Category: छत्तीसगढ़

  • रायपुर : खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और नवाचार का नया अध्याय: खनिज प्रबंधन में डिजिटल युग की नई शुरुआत

    रायपुर : खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और नवाचार का नया अध्याय: खनिज प्रबंधन में डिजिटल युग की नई शुरुआत

    2024-25 में अप्रैल से फरवरी तक 11,581 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व अर्जित

    44 खनिज ब्लॉकों की  सफलतापूर्वक ई-नीलामी: देश में पहली बार खनिज लिथियम ब्लॉक की सफलतापूर्वक नीलामी

    बैलाडीला क्षेत्र में तीन नए लौह अयस्क ब्लॉकों की ई-नीलामी प्रक्रिया जारी

    जिला खनिज संस्थान न्यास के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 1,673 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त: 9,362 विकास कार्यों को दी गई मंजूरी

    राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना की योजना

     रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पारदर्शी खनन नीति, ई-नीलामी, डिजिटल निगरानी और पर्यावरण-संवेदनशील खनन रणनीतियों को अपनाकर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नए आयाम दिए हैं।खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित उत्खनन के चलते बीते वर्षों में छत्तीसगढ़ के खनिज राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य के गठन के समय की तुलना में खनिज राजस्व में 30 गुना वृद्धि हुई है, जो 2023-24 में 13,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और 2024-25 में अप्रैल से फरवरी तक ही 11,581 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जा चुका है। यह पारदर्शी खनन नीति और प्रभावी प्रशासन का परिणाम है। अब तक 44 खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी सफलतापूर्वक की जा चुकी है, जिसमें अब तक चूना पत्थर के 14, लौह अयस्क के 9, बॉक्साइट के 11, स्वर्ण के 3, निकल, क्रोमियम के 2, ग्रेफाइट के 2, ग्लूकोनाइट के 2 और लिथियम के 1 खनिज ब्लाक की निलामी की गई है।

    प्रदेश में अब तक 10 क्रिटिकल एवं डीप सीटेड मिनरल्स ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी

    भारत सरकार द्वारा देश के आर्थिक एवं सामरिक विकास को ध्यान में रखते हुए क्रिटिकल एवं सामरिक महत्व के खनिजों के लिए राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन की घोषणा जनवरी, 2025 में की गई है। इस के अनुरूप प्रदेश में विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 से ही क्रिटिकल एवं सामरिक महत्व के खनिजों के अन्वेषण / खोज पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसके तहत 56 अन्वेषण परियोजनाओं में से 31 परियोजनाओं अंतर्गत क्रिटिकल एवं डीप सीटेड मिनरल्स पर कार्य किये जा रहे है।

    प्रदेश में अब तक 10 क्रिटिकल एवं डीप सीटेड मिनरल्स ब्लॉक्स जिसमें लिथियम का 1, स्वर्ण का 3, निकल, क्रोमियम का 2, ग्रेफाइट का 2 ग्लूकोनाइट के 2 मिनरल ब्लॉक की नीलामी की गई है।

    देश में पहली बार खनिज लिथियम ब्लॉक की सफलतापूर्वक नीलामी की कार्यवाही भारत सरकार द्वारा की गई है जिसके तहत् जिला कोरबा के कटघोरा लिथियम ब्लॉक को मेसर्स साउथ मायकी मायनिंग कंपनी को 76 प्रतिशत प्रीमियम राशि पर आबंटित किया गया है। राज्य के सुकमा एवं कोरबा जिले में भी लिथियम अन्वेषण कार्य किया जा रहा है जिसमें लिथियम के भण्डार पाये जाने की पूर्ण संभावना है।

    बैलाडीला लौह अयस्क: भारत के खनन क्षेत्र का मजबूत स्तंभ

     बैलाडीला क्षेत्र भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क भंडारों में से एक है। यहां तीन नए लौह अयस्क ब्लॉकों की ई-नीलामी प्रक्रिया जारी है, जिसे मार्च 2025 तक पूरा किया जाएगा। इसके अलावा कांकेर जिले के हाहालद्दी लौह अयस्क खनिज ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।

