गौरी शंकर गुप्ता/पत्थलगांव (जशपुर)। मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ सीमा से सटे जशपुर जिले के पत्थलगांव थाना क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय भू-माफियाओं और अवैध कारोबारियों के खिलाफ बेबाक खबरें लिखने वाले पत्रकार अमित पांडेय को पत्थलगांव थाने परिसर के भीतर ही बेरहमी से पीटे जाने का आरोप लगा है। इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार अमित पांडेय पिछले लंबे समय से क्षेत्र में फल-फूल रहे अवैध रेत खनन, फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी व निजी जमीनों पर कब्जे और भू-माफियाओं के सिंडिकेट को लेकर लगातार खबरें उजागर कर रहे थे। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि भू-माफियाओं के खिलाफ चलाई गई खबरों से बौखलाए रसूखदारों ने सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें थाने बुलवाया और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही उन पर हमला कर दिया।
SDOP की भूमिका पर उठे संगीन सवाल
इस पूरी वारदात में पत्थलगांव SDOP ध्रुवेश जायसवाल की कार्यप्रणाली और भूमिका गंभीर संदेह के घेरे में आ गई है।
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थाने के भीतर पिटाई: आरोप है कि SDOP और अन्य पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में रसूखदारों ने पत्रकार का गिरेबान पकड़ा और उनसे मारपीट की, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
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पुराना विवादित ट्रैक रिकॉर्ड: SDOP ध्रुवेश जायसवाल के बलरामपुर (वाड्रफनगर) एवं सरगुजा कार्यकाल के दौरान भी निर्भीक पत्रकारों और ग्रामीणों को प्रताड़ित करने तथा पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के गंभीर आरोप लग चुके हैं।
बेबश परिवारों की उठाई थी आवाज
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पीड़ित पत्रकार अमित पांडेय लंबे समय से उन गरीब परिवारों की ढाल बने हुए थे जिनकी जमीनों को फर्जी कागजात तैयार कर हड़प लिया गया था। सच दिखाने की कीमत उन्हें थाने के भीतर लहूलुहान होकर चुकानी पड़ी।
राजनीतिक-सामाजिक हलकों में आक्रोश
इस घटना के बाद से क्षेत्र के पत्रकारों, जनसंगठनों और आम नागरिकों में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर #JusticeForAmitPandey अभियान चलाया जा रहा है। मामले में दोषी अधिकारियों और हमलावर भू-माफियाओं के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की मांग की जा रही है।
