गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा / रायगढ़। रायगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले नगर पंचायत क्षेत्र घरघोड़ा में इन दिनों जनहित के विकास कार्यों की गति और उसके पीछे होने वाली राजनीति को लेकर स्थानीय गलियारों में चर्चाएं अत्यधिक गर्म हैं। नगर के विकास को लेकर जहां एक तरफ प्रशासनिक दावों की झड़ी लगी है, वहीं दूसरी तरफ लगातार होने वाली शिकायतें, आपसी खींचतान और विरोध की राजनीति भी चरम पर है।
इसी बीच, नगर के हृदय स्थल माने जाने वाले प्रमुख सार्वजनिक तालाब की तीन अलग-अलग कालखंड की तस्वीरें सोशल मीडिया और आम जनता के बीच विमर्श का मुख्य केंद्र बन गई हैं। ये तीन तस्वीरें घरघोड़ा के विकास की हकीकत बयां करने के साथ-साथ कई अनसुलझे सवाल भी खड़े कर रही हैं।
तालाब की तीन तस्वीरें: जलकुंभी के साम्राज्य से लेकर दोबारा बर्बादी तक की कहानी
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग द्वारा साझा की गई तीन तस्वीरों की कहानी घरघोड़ा की प्रशासनिक उदासीनता और सामाजिक जिम्मेदारी पर उंगली उठाती है:
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पहली भयावह तस्वीर: यह तस्वीर उस समय की है जब नगर का यह जीवनदायी प्रमुख तालाब पूरी तरह से हरी जलकुंभी और हानिकारक जलीय वनस्पतियों के साम्राज्य में तब्दील हो चुका था। गंदगी, असहनीय बदबू और मच्छरों के प्रकोप के कारण आसपास के रहवासियों का जीना दूभर हो गया था, लेकिन लंबे समय तक व्यवस्था ने इसकी सुध नहीं ली।
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दूसरी राहत भरी तस्वीर: यह तस्वीर तब सामने आई जब व्यापक जन-दबाव, लंबे प्रयासों और एक सघन सफाई अभियान के जरिए तालाब को पूरी तरह कचरा और जलकुंभी मुक्त किया गया। वर्षों बाद जब तालाब का साफ पानी और उसका वास्तविक स्वरूप दिखा, तो नगरवासियों ने राहत की सांस ली और इसे एक बेहतरीन शुरुआत माना।
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तीसरी चिंताजनक तस्वीर: वर्तमान में सामने आई तीसरी तस्वीर ने सबको हैरान कर दिया है। इतनी मशक्कत से साफ किए गए तालाब के पानी पर एक बार फिर जलीय पौधों, पत्तों और कचरे की परत तैरती दिखाई दे रही है। इस तस्वीर के सामने आते ही पूरी सफाई व्यवस्था की हवा निकल गई है।

घरघोड़ा विकास एवं तालाब संरक्षण मामला: एक नजर में
| मुख्य विषय | पूर्व की स्थिति | वर्तमान स्थिति और जन-आकांक्षा |
| मुख्य धरोहर | नगर पंचायत घरघोड़ा का प्रमुख सार्वजनिक तालाब | फिर से जलीय पौधों और कचरे के फैलाव के कारण संकट में। |
| समस्या का दायरा | केवल तालाब तक सीमित नहीं | सड़क, नाली, सार्वजनिक भवन निर्माण कार्यों में भी लगातार अड़ंगेबाजी। |
| नागरिकों की मांग | सफाई पर हुए खर्च की समीक्षा | तालाब को दोबारा गंदा करने वाले तत्वों और अनावश्यक शिकायतकर्ताओं की निष्पक्ष जांच। |
| मूल वैचारिक संदेश | राजनीति से ऊपर उठे नगर | घरघोड़ा को व्यक्तिगत विवादों की नहीं, बल्कि पारदर्शी विकास की आवश्यकता है। |
“यह प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया कृत्य”: नागरिकों का आरोप
तालाब की इस दुर्दशा को देखकर घरघोड़ा के जागरूक नागरिक अब सीधे सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि महज कुछ समय के भीतर तालाब का दोबारा इस स्थिति में पहुंच जाना केवल प्राकृतिक कारण नहीं हो सकता। नागरिकों ने आशंका जताई है कि कुछ असामाजिक या दुर्भावना से ग्रसित तत्व जानबूझकर इस सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सफाई अभियान को विफल साबित करने के लिए इसमें कचरा डाल रहे हैं। जनता की मांग है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस धरोहर की गरिमा से खिलवाड़ कौन कर रहा है।
हर विकास कार्य को विवादों में घसीटने की प्रवृत्ति से जनता परेशान
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का दर्द केवल तालाब तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय से घरघोड़ा नगर पंचायत के अंतर्गत होने वाले सड़क निर्माण, नालियों के संधारण, सामुदायिक भवनों के निर्माण और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचागत सुधारों के खिलाफ लगातार तथ्यहीन शिकायतों और विरोध का एक सुनियोजित माहौल तैयार किया जा रहा है।
जागरूक नगरवासियों का आधिकारिक मत:
“यदि कोई शिकायत नियमों के उल्लंघन या तकनीकी कमियों (तथ्यों) के आधार पर की जाती है, तो उसका पूरा समाज स्वागत करता है क्योंकि इससे पारदर्शिता आती है। लेकिन यदि केवल निजी स्वार्थ, राजनीतिक रसूख या किसी दुर्भावना के चलते हर जनहित के कार्य को विवादों के घेरे में खड़ा किया जाएगा, तो निविदाएं निरस्त होंगी, काम रुकेंगे और इसका सबसे बड़ा खामियाजा केवल और केवल घरघोड़ा की आम जनता को भुगतना पड़ेगा।”