    पर्यावरण संतुलन और पारदर्शी निगरानी प्रणाली

    पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए खनन क्षेत्र को अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक रूप से संचालित करने के लिए सरकार ने कई नई पहल की हैं। सेटेलाइट इमेजरी और माइनिंग सर्विलियेंस सिस्टम के माध्यम से अवैध खनन की निगरानी की जा रही है। गौण खनिज खानों में सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक पद्धति से खनन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार बेहतर कार्य करने वाले पट्टेधारियों को ‘स्टार रेटिंग’ प्रणाली के तहत प्रोत्साहित कर रही है।

    खनिज राजस्व से सामाजिक विकास और बुनियादी सुविधाओं में निवेश

    खनिज राजस्व का एक बड़ा हिस्सा प्रदेश के सामाजिक विकास में निवेश किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 1,673 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त हुई है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और कौशल विकास सहित 9,362 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। इससे खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में महत्वपूर्ण सुधार हो रहा है।

    खनिज अन्वेषण कार्यों का विस्तार और नई परियोजनाएँ

    राज्य सरकार ने चूना पत्थर, बॉक्साइट, लौह अयस्क और ग्रेफाइट सहित कुल 13 खनिज परियोजनाओं में अन्वेषण कार्य शुरू किया है। प्रारंभिक सर्वेक्षणों में चूना पत्थर के 283 मिलियन टन, लौह अयस्क के 67 मिलियन टन और बॉक्साइट के 3 लाख टन भंडार का अनुमान लगाया गया है। स्वर्ण, ग्रेफाइट और ग्लूकोनाइट जैसे खनिजों की खोज भी की जा रही है, जिससे राज्य के खनन क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, सूरजपुर जिले के जाजावल क्षेत्र में यूरेनियम ब्लॉक के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। कोल बेड मीथेन पूर्ववर्ती कोरिया जिले में वेदांता लिमि. एवं ऑईलमैक्स को पेट्रोलियम अन्वेषण लायसेंस स्वीकृत किया गया है। मैंगनीज ओर इंडिया लि. (मोईल) द्वारा सीएमडीसी के साथ प्रदेश में प्रथम बार बलरामपुर क्षेत्र में खनिज मैगनीज का भंडार चिन्हित किया गया है।

    मुख्य खनिजों के लिए अन्वेषण हेतु केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना की गई है। इसी तर्ज पर खनिज विभाग द्वारा राज्य के गौण खनिजों के व्यवस्थित विकास एवं अन्वेषण के लिए राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

    उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से छत्तीसगढ़ देश के समृद्ध राज्यों में से एक है। कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर, बॉक्साइट, स्वर्ण, निकल, क्रोमियम और प्लेटिनम समूह के तत्व सहित कुल 28 प्रकार के खनिजों की प्रचुरता ने इस राज्य को देश के खनन क्षेत्र में एक अग्रणी भूमिका में ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों, सतत विकास की रणनीतियों और कुशल प्रशासनिक प्रयासों के चलते छत्तीसगढ़ भारत के अग्रणी औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। खनिज संपदा के माध्यम से प्रदेश न केवल आर्थिक मजबूती प्राप्त कर रहा है, बल्कि हरित और सतत विकास की दिशा में भी अग्रसर हो रहा है। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध खनिज संपदा और रणनीतिक पहल के साथ भारत के माइनिंग हब के रूप में अपनी पहचान और अधिक सशक्त करेगा।

  • रायपुर : खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और नवाचार का नया अध्याय: खनिज प्रबंधन में डिजिटल युग की नई शुरुआत

    रायपुर : खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और नवाचार का नया अध्याय: खनिज प्रबंधन में डिजिटल युग की नई शुरुआत

    2024-25 में अप्रैल से फरवरी तक 11,581 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व अर्जित

    44 खनिज ब्लॉकों की  सफलतापूर्वक ई-नीलामी: देश में पहली बार खनिज लिथियम ब्लॉक की सफलतापूर्वक नीलामी

    बैलाडीला क्षेत्र में तीन नए लौह अयस्क ब्लॉकों की ई-नीलामी प्रक्रिया जारी

    जिला खनिज संस्थान न्यास के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 1,673 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त: 9,362 विकास कार्यों को दी गई मंजूरी

    राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना की योजना

     रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पारदर्शी खनन नीति, ई-नीलामी, डिजिटल निगरानी और पर्यावरण-संवेदनशील खनन रणनीतियों को अपनाकर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नए आयाम दिए हैं।खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित उत्खनन के चलते बीते वर्षों में छत्तीसगढ़ के खनिज राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य के गठन के समय की तुलना में खनिज राजस्व में 30 गुना वृद्धि हुई है, जो 2023-24 में 13,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और 2024-25 में अप्रैल से फरवरी तक ही 11,581 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जा चुका है। यह पारदर्शी खनन नीति और प्रभावी प्रशासन का परिणाम है। अब तक 44 खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी सफलतापूर्वक की जा चुकी है, जिसमें अब तक चूना पत्थर के 14, लौह अयस्क के 9, बॉक्साइट के 11, स्वर्ण के 3, निकल, क्रोमियम के 2, ग्रेफाइट के 2, ग्लूकोनाइट के 2 और लिथियम के 1 खनिज ब्लाक की निलामी की गई है।

    प्रदेश में अब तक 10 क्रिटिकल एवं डीप सीटेड मिनरल्स ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी

    भारत सरकार द्वारा देश के आर्थिक एवं सामरिक विकास को ध्यान में रखते हुए क्रिटिकल एवं सामरिक महत्व के खनिजों के लिए राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन की घोषणा जनवरी, 2025 में की गई है। इस के अनुरूप प्रदेश में विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 से ही क्रिटिकल एवं सामरिक महत्व के खनिजों के अन्वेषण / खोज पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसके तहत 56 अन्वेषण परियोजनाओं में से 31 परियोजनाओं अंतर्गत क्रिटिकल एवं डीप सीटेड मिनरल्स पर कार्य किये जा रहे है।

    प्रदेश में अब तक 10 क्रिटिकल एवं डीप सीटेड मिनरल्स ब्लॉक्स जिसमें लिथियम का 1, स्वर्ण का 3, निकल, क्रोमियम का 2, ग्रेफाइट का 2 ग्लूकोनाइट के 2 मिनरल ब्लॉक की नीलामी की गई है।

    देश में पहली बार खनिज लिथियम ब्लॉक की सफलतापूर्वक नीलामी की कार्यवाही भारत सरकार द्वारा की गई है जिसके तहत् जिला कोरबा के कटघोरा लिथियम ब्लॉक को मेसर्स साउथ मायकी मायनिंग कंपनी को 76 प्रतिशत प्रीमियम राशि पर आबंटित किया गया है। राज्य के सुकमा एवं कोरबा जिले में भी लिथियम अन्वेषण कार्य किया जा रहा है जिसमें लिथियम के भण्डार पाये जाने की पूर्ण संभावना है।

    बैलाडीला लौह अयस्क: भारत के खनन क्षेत्र का मजबूत स्तंभ

     बैलाडीला क्षेत्र भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क भंडारों में से एक है। यहां तीन नए लौह अयस्क ब्लॉकों की ई-नीलामी प्रक्रिया जारी है, जिसे मार्च 2025 तक पूरा किया जाएगा। इसके अलावा कांकेर जिले के हाहालद्दी लौह अयस्क खनिज ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।

    पर्यावरण संतुलन और पारदर्शी निगरानी प्रणाली

    पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए खनन क्षेत्र को अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक रूप से संचालित करने के लिए सरकार ने कई नई पहल की हैं। सेटेलाइट इमेजरी और माइनिंग सर्विलियेंस सिस्टम के माध्यम से अवैध खनन की निगरानी की जा रही है। गौण खनिज खानों में सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक पद्धति से खनन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार बेहतर कार्य करने वाले पट्टेधारियों को ‘स्टार रेटिंग’ प्रणाली के तहत प्रोत्साहित कर रही है।

    खनिज राजस्व से सामाजिक विकास और बुनियादी सुविधाओं में निवेश

    खनिज राजस्व का एक बड़ा हिस्सा प्रदेश के सामाजिक विकास में निवेश किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 1,673 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त हुई है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और कौशल विकास सहित 9,362 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। इससे खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में महत्वपूर्ण सुधार हो रहा है।

