भोपाल । मप्र सौर ऊर्जा पर अपनी निर्भरता में वृद्धि करने जा रहा है। सरकार का प्लान है कि 2030 तक अपनी आधी बिजली की आपूर्ति सोलर एनर्जी से की जाए। इसके लिए प्रदेश में बंजर, अनुपयोगी कृषि भूमि पर सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। इनके जरिए किसानों को बिजली उत्पादक बनाया जाएगा। यह सोलर प्लांट किसान और निवेशक मिलकर भी लगा सकते हैं। इन सोलर प्लांट से उत्पादित होने वाली बिजली को सरकार खरीदेगी। इसके लिए सरकार सोलर प्लांट लगाने वालों से 25 साल का अनुबंध करेगी। इसकी प्रक्रिया ऊर्जा विकास निगम ने शुरू कर दी। सोलर प्लांट लगाने वालों से पंजीयन कराए जा रहे हैं। हर महीने की 15 तारीख तक सोलर प्लांट के लिए रजिस्ट्रेशन होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद एनओसी संबंधित क्षेत्र के सब स्टेशन से लेना होगी।
दरअसल, आठ हजार मेगावाट वाली सौर ऊर्जा की परियोजना मुरैना में स्थापित करने को लेकर मप्र और उत्तर प्रदेश के बीच सहमति बन गई है। वहीं भिंड, शिवपुरी, आगर, धार, अशोकनगर और सागर में साढ़े सात हजार मेगावाट ऊर्जा क्षमता की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। अधिकारियों के अनुसार एमपी में वर्ष 2030 तक बिजली की जरूरत लगभग 40 हजार मेगावाट होगी। इसमें से आधी यानी 20 हजार मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा के द्वारा बनाई जाएगी। गौरतलब है कि प्रदेश में वर्तमान समय में 26 हजार मेगावाट बिजली की जरूरत होती है, अभी सौर ऊर्जा से सात हजार मेगावाट बिजली की पूर्ति की जा रही है। जबकि सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 में जब 40 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता हो सकती है। तब आधी बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा से हो सकती है।
जिलों में लगाए जाएंगे 2033 सोलर प्लांट
प्रदेश के सभी जिलों में 2033 सोलर प्लांट इस स्कीम के तहत लगाए जाएंगे। इसके बाद सोलर प्लांट लगाए जाने की भारत सरकार की कुसुम योजना के तहत यह सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा 1079 सोलर प्लांट सेंट्रल जोन में लगेंगे। वेस्ट जोन में 372 और ईस्ट जोन में 582 प्लांट लगाए जाएंगे। ये सोलर प्लांट 500 किलोवॉट से 2 मेगावॉट तक होंगे। प्रधानमंत्री कुसुम अ योजना के अंतर्गत यह सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। परियोजना से उत्पादित विद्युत, शासन द्वारा क्रय की जाएगी, जिससे कृषको को नियमित आय होगी। प्रदेश की वितरण कंपनियों द्वारा चिन्हित सब स्टेशनों से 5 किमी की परिधि में सोलर प्लांट लगेंगे। बिजली कंपनियों ने प्रदेश के सभी सब स्टेशन की लिस्ट ऊर्जा विकास निगम को सौंप दी है। इसके मुताबिक निवेशक और किसान सोलर प्लांट के लिए आवेदन कर सकते हैं। योजना में यह भी प्रावधान है कि यदि कृषक सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था कर पाने में असमर्थ हैं, तो आपसी समन्वय व सहमति से अपनी भूमि द्विपक्षीय अनुबंध (किसान और विकासक, निवेशक के मध्य) द्वारा लीज रेट पर देकर, जो रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष के अनुसार तय होगी अथवा रुपए प्रति यूनिट उत्पादित विद्युत प्रति एकड़ के अनुसार तय कर, निवेशक के माध्यम से संयंत्र की स्थापना कर सकेंगे, जिसकी संस्थापना, संचालन एवं रख-रखाव की पूर्ण जिम्मेदारी विकासक, निवेशक की होगी। इससे किसानों की भी निर्धारित आय तय हो जाएगी।
3.25 यूनिट की दर से खरीदी जाएगी बिजली
कृषि भूमि पर लगने वाले सोलर प्लांट से उत्पादित होने व वाली बिजली को 3.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदा जाएगा। इसका अनुबंधन उत्पादक के साथ सरकार और बिजली कंपनी 25 साल के लिए करेगी। ऊर्जा विकास निगम द्वारा निर्धारित सभी सोलर प्लांट अगर प्रदेश में लग जाते हैं, तो आधे से ज्यादा प्रदेश सोलर ऊर्जा से रोशन हो सकता है। परियोजना के संचालन और रख-रखाव का अनुबंध भी मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी करेगी।
जिलों में सोलर प्लांट की स्थिति
प्रदेश के कुछ जिलों में सोलर प्लांट की स्थिति इस प्रकार है। भोपाल में 139 प्लांट, बैतूल में 60, होशंगाबाद में 66, हरदा में 33, सीहोर में 64, विदिशा में 61, राजगढ़ में 29, रायसेन में 37, ग्वालियर में 117, अशोकनगर में 21, शिवपुरी में 94, श्योपुर में 77, मुरैना में 70, गुना में 79 और दतिया में 28 प्लांट लगाए गए हैं।
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