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    कोमालिका बारी से अंजलि मुंडा तक, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने भविष्य की प्रतिभाओं की मजबूत पाइपलाइन दिखाई

    Knock IndiaBy Knock IndiaApril 7, 2026No Comments6 Mins Read
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    कोमालिका बारी से अंजलि मुंडा तक, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने भविष्य की प्रतिभाओं की मजबूत पाइपलाइन दिखाई
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    छत्तीसगढ़ में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 ने देशभर के जनजातीय समुदायों के खिलाड़ियों को एक साझा मंच पर एकत्रित किया, जहाँ अलग-अलग स्तर के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कुछ के लिए यह बहु-खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का पहला अनुभव था, तो कुछ के लिए यह उनके उभरते हुए करियर का अगला महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

    इस उद्घाटन संस्करण में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ियों ने नौ खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा की। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर थे, जबकि पारंपरिक खेलों जैसे मल्लखंभ और कबड्डी को प्रदर्शन खेलों के रूप में शामिल किया गया।

    भारत जहां 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलंपिक की संभावित मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है, ऐसे में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने विविध जनजातीय पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने और विभिन्न खेलों में भारत की बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। ये खेल छत्तीसगढ़ के तीन शहरों—रायपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर—में आयोजित किए गए।

    यहाँ कुछ ऐसे खिलाड़ियों की झलक प्रस्तुत है जो पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव छोड़ रहे हैं, और कुछ ऐसे भी जिन्होंने भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन की संभावना दिखाई है।

    मणिकांता एल (तैराक)

    खेलों के सबसे सफल खिलाड़ी के रूप में उभरे मणिकांता एल ने तैराकी प्रतियोगिता में आठ स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर कर्नाटक को समग्र चैंपियन बनने की मजबूत नींव दी। 21 वर्षीय मणिकांता पहले भी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीत चुके हैं और आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसी तैयारी के तहत उन्होंने कई स्पर्धाओं में भाग लिया।

    200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक विशेषज्ञ मणिकांता ने अधिकांश रेस में अपना दबदबा कायम रखा। उनका मानना है कि यहां का प्रदर्शन उन्हें एशियाई खेलों के क्वालिफिकेशन के लिए और अधिक फोकस के साथ तैयारी करने का आत्मविश्वास देगा।

    अंजलि मुंडा (तैराक)

    ओडिशा के जाजपुर जिले की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा तैराकी प्रतियोगिता की सबसे चमकदार उभरती सितारों में से एक रहीं। उन्होंने 200 मीटर फ्रीस्टाइल, 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले, 100 मीटर बैकस्ट्रोक, 50 मीटर बैकस्ट्रोक और 4×100 मेडले में कुल पांच स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि अपने से कहीं अधिक उम्र के खिलाड़ियों को पछाड़ने की क्षमता भी दिखाई।

    कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की छात्रा अंजलि अपने पहले खेलो इंडिया गेम्स में हिस्सा ले रही थीं, लेकिन प्रतियोगिता के बड़े मंच के बावजूद वह बिल्कुल भी दबाव में नहीं दिखीं। उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने की पूरी क्षमता नजर आती है।

    कोमालिका बारी (तीरंदाज)

    दीपिका कुमारी के बाद विश्व कैडेट और विश्व यूथ चैंपियन बनने वाली दूसरी भारतीय कोमालिका बारी 2026 एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की प्रबल दावेदारों में से एक हैं। वह पुणे में चयन ट्रायल की तैयारी कर रही थीं और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में प्रतिस्पर्धा के स्तर को देखते हुए उन्हें लगा कि यहां भाग लेना उनके लिए मूल्यवान मैच प्रैक्टिस साबित होगा।

    और उनका यह निर्णय सही साबित हुआ। हालांकि वह व्यक्तिगत और मिक्स्ड टीम रिकर्व में स्वर्ण पदक जीतकर लौटीं, लेकिन झारखंड की इस तीरंदाज को हर मुकाबले में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। महिला टीम स्पर्धा में उन्हें फाइनल में नागालैंड से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

    किरण पिस्दा (फुटबॉल)

    छत्तीसगढ़ महिला फुटबॉल टीम की कप्तान किरण पिस्दा ने सामने से नेतृत्व किया और सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआउट के दौरान गोलकीपर के रूप में दस्ताने पहनकर अपनी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। किरण न सिर्फ अपनी टीम की सबसे ज्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी रहीं, बल्कि उन्होंने युवा टीम का शानदार नेतृत्व करते हुए यह भी दिखाया कि बेहतरीन नेतृत्व कैसे किसी टीम को बदल सकता है।

    किरण पहले ही सैफ प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और क्रोएशियाई लीग में भी खेल चुकी हैं। 24 वर्षीय यह खिलाड़ी अब भारतीय राष्ट्रीय टीम में नियमित स्थान बनाने की उम्मीद कर रही हैं, क्योंकि वह किसी भी पोजीशन पर खेलने में सक्षम हैं।

    बाबूलाल हेम्ब्रम (वेटलिफ्टर)

    झारखंड के 19 वर्षीय बाबूलाल हेम्ब्रम 2024 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले अपने राज्य के पहले वेटलिफ्टर बने थे। वह अपने राज्य के पहले ऐसे अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर भी हैं जिन्होंने IWF वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप और एशियन यूथ चैंपियनशिप में पदक जीता है।

    रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव के रहने वाले बाबूलाल अब जूनियर से सीनियर सर्किट में कदम रख रहे हैं और साई पटियाला के नेशनल कैंप में प्रशिक्षण ले रहे हैं। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में जीता गया रजत पदक उन्हें अब सीनियर खिलाड़ियों को चुनौती देने का आत्मविश्वास देता है।

    शिव कुमार सोरेन (स्प्रिंटर)

    झारखंड के धावक शिव कुमार सोरेन ने 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्पर्धाओं में आसानी से स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने 100 मीटर में 10.58 सेकंड और 200 मीटर में 21.51 सेकंड का समय दर्ज किया। बोकारो के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रशिक्षु शिव का मजबूत शारीरिक गठन है और उनमें भविष्य में और तेज दौड़ने की क्षमता दिखाई देती है।

    झिल्ली दलाबेहरा (ओडिशा)

    ओडिशा की सबसे सफल वेटलिफ्टरों में से एक झिल्ली दलाबेहरा ने 2020 एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 45 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक और 2021 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। भारतीय रेलवे की कर्मचारी झिल्ली ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 53 किलोग्राम वर्ग में भाग लिया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    भार्गवी भगोरा (तीरंदाज)

    गुजरात की 21 वर्षीय भार्गवी भगोरा ने रायपुर में रिकर्व व्यक्तिगत फाइनल में कोमालिका बारी से हार का सामना किया, लेकिन जिस तरह उन्होंने अधिक अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को अंत तक कड़ी टक्कर दी, उससे उन्हें जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम के चयन ट्रायल से पहले काफी आत्मविश्वास मिलेगा।

    अरावली जिले से आने वाली भार्गवी खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के विभिन्न संस्करणों में तीन पदक जीत चुकी हैं और वर्तमान में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा समर्थित नडियाद हाई परफॉर्मेंस सेंटर में प्रशिक्षण ले रही हैं।

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