    खनिज अन्वेषण कार्यों का विस्तार और नई परियोजनाएँ

    राज्य सरकार ने चूना पत्थर, बॉक्साइट, लौह अयस्क और ग्रेफाइट सहित कुल 13 खनिज परियोजनाओं में अन्वेषण कार्य शुरू किया है। प्रारंभिक सर्वेक्षणों में चूना पत्थर के 283 मिलियन टन, लौह अयस्क के 67 मिलियन टन और बॉक्साइट के 3 लाख टन भंडार का अनुमान लगाया गया है। स्वर्ण, ग्रेफाइट और ग्लूकोनाइट जैसे खनिजों की खोज भी की जा रही है, जिससे राज्य के खनन क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, सूरजपुर जिले के जाजावल क्षेत्र में यूरेनियम ब्लॉक के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। कोल बेड मीथेन पूर्ववर्ती कोरिया जिले में वेदांता लिमि. एवं ऑईलमैक्स को पेट्रोलियम अन्वेषण लायसेंस स्वीकृत किया गया है। मैंगनीज ओर इंडिया लि. (मोईल) द्वारा सीएमडीसी के साथ प्रदेश में प्रथम बार बलरामपुर क्षेत्र में खनिज मैगनीज का भंडार चिन्हित किया गया है।

    मुख्य खनिजों के लिए अन्वेषण हेतु केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना की गई है। इसी तर्ज पर खनिज विभाग द्वारा राज्य के गौण खनिजों के व्यवस्थित विकास एवं अन्वेषण के लिए राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

    उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से छत्तीसगढ़ देश के समृद्ध राज्यों में से एक है। कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर, बॉक्साइट, स्वर्ण, निकल, क्रोमियम और प्लेटिनम समूह के तत्व सहित कुल 28 प्रकार के खनिजों की प्रचुरता ने इस राज्य को देश के खनन क्षेत्र में एक अग्रणी भूमिका में ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों, सतत विकास की रणनीतियों और कुशल प्रशासनिक प्रयासों के चलते छत्तीसगढ़ भारत के अग्रणी औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। खनिज संपदा के माध्यम से प्रदेश न केवल आर्थिक मजबूती प्राप्त कर रहा है, बल्कि हरित और सतत विकास की दिशा में भी अग्रसर हो रहा है। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध खनिज संपदा और रणनीतिक पहल के साथ भारत के माइनिंग हब के रूप में अपनी पहचान और अधिक सशक्त करेगा।

  • छत्तीसगढ़ के 11 लाख उपभाेक्ताओं काे बिजली के लिए जून माह से कराना होगा रिचार्ज

    छत्तीसगढ़ के 11 लाख उपभाेक्ताओं काे बिजली के लिए जून माह से कराना होगा रिचार्ज

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के 11 लाख उपभाेक्ताओं काे बिजली के लिए जून माह से रिचार्ज कराना होगा. घर में लगे प्रीपेड स्मार्ट मीटर काे रिचार्ज कराने पर ही बिजली मिलेगी. जिनके घरों में स्मार्ट मीटर नहीं लगा है उनके यहां भी इस साल के अंत तक लग जाएगा. केंद्र सरकार के रिवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत ये मीटर लगाए जा रहे हैं. स्मार्ट मीटर लगाने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है.

    केंद्र की इस योजना के तहत कृषि उपभोक्ताओं को छोड़कर सभी उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे. जानकारी के मुताबिक, इस मीटर की मैनुअल रीडिंग की आवश्यकता नहीं हाेगी. कर्मचारी स्टेशन से ही प्रत्येक घर की बिजली की खपत की गणना कर सकते हैं. राजधानी रायपुर स्मार्ट मीटर लगाने के मामले में रायपुर दो लाख 59 हजार मीटर के साथ पहले नंबर पर है. वहीं बिलासपुर में एक लाख नौ हजार स्मार्ट मीटर लग चुके हैं. इसी तरह धमतरी में 98 हजार, बलौदाबाजार में 78 हजार, महासमुंद में 82 हजार, राजनांदगांव में 67 हजार, जांजगीर चांपा में 29 हजार और कोरबा में 42 हजार स्मार्ट मीटर समेत पूरे 11 लाख प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं.

