गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा प्रदेशभर में आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत रायगढ़ पुलिस एक्शन मोड में है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में अभियान के दूसरे सप्ताह (23 से 29 अगस्त) के दौरान वित्तीय धोखाधड़ी एवं यूपीआई सुरक्षा को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में रायगढ़ पुलिस की टीमों ने जिले के विभिन्न बैंक परिसरों में पहुंचकर खाताधारकों, आम नागरिकों और बैंक कर्मियों को साइबर अपराधों से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय बताए।
थाना सिटी कोतवाली प्रभारी अमित तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कोटक महिंद्रा बैंक, यूको बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक तथा पंजाब नेशनल बैंक मिलूपारा में संपर्क अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करते समय बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों पर विस्तार से चर्चा की।
UPI से लेन-देन करते समय रखें इन बातों का ध्यान
पुलिस टीम ने बैंक ग्राहकों को समझाया कि डिजिटल पेमेंट आज की जरूरत है, लेकिन ठग इसी सुविधा का गलत फायदा उठा रहे हैं।
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यूपीआई पिन नियम: UPI PIN केवल पैसा भेजने (डेबिट करने) के लिए दर्ज किया जाता है, पैसा प्राप्त करने (क्रेडिट होने) के लिए नहीं।
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अनजान QR कोड व रिफंड लिंक: यदि कोई रिफंड या पैसा भेजने का झांसा देकर QR कोड स्कैन करने, PIN डालने या किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक करने को कहे तो सतर्क हो जाएं।
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कलेक्ट रिक्वेस्ट: बिना जांचे-परखे किसी भी ‘Collect Request’ को स्वीकार न करें।

OTP, PIN और गोपनीय जानकारी कभी न करें शेयर
जागरूकता कार्यक्रम में पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई भी बैंक, पुलिस, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या अधिकृत संस्था फोन करके गोपनीय जानकारी नहीं मांगती।
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गोपनीय डेटा: OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड डिटेल्स किसी से साझा न करें।
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डर का कारोबार: साइबर अपराधी अक्सर बैंक खाता बंद होने, सिम ब्लॉक होने, बिजली बिल पेंडिंग होने या केवाईसी अपडेट न होने का डर दिखाकर लोगों से ओटीपी हासिल करते हैं।

“डिजिटल अरेस्ट” और फर्जी कॉल के झांसे में न आएं
पुलिस टीम ने नागरिकों को हाल में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के खतरों से आगाह किया।
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फर्जी एजेंसियां: ठग वीडियो कॉल या फोन पर पुलिस, सीबीआई (CBI), ईडी (ED) या ट्राई (TRAI) का अधिकारी बनकर अपराध में शामिल होने का डर दिखाते हैं और रुपयों की मांग करते हैं।
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सच्चाई: पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी फोन अथवा वीडियो कॉल पर किसी को “डिजिटल अरेस्ट” करके पैसे जमा करने का नियम नहीं रखती। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं, तुरंत फोन काटें और स्थानीय पुलिस को सूचित करें।

KYC अपडेट और फर्जी कस्टमर केयर से सतर्कता
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अज्ञात ऐप्स व लिंक्स: केवाईसी (KYC) अपडेट कराने के नाम पर आए किसी भी मैसेज लिंक पर क्लिक न करें और न ही रिमोट एक्सेस (जैसे AnyDesk, TeamViewer) ऐप डाउनलोड करें।
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आधिकारिक स्रोत: गूगल या इंटरनेट सर्च से निकाले गए कस्टमर केयर नंबर फर्जी हो सकते हैं। हमेशा बैंक या सेवा प्रदाता की आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही हेल्पलाइन नंबर प्राप्त करें।

साइबर ठगी हो जाए तो क्या करें?
रायगढ़ पुलिस ने बताया कि यदि दुर्भाग्यवश कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए निम्नलिखित कदम उठाएं:
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हेल्पलाइन 1930: तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं।
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बैंक को सूचना: संबंधित बैंक को तत्काल सूचित कर खाता या कार्ड ब्लॉक करवाएं ताकि लेन-देन को होल्ड किया जा सके।
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डिजिटल साक्ष्य: ट्रांजेक्शन आईडी, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट और संबंधित मोबाइल नंबर का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
रायगढ़ पुलिस ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने का मूलमंत्र यही है— “रुकें, सोचें और फिर क्लिक करें”।