गौरी शंकर गुप्ता/अंबिकापुर। सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में अपराधियों और उनके पनाहगारों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। क्षेत्रीय विधायक एवं छत्तीसगढ़ सरकार में कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा हाल ही में दिए गए एक सार्वजनिक बयान के महज 24 घंटे के भीतर कोतवाली थाना अंबिकापुर में बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है।
पुलिस ने राजहंस बस के संचालक इरशाद आलम सहित छह व्यक्तियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मंत्री की चेतावनी और 24 घंटे में दर्ज हुई FIR
गौरतलब है कि एक दिन पूर्व एक वीडियो साक्षात्कार में कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट कहा था कि सरगुजा जैसे शांत अंचल में किसी भी प्रकार के अपराधियों या उन्हें संरक्षण देने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोर व विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस कड़े संदेश के अगले ही दिन, 23 जुलाई 2026 को कोतवाली थाना अंबिकापुर में अपराध क्रमांक 0510/2026 दर्ज किया गया।
-
दर्ज एफआईआर के मुख्य बिंदु: एफआईआर के अनुसार, इरशाद आलम, ज़िसान आलम, दिलशाद आलम, सलमान और अन्य दो व्यक्तियों पर फरार गैंगस्टर शाबिर आलम एवं उसके पुत्र कामरान साबरी के साथ मिलकर जान से मारने की धमकी देने तथा सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज व अश्लील हरकतें करने के गंभीर आरोप हैं।
पूर्व में भी दर्ज हैं शाबिर और परिजनों पर कई आपराधिक मामले
अंबिकापुर पुलिस रिकॉर्ड और उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, शाबिर आलम और उसके परिजनों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है—
-
अपराध क्रमांक 151/2024 (16 मार्च 2024): शाबिर आलम के खिलाफ भा.द.वि. की धारा 294, 506, 323, 34 के तहत प्रकरण दर्ज हुआ था, जिसमें पुलिस सक्षम न्यायालय में चालान (आरोप पत्र) प्रस्तुत कर चुकी है।
-
अपराध क्रमांक 0505/2025 (26 जुलाई 2025): कामरान साबरी, सलमान उर्फ करिया एवं सोनू के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 296, 351(3), 115(2), 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया था।
झारखंड गैंगवार और अंबिकापुर में गैंगस्टरों के पनाह की पृष्ठभूमि
इस पूरे मामले की जड़ें झारखंड के चर्चित गैंगवार से जुड़ी हुई हैं। 29 जून 2026 को मीडिया रिपोर्टों में यह खुलासा हुआ था कि झारखंड में आजीवन कारावास की सजा पाए कुछ फरार सिद्धदोष आरोपी पिछले 12-14 वर्षों से अंबिकापुर क्षेत्र में पहचान छिपाकर रह रहे थे।
-
बैदुल ख़ान पर पहली कार्रवाई: इस खुलासे के बाद पुलिस ने फरार अपराधियों को शरण देने के आरोप में राजहंस बस के एक अन्य संचालक बैदुल ख़ान के खिलाफ 05 जुलाई 2026 को (अपराध क्रमांक 454/2026) एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद से बैदुल ख़ान लगातार फरार चल रहा है।
-
इरशाद आलम का पक्ष और वर्तमान स्थिति: बैदुल ख़ान पर कार्रवाई के बाद इरशाद आलम लगातार मीडिया व सोशल मीडिया पर यह दावा कर रहे थे कि बैदुल का गैंगस्टरों से कोई संबंध नहीं है। हालांकि, अब इरशाद आलम स्वयं गैंगस्टर शाबिर आलम और उसके बेटे के साथ सह-आरोपी बन चुके हैं।
पारिवारिक संबंधों के दावों पर उठ रहे सवाल
शहर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में लंबे समय से यह चर्चा आम है कि जावेद आलम उर्फ बाबू और बैदुल ख़ान के बीच निकटतम पारिवारिक संबंध हैं, जबकि इरशाद आलम को बैदुल ख़ान का भांजा बताया जाता रहा है।
सार्वजनिक मंचों पर इन संबंधों और उनके माध्यम से मिले कथित संरक्षण पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इन पारिवारिक संबंधों या अन्य आरोपों की वैधानिक पुष्टि निष्पक्ष पुलिस विवेचना एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव होगी।
सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा के कड़े निर्देश
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) दीपक कुमार झा स्वयं इस पूरे प्रकरण की निगरानी कर रहे हैं और विवेचना अधिकारियों को लगातार आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले नए साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं तथा अन्य वैधानिक धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
जांच प्रभावित न हो, संयम बरतने की अपील:
कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में ऐसी भ्रामक या अपरिपक्व सूचनाएं सार्वजनिक करने से बचना चाहिए, जिससे पुलिस विवेचना प्रभावित हो सकती हो। पुलिस प्रशासन ने भी निष्पक्ष जांच पूरी होने तक केवल आधिकारिक व तथ्यात्मक जानकारी पर ही विश्वास करने का आग्रह किया है।
