि, एक चैत्र नवरात्रि और एक शारदीय नवरात्रि है. गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्यायों की पूजा की जाती है, जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरुपों की पूजा करते हैं. सभी नवरात्रि का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ होता है. तांत्रिक और अघोरी गुप्त नवरात्रि में तंत्र-मंत्र की सिद्धि प्राप्ति के लिए साधना करते हैं. कुमार भास्करवर्मा संस्कृत एवं पुरातनाध्ययन विश्वविद्यालय, नलबारी, कि माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कब से है? माघ गुप्त नवरात्रि की कलश स्थापना मुहूर्त क्या है?
माघ गुप्त नवरात्रि 2025 का शुभारंभ
पंचांग के अनुसार, माघ गुप्त नवरात्रि के लिए जरूरी माघ शुक्ल प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 29 जनवरी को शाम 6 बजकर 5 मिनट से होगी. इस तिथि का समापन 30 जनवरी को शाम 4 बजकर 1 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 30 जनवरी दिन गुरुवार को होगा.
माघ गुप्त नवरात्रि 2025 कलश स्थापना मुहूर्त
30 जनवरी को माघ गुप्त नवरात्रि की कलश स्थापना के लिए आपको दो शुभ मुहूर्त प्राप्त होंगे. पहला शुभ मुहूर्त सुबह में 1 घंटा 21 मिनट तक है. दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर में 43 मिनट का है. कलश स्थापना मुहूर्त का शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 25 मिनट से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक है. दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर में 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक है.
माघ गुप्त नवरात्रि 2025 शुभ समय, योग और नक्षत्र
ब्रह्म मुहूर्त: 05:25 ए एम से 06:17 ए एम
अभिजीत मुहूर्त: 12:13 पी एम से 12:56 पी एम
व्यतीपात योग: 06:33 पी एम तक, उसके बाद वरीयान योग
श्रवण नक्षत्र: 07:15 ए एम तक, फिर धनिष्ठा – 05:50 ए एम, जनवरी 31 तक
माघ गुप्त नवरात्रि 2025 का समापन
इस बार की माघ गुप्त नवरात्रि पूरे 9 दिन की है. माघ गुप्त नवरात्रि का समापन 7 फरवरी को माघ शुक्ल नवमी को होगा. उस दिन व्रती पारण करके माघ गुप्त नवरात्रि की समाप्ति करेंगे.
माघ गुप्त नवरात्रि का महत्व
माघ माह को स्नान और दान के लिए विशेष माना जाता है. माघ में गुप्त नवरात्रि की भी महत्ता है. तंत्र मंत्र की साधना और सिद्धि के लिए यह बहुत ही उपयोगी होती है. इसमें साधकों को कड़े नियमों का पालन करना होता है. गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्या में देवी काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की पूजा करते हैं.
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