गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। रायगढ़ पुलिस द्वारा आर्थिक अपराध करने वालों और संगीन वारदातों में शामिल अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत चक्रधरनगर थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्री शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एमएसपी प्लांट जामगांव से करीब 14.22 लाख रुपये मूल्य के एमएस चैनल और एमएस बीम की सुनियोजित हेराफेरी का सफल पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में मुख्य साजिशकर्ता समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 24 जुलाई 2026 को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की पूरी कहानी
चक्रधरनगर पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 25 नवंबर 2025 को ट्रांसपोर्ट व्यवसायी ईश्वरी सिंह ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह अक्सर ट्रांसपोर्टिंग के लिए वाहन मालिक राजेंद्र राम यादव की गाड़ियों का उपयोग करते हैं।
19 नवंबर 2025 को खुद को राजेंद्र राम यादव का ड्राइवर बताने वाले ‘विनोद साहू’ नामक व्यक्ति ने एमएसपी प्लांट जामगांव से ‘सिद्ध विनायक स्टील टाटा आदित्यपुर जमशेदपुर’ के लिए ₹14,22,783 मूल्य का एमएस चैनल एवं बीम गाड़ी (क्रमांक CG-15-AC-2383) में लोड कराया। हालांकि, माल गंतव्य तक नहीं पहुँचा और चालक वाहन सहित गायब हो गया। जब असली वाहन मालिक राजेंद्र राम यादव से पूछताछ की गई तो उन्होंने विनोद साहू नाम के किसी भी ड्राइवर को जानने से साफ इनकार कर दिया। शिकायत के आधार पर चक्रधरनगर पुलिस ने अपराध क्रमांक 528/2025 धारा 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ में ऐसे खुली साजिश की परतें
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश पर चक्रधरनगर पुलिस ने प्लांट के लोडिंग रिकॉर्ड, दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया।
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भगतपुरी गोस्वामी की गिरफ्तारी: जांच में संदेह के आधार पर पत्थलगांव निवासी भगतपुरी गोस्वामी को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई। पूछताछ में उसने पूरी अंतरराज्यीय साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
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फर्जी पहचान का जाल: आरोपी भगतपुरी ने बताया कि उसने फर्जी नाम से काम करने वाले ड्राइवर पुष पुरी गोस्वामी (जिसने फर्जी नाम विनोद साहू रखा था), वाहन मालिक विकास मल्लिक, तसौवर अंसारी, अभय रवानी और प्रेम रवानी के साथ मिलकर यह योजना बनाई थी।
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7 लाख में बेचा था माल: भगतपुरी ने घटना में इस्तेमाल ट्रक और 30 टन लोहे का सौदा धनबाद निवासी आरोपी अभय रवानी से करीब ₹7 लाख में कर दिया था। इसके बाद अभय रवानी ने यह माल और ट्रक अपने परिचित राजीव मल्लिक (निवासी धनबाद) को बेच दिया।
साक्ष्य मिटाने और योजनाबद्ध तरीके से सामूहिक अपराध करने की पुष्टि होने पर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 338 एवं धारा 3(5) भी जोड़ दी है।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
पुलिस ने मामले में शामिल निम्नलिखित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया:
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भगतपुरी गोस्वामी (पिता धरमपुरी, उम्र 48 वर्ष) — निवासी पत्थलगांव, जिला जशपुर (छ.ग.) (मुख्य साजिशकर्ता)
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तसौवर अंसारी उर्फ शाहरुख (पिता मुख्तार अंसारी, उम्र 30 वर्ष) — निवासी अर्स, थाना सेन्हा, जिला लोहरदगा (झारखंड)
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अभय कुमार रवानी (पिता नंदलाल रवानी, उम्र 24 वर्ष) — निवासी हरीना बस्ती, थाना बरोरा, जिला धनबाद (झारखंड)
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प्रेम कुमार रवानी (पिता विनोद कुमार रवानी, उम्र 24 वर्ष) — निवासी हरीना बस्ती, थाना बरोरा, जिला धनबाद (झारखंड)
(नोट: मामले में फरार फर्जी ड्राइवर पुष पुरी गोस्वामी और माल खरीदने वाले राजीव मल्लिक की तलाश पुलिस सरगर्मी से कर रही है।)
चक्रधरनगर पुलिस की सराहनीय भूमिका
इस जटिल और अंतरराज्यीय आर्थिक अपराध के त्वरित खुलासे में चक्रधरनगर थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश मिश्रा, एएसआई आशिक रात्रे, प्रधान आरक्षक बालचंद राव, प्रधान आरक्षक रवि किशोर साय, आरक्षक अभिषेक द्विवेदी एवं आरक्षक विक्रम सिंह की विशेष और सराहनीय भूमिका रही। पुलिस की सूक्ष्म विवेचना और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण से ही इस लंबे समय से लंबित मामले की गुत्थी सुलझ सकी।
