गौरी शंकर गुप्ता/धरमजयगढ़ (रायगढ़)। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में एक लाचार पीड़िता की पैरवी करने पहुंची बिलासपुर की महिला सामाजिक कार्यकर्ता सरोज केरकेट्टा स्वयं एक बड़े विवाद में उलझ गई हैं। जिस महिला को न्याय दिलाने और ठगी के ₹2 लाख वापस कराने के लिए उन्होंने कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ी, उसी मामले में अब उन पर कथित रूप से प्रताड़ित करने और जबरन वसूली का आरोप लगाया जा रहा है। इस स्थिति से आक्रोशित होकर सरोज केरकेट्टा ने धरमजयगढ़ एसडीओपी (SDOP) कार्यालय के सामने साक्ष्यों के साथ रायपुर के पत्रकार रवि गुप्ता, स्थानीय पुलिस और संबंधित पीड़िता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम पोते की एक महिला ने रोते-बिलखते हुए बिलासपुर पहुंचकर सरोज केरकेट्टा से मदद की गुहार लगाई थी। पीड़िता का दावा था कि उसके एक निजी विवाद को निपटाने का झांसा देकर रायपुर के पत्रकार रवि गुप्ता ने उससे ₹2 लाख की ठगी की है। सरोज केरकेट्टा के हस्तक्षेप और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर पर की गई शिकायत के बाद जब जांच धरमजयगढ़ एसडीओपी तक पहुंची, तो कथित आरोपी पर दबाव बना और उसने पीड़िता को ₹1.5 लाख वापस कर दिए।
सरोज केरकेट्टा का गंभीर आरोप है कि जैसे ही पीड़िता को उसके डूबे हुए रुपये वापस मिले, उसके सुर अचानक बदल गए। पीड़िता ने उल्टे मदद करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता के खिलाफ ही थाने में शिकायत दर्ज करा दी। बिलासपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर धरमजयगढ़ के 4 फेरे लगाने और टीम के पेट्रोल व भोजन के एवज में पीड़िता ने स्वेच्छा से ₹17,000 दिए थे, जिसे अब सुनियोजित साजिश के तहत ‘अवैध वसूली’ का रूप दिया जा रहा है।
सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए मिल रही धमकियों का जिक्र करते हुए सरोज केरकेट्टा ने बताया कि पत्रकार रवि गुप्ता द्वारा उन्हें अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए नोटिस और सेकंड एफआईआर कराने की धमकियां दी जा रही हैं। लगातार हो रहे मानसिक उत्पीड़न के कारण उनकी स्थिति इतनी संवेदनशील हो गई कि उन्हें आत्महत्या तक के विचार आने लगे थे।
हाथों में कॉल रिकॉर्ड्स, चैट और वित्तीय लेनदेन के ठोस दस्तावेज दिखाते हुए सरोज ने बिलासपुर आईजी, रायगढ़ एसपी और धरमजयगढ़ एसडीओपी से इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पुलिस का रवैया भी निराशाजनक रहा है और उन्हें एक अपराधी की तरह देखा गया। अगर इस मामले में निष्पक्ष न्याय नहीं मिला, तो समाज में कोई भी व्यक्ति किसी लाचार की मदद करने का साहस नहीं जुटा पाएगा।