    रिचार्ज खत्म होते ही कट जाएगी बिजली
    छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के मुताबिक प्रदेश में वर्तमान में 59 लाख बिजली उपभोक्ता हैं. इनमें से लगभग 5 लाख 50 हजार उपभोक्ता कृषि कनेक्शन वाले हैं. इन कृषि उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की योजना से बाहर रखा गया है. उपभोक्ता को एडवांस में रिचार्ज कराना होगा. इस मीटर के सक्रिय हो जाने के बाद उपभोक्ता रिचार्ज खत्म होते ही बिजली अपने आप कट जाएगी. रिचार्ज खत्म होने से पहले ही उपभोक्ताओं के फोन पर बैलेंस रिचार्ज का मैसेज आ जाएगा.

  • CG News: खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और नवाचार का नया अध्याय: खनिज प्रबंधन में डिजिटल युग की नई शुरुआत…

    CG News: खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और नवाचार का नया अध्याय: खनिज प्रबंधन में डिजिटल युग की नई शुरुआत…

    रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पारदर्शी खनन नीति, ई-नीलामी, डिजिटल निगरानी और पर्यावरण-संवेदनशील खनन रणनीतियों को अपनाकर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नए आयाम दिए हैं।खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित उत्खनन के चलते बीते वर्षों में छत्तीसगढ़ के खनिज राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

    राज्य के गठन के समय की तुलना में खनिज राजस्व में 30 गुना वृद्धि हुई है, जो 2023-24 में 13,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और 2024-25 में अप्रैल से फरवरी तक ही 11,581 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जा चुका है। यह पारदर्शी खनन नीति और प्रभावी प्रशासन का परिणाम है। अब तक 44 खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी सफलतापूर्वक की जा चुकी है, जिसमें अब तक चूना पत्थर के 14, लौह अयस्क के 9, बॉक्साइट के 11, स्वर्ण के 3, निकल, क्रोमियम के 2, ग्रेफाइट के 2, ग्लूकोनाइट के 2 और लिथियम के 1 खनिज ब्लाक की निलामी की गई है।

    प्रदेश में अब तक 10 क्रिटिकल एवं डीप सीटेड मिनरल्स ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी :-

    भारत सरकार द्वारा देश के आर्थिक एवं सामरिक विकास को ध्यान में रखते हुए क्रिटिकल एवं सामरिक महत्व के खनिजों के लिए राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन की घोषणा जनवरी, 2025 में की गई है। इस के अनुरूप प्रदेश में विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 से ही क्रिटिकल एवं सामरिक महत्व के खनिजों के अन्वेषण / खोज पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसके तहत 56 अन्वेषण परियोजनाओं में से 31 परियोजनाओं अंतर्गत क्रिटिकल एवं डीप सीटेड मिनरल्स पर कार्य किये जा रहे है।

    प्रदेश में अब तक 10 क्रिटिकल एवं डीप सीटेड मिनरल्स ब्लॉक्स जिसमें लिथियम का 1, स्वर्ण का 3, निकल, क्रोमियम का 2, ग्रेफाइट का 2 ग्लूकोनाइट के 2 मिनरल ब्लॉक की नीलामी की गई है। देश में पहली बार खनिज लिथियम ब्लॉक की सफलतापूर्वक नीलामी की कार्यवाही भारत सरकार द्वारा की गई है जिसके तहत् जिला कोरबा के कटघोरा लिथियम ब्लॉक को मेसर्स साउथ मायकी मायनिंग कंपनी को 76 प्रतिशत प्रीमियम राशि पर आबंटित किया गया है। राज्य के सुकमा एवं कोरबा जिले में भी लिथियम अन्वेषण कार्य किया जा रहा है जिसमें लिथियम के भण्डार पाये जाने की पूर्ण संभावना है।

    बैलाडीला लौह अयस्क: भारत के खनन क्षेत्र का मजबूत स्तंभ :-

    बैलाडीला क्षेत्र भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क भंडारों में से एक है। यहां तीन नए लौह अयस्क ब्लॉकों की ई-नीलामी प्रक्रिया जारी है, जिसे मार्च 2025 तक पूरा किया जाएगा। इसके अलावा कांकेर जिले के हाहालद्दी लौह अयस्क खनिज ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।

