छतरपुर जिले के खजुराहो में एक ऐसा हनुमान जी का मंदिर है. जिसका इतिहास चंदेल शासकों से जुड़ा है. दरअसल, पुरातत्व विभाग के मुताबिक हनुमान जी की ये मूर्ति लगभग 1 हजार साल पुरानी है. हनुमान जी यहां वानर रूप में विराजमान हैं. छतरपुर जिले के खजुराहो में एक ऐसा हनुमान जी का मंदिर है. जिसका इतिहास चंदेल शासकों से जुड़ा है. दरअसल, पुरातत्व विभाग के मुताबिक हनुमान जी की ये मूर्ति लगभग 1 हजार साल पुरानी है. हनुमान जी यहां वानर रूप में विराजमान हैं.
पुजारी बताते हैं कि यह मंदिर चंदेल शासकों ने बनवाया था. पहले यहां जंगल था, एक गली निकली थी. इसलिए यहां के हनुमान जी गैल बब्बा जी के नाम से प्रसिद्ध हैं. हालांकि, हनुमान जी की यह मूर्ति भंवर बब्बा के नाम से भी प्रसिद्ध है. अब ये मंदिर पुरातत्व विभाग में शामिल कर लिया गया है. बता दें, इस मंदिर में तीन पुजारियों की ड्यूटी लगती है. शासन से ही पुजारी नियुक्त हैं. क्योंकि यह मंदिर पुरातत्व विभाग की धरोहर है.
पुजारी बताते हैं कि हनुमान जी का दुर्लभ मंदिर है. हनुमान जी की ऐसी दुर्लभ मूर्ति न जिले में हैं और न ही यहां के आसपास के जिलों में कहीं है. हनुमान जी की इतनी विशाल मूर्ति दुर्लभ ही देखने को मिलती है. यहां हनुमान जी वानर रूप में विराजमान हैं. जिले के ज्यादातर मंदिरों में हनुमान जी वानर रूप में विराजमान नहीं हैं.
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