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    Home » Blog » बिजली खरीदी के बोझ से दब रही कंपनियां
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    बिजली खरीदी के बोझ से दब रही कंपनियां

    News DeskBy News DeskJanuary 11, 2025No Comments3 Mins Read
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    बिजली खरीदी के बोझ से दब रही कंपनियां
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    भोपाल। भले ही प्रदेश सरकार बिजली उत्पादन को लेकर बड़े -बड़े दावे करे , लेकिन वास्तविकता में स्थिति अलग है। यही वजह है कि साल दर साल प्रदेश के खजाने पर बिजली खरीदने का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। इस साल बिजली खरीदी में करीब 5500 करोड़ रुपए का इजाफा होना तय है। इसके साथ ही ब्याज पर ही करीब 1300 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा। इससे हर साल बिजली खरीदी और उससे संबंधित आर्थिक बोझ कम होने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है। दरअसल पूर्व की सरकार में बिजली का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर सरकारी प्लांटों की बजाए निजी प्लांटों की ओर शिफ्ट कर दिया गया था, जिसकी वजह से नए सरकारी प्लांट लगाने का काम बंद हो गया है। बावजूद इसके संकट के समय निजी सेक्टर की कंपनियां बिजली आपूर्ति से हाथ खड़े कर देती है। ऐसा दो बार संकटकालीन समय में हो चुका है, लेकिन फिर भी इन निजी कंपनियों पर न कोई जुर्माना लगाया गया और न इनके दीर्घकालीन समझौतों में कोई कमी या अनुबंध खात्मे की कोशिश की गई। कुल मिलाकर बिजली के मामले में एमओयू भी काम नहीं आ रहे हैं। प्रदेश में अप्रैल से शुरू होने वोले वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 40987 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी का प्लान है। इसके तहत हर महीने औसत 3100 करोड़ से ज्यादा की बिजली खरीदी जाएगी। इसके अलावा ब्याज पर कुल 1349 करोड़ रुपए सालाना दिए जाएंगे। वहीं इससे पूर्व मौजूदा वित्तीय वर्ष में 35404 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी जानी है।

    40 हजार करोड़ की खरीदी, घाटा 4000 करोड़
    बिजली की खरीदी पर 40 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च हो रहे हैं, जबकि बिजली कंपनियां आमदनी और खर्च में करीब 4000 करोड का अंतर ही बता रही है। वह भी तब, जबकि बिना बिजली खरीदी के ही करीब 1200 करोड़ और ब्याज पर 1300 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यदि दीर्घकालीन समझौतों में कटौती की जाए तो इस राशि को बचाया जा सकता है। इससे आमदनी और खर्च के बीच का अंतर कम होगा। इससे बिजली की दर वृद्धि में कमी की जा सकती है, लेकिन इसे लेकर कोई कदम नहीं उठता। सूबे में सरकारी प्लांटों को घटाकर निजी प्लांटों को बढ़ाया जा रहा है।

    दो बार कंपनियां खड़ी कर चुकी हैं हाथ
    दरअसल, बिजली कंपनियां निजी बिजली कंपनियों से संकट या जरूरत के समय बिजली खरीदी के लिए पहले से एमओयू करती है। लेकिन दो बार ऐसा हो चुका है, जब कोयला संकट छाने के कारण बिजली की जरूरत पड़ी तो निजी बिजली कंपनियों ने भी हाथ खड़े कर दिए कि उनके पास भी कोयला नहीं है। ऐसा वर्ष 2017-18 और 2022 में हो चुका है।

    News Desk

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