    पर्यावरण संतुलन और पारदर्शी निगरानी प्रणाली :-

    पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए खनन क्षेत्र को अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक रूप से संचालित करने के लिए सरकार ने कई नई पहल की हैं। सेटेलाइट इमेजरी और माइनिंग सर्विलियेंस सिस्टम के माध्यम से अवैध खनन की निगरानी की जा रही है। गौण खनिज खानों में सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक पद्धति से खनन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार बेहतर कार्य करने वाले पट्टेधारियों को ‘स्टार रेटिंग’ प्रणाली के तहत प्रोत्साहित कर रही है।

    खनिज राजस्व से सामाजिक विकास और बुनियादी सुविधाओं में निवेश :-

    खनिज राजस्व का एक बड़ा हिस्सा प्रदेश के सामाजिक विकास में निवेश किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 1,673 करोड़ रुपये की निधि प्राप्त हुई है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और कौशल विकास सहित 9,362 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। इससे खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में महत्वपूर्ण सुधार हो रहा है।

    खनिज अन्वेषण कार्यों का विस्तार और नई परियोजनाएँ :-

    राज्य सरकार ने चूना पत्थर, बॉक्साइट, लौह अयस्क और ग्रेफाइट सहित कुल 13 खनिज परियोजनाओं में अन्वेषण कार्य शुरू किया है। प्रारंभिक सर्वेक्षणों में चूना पत्थर के 283 मिलियन टन, लौह अयस्क के 67 मिलियन टन और बॉक्साइट के 3 लाख टन भंडार का अनुमान लगाया गया है। स्वर्ण, ग्रेफाइट और ग्लूकोनाइट जैसे खनिजों की खोज भी की जा रही है, जिससे राज्य के खनन क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, सूरजपुर जिले के जाजावल क्षेत्र में यूरेनियम ब्लॉक के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है।

    कोल बेड मीथेन पूर्ववर्ती कोरिया जिले में वेदांता लिमि. एवं ऑईलमैक्स को पेट्रोलियम अन्वेषण लायसेंस स्वीकृत किया गया है। मैंगनीज ओर इंडिया लि. (मोईल) द्वारा सीएमडीसी के साथ प्रदेश में प्रथम बार बलरामपुर क्षेत्र में खनिज मैगनीज का भंडार चिन्हित किया गया है। मुख्य खनिजों के लिए अन्वेषण हेतु केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना की गई है। इसी तर्ज पर खनिज विभाग द्वारा राज्य के गौण खनिजों के व्यवस्थित विकास एवं अन्वेषण के लिए राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट की स्थापना की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

    उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से छत्तीसगढ़ देश के समृद्ध राज्यों में से एक है। कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर, बॉक्साइट, स्वर्ण, निकल, क्रोमियम और प्लेटिनम समूह के तत्व सहित कुल 28 प्रकार के खनिजों की प्रचुरता ने इस राज्य को देश के खनन क्षेत्र में एक अग्रणी भूमिका में ला खड़ा किया है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों, सतत विकास की रणनीतियों और कुशल प्रशासनिक प्रयासों के चलते छत्तीसगढ़ भारत के अग्रणी औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। खनिज संपदा के माध्यम से प्रदेश न केवल आर्थिक मजबूती प्राप्त कर रहा है, बल्कि हरित और सतत विकास की दिशा में भी अग्रसर हो रहा है। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध खनिज संपदा और रणनीतिक पहल के साथ भारत के माइनिंग हब के रूप में अपनी पहचान और अधिक सशक्त करेगा।

  • पीएम जनमन योजना के बाद आज भी 9 बस्तियां घोर अंधकार में हैं

    पीएम जनमन योजना के बाद आज भी 9 बस्तियां घोर अंधकार में हैं

    खैरागढ़

    आजादी के 77 साल बाद भी खैरागढ़ जिले की PVTG (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) बस्तियां बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. PM-JANMAN योजना के तहत इन इलाकों को बिजली से जोड़ने का वादा किया गया था, लेकिन आज भी 9 बस्तियां घोर अंधकार में हैं. सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों से कोसों दूर ये गांव विकास की दौड़ में पीछे छूट चुके हैं. जिस तरह का जीवन यहां के रहवासी जी रहे हैं, उसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे..

