भोपाल । लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे अतिथि विद्वानों को मध्य प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित उच्च शिक्षा विभाग के राजपत्रित(असिस्टेंट प्रोफेसर, ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी सहित अन्य) कर्मचारियों की भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण दिया है। उन्हें आयु सीमा में अधिकतम 10 वर्ष की छूट भी दी गई है, पर प्रदेश के अतिथि विद्वान सरकार के इस निर्णय से खुश नहीं हैं। अतिथि विद्वान संघ के अध्यक्ष डॉ. देवराज सिंह का कहना है कि 20-20 साल से सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वान अब ओवर ऐज हो रहे हैं। ऐसे में उनका, योग्यता एवं अनुभव के आधार पर पुनर्वास किया जाना चाहिए।
प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में 4500 अतिथि विद्वान कार्यरत हैं। इनमें से 3650 अतिथि विद्वान यूजीसी के मापदंड पूरे करते हैं। जबकि 850 एमफिल और पीजी है। डॉ. सिंह कहते हैं कि जो अतिथि विद्वान पहले से यूजीसी के मापदंड पूरे कर रहे हैं, उन्हें फिर से परीक्षा में बैठाना कहां तक ठीक है। इस निर्णय के कारण तो 1125 अतिथि विद्वान ही परीक्षा में बैठने के लिए पात्र होंगे। ऐसे में सभी को लाभ कैसे मिलेगा, जबकि पिछले 20 साल से भी अधिक समय से वह इसी उम्मीद में पढ़ा रहे हैं कि कभी न कभी नियमित हो जाएंगे। वे कहते हैं कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 28 साल बाद साल 2017 में परीक्षा कराई थी। ऐसा ही आगे हुआ तो हम कभी नियमित नहीं हो पाएंगे। वर्तमान में कार्यरत अतिथि विद्वानों की उम्र 45 से 50 साल हो गई है। इसके बाद उन्हें दूसरा कोई मौका भी नहीं मिलेगा। इस निर्णय से अतिथि विद्वानों का काफी नुकसान होगा। हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे और संशोधन का निवेदन करेंगे।
हटाए जाने का डर बरकरार
1 सितंबर 2023 को मुख्यमंत्री निवास में अतिथि विद्वानों की महापंचायत बुलाई गई थी, जिसमें 50 हजार रुपए मासिक वेतन देने, सरकारी कर्मचारियों के समान अवकाश, नजदीक के कॉलेज में तबादला, सीधी भर्ती में 25 प्रतिशत पद अतिथियों के लिए आरक्षित करने, प्रतिवर्ष 4 एवं अधिकतम 20 अंक देने, फालेन आउट अतिथि विद्वानों को फिर से रिक्त पदों पर मौका देने की घोषणा तो पूरी हो गईं, पर अतिथि विद्वान को सेवा से बाहर नहीं करने की घोषणा अब तक पूरी नहीं हुई है।
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