गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा/रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले अंतर्गत आने वाले जनपद पंचायत घरघोड़ा में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की खुलेआम अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत पुसल्दा और ग्राम पंचायत टेरम के जनसूचना अधिकारी (पंचायत सचिव) ने तय 30 दिनों की वैधानिक समय-सीमा में सूचना देने से परहेज किया। इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण आवेदक को प्रथम अपील का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अब प्रथम अपीलीय अधिकारी सह मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जनपद पंचायत घरघोड़ा के कड़े रुख के बाद संबंधित पंचायत सचिवों को दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का नोटिस जारी किया गया है।
15वें वित्त आयोग के करोड़ों के खर्च की मांगी गई थी जानकारी
आरटीआई आवेदक द्वारा ग्राम पंचायत पुसल्दा और टेरम में 1 अप्रैल 2023 से 31 मई 2026 तक की अवधि के बीच 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए सभी विकास कार्यों और खर्च का पूरा लेखा-जोखा मांगा गया था। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
15वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त कुल राशि और उसके मदवार खर्च का ब्यौरा।
कराए गए निर्माण कार्यों की प्रमाणित मेज़रमेंट बुक (MB – Measurement Book) की प्रतियां।
सीमेंट, सरिया, बोल्डर, पाइप, स्ट्रीट लाइट, मशीनरी और फर्नीचर खरीदी से संबंधित GST बिलों की प्रमाणित प्रतियां।
ग्राम पंचायतों की आधिकारिक ऑडिट रिपोर्ट (Audit Report)।
इतनी महत्वपूर्ण और सार्वजनिक हित से जुड़ी जानकारियां मांगने के बावजूद दोनों पंचायतों के सचिवों ने तय समय-सीमा के भीतर कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया, जिससे वित्तीय अनियमितता और सूचना छिपाने की शंका गहरा गई है।
प्रथम अपीलीय अधिकारी सख्त, सचिव को लिखित स्पष्टीकरण के निर्देश
मामले में सूचना न मिलने पर आवेदक द्वारा दायर की गई चार अलग-अलग प्रथम अपीलों को स्वीकार करते हुए प्रथम अपीलीय अधिकारी सह जनपद सीईओ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने दोनों पंचायतों से जुड़े संबंधित सचिव को 29 जुलाई 2026 को जनपद कार्यालय में समस्त मूल अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के कड़े निर्देश दिए हैं।
आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि तय सीमा में आवेदक को सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, तो इसके पीछे के कारणों का लिखित स्पष्टीकरण भी सचिवों को प्रस्तुत करना होगा।
क्या सूचना सार्वजनिक होने से खुलेंगी वित्तीय गड़बड़ियां?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यदि आरटीआई के तहत मांगे गए समस्त निर्माण कार्य, जीएसटी बिल और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक होते हैं, तो पंचायतों में सामग्री खरीदी की गुणवत्ता, दरों में हेरफेर, भुगतान प्रक्रिया और विकास कार्यों की जमीनी हकीकत उजागर हो सकती है।
जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि पंचायतों में सभी कार्य पारदर्शी और नियमानुसार हुए हैं, तो जनसूचना अधिकारी आखिर जानकारी सार्वजनिक करने से पीछे क्यों हट रहे थे?
सुनवाई पर टिकी क्षेत्र की निगाहें
जनपद पंचायत घरघोड़ा में हो रही इस प्रथम अपीलीय सुनवाई पर समूचे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं। यदि पंचायत सचिव बैठक में संतोषजनक जवाब या रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो मामले की शिकायत राज्य सूचना आयोग तक पहुंचना तय है। अब देखना यह होगा कि प्रथम अपीलीय अधिकारी के कड़े तेवरों के बाद पंचायत सचिव जवाबों का पिटारा खोलते हैं या फिर पारदर्शिता से बचने की यह कोशिश आगे भी जारी रहती है।