    जानिए क्या है पीएम जनमन योजना:
    पीएम जनमन योजना का उद्देश्य सभी को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुंच के साथ-साथ बेहतर सड़क और दूरसंचार संपर्क और पीवीटीजी घरों और आवासों में स्थायी आजीविका के अवसर जैसी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना है.

    छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मुताबिक, झिलमिली, सिंगबोरा, ग्वालकुंडी, आमाटोला, निजामडीह , संजारी, कोहकझोरी , लवातरा और टिंगीपुर जैसी PVTG बस्तियों में अब तक बिजली कनेक्शन नहीं पहुंच सका है. यहां न सड़कें हैं, न स्वास्थ्य केंद्र और न ही रोशनी का नामो-निशान. बारिश के दिनों में ये गांव पूरी तरह कट जाते हैं, और रात होते ही यहां घना अंधेरा छा जाता है. बिजली विभाग ने इन गांवों को रोशन करने का दावा तो किया, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. PM-JANMAN योजना के तहत इन इलाकों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बिजली वनबाधा के चलते नदारद है.

    हाल ही में बिजली कंपनी ने सहायक अभियंता को पत्र जारी कर जल्द से जल्द इन गांवों को बिजली से जोड़ने के निर्देश दिए हैं. लेकिन ये निर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगे या इन बस्तियों में सच में रोशनी पहुंचेगी? यह बड़ा सवाल है.

    सरकार भले ही आदिवासियों के विकास के लिए तमाम योजनाएं चला रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि PVTG समुदाय आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहा है. सरकार के दावों और हकीकत के बीच की इस खाई को पाटने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे, वरना ये आदिवासी परिवार हमेशा की तरह वादों के जाल में उलझे रहेंगे.

    वहीं पूरे मामले पर विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार द्विवेदी ने बताया कि जिले में कुल 47 बसाहटे थीं, जिसमें बिजली नहीं थी. लेकिन अब कई बस्तियों में बिजली पहुंच गई है. हालांकि 9 बसाहटें ऐसी हैं, जिनमें वन बाधा और घरों के बीच अत्याधिक दूरी होने के कारण बिजली नहीं पहुंच पाई है. इन्हें सोलर ऑफ ग्रिड से बिजली दिया जाना प्रस्तावित है. हमने राजनांदगांव क्रेडा को पत्र लिखा है कि इन 9 बस्तियों में जल्दी ही सोलर बिजली पहुंचाई जाए.

  • छत्तीसगढ़ में खोली जा रही 67 नई शराब दुकानें

    छत्तीसगढ़ में खोली जा रही 67 नई शराब दुकानें

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में एक अप्रैल 2025 से 67 नई शराब दुकानें खोली जा रही हैं. नई आबकारी नीति में नई दुकान खोलने का निर्णय लिया गया है. साथ ही प्रीमियम शॉप के संचालन की भी अनुमति दी गई है. नई 67 दुकानें खुलने से दुकानों की संख्या बढ़कर 741 हो जाएगी. यह दुकानें सीमावर्ती इलाके और 30 किमी के दायरे के बीच दुकान नहीं होने की स्थिति में खोलने का निर्णय लिया गया है. वर्तमान में राज्य में 674 देशी-विदेशी शराब की दुकानें हैं. इसके अलावा बड़े मॉल या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में प्रीमियम शॉप अलग से संचालित हो रही है. राज्य सरकार ने नए वित्तीय वर्ष में एक भी शराब दुकान बंद नहीं करने का फैसला लिया है. शराब दुकानों की संख्या बढ़ने से राज्य के राजस्व में भी करीब हजार करोड़ की वृद्धि अनुमानित है. आगामी वर्ष आबकारी से साढ़े 12 हजार करोड़ राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया गया है.

    छत्तीसगढ़ सरकार की नई आबकारी नीति वर्ष 2025-26 में भी देशी विदेशी शराब दुकानों का संचालन छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा करने का निर्णय लिया है. नई नीति में अधोसंरचना विकास शुल्क के नाम पर प्रति बोतल 5 रुपए से लेकर 10, 20, 40 और 60 रुपए वसूला जाएगा. नई आबकारी नीति में दुकानों का स्थानांतरण किया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए कलेक्टरों को एक अप्रैल 2025 से पहले आयुक्त आबकारी को प्रस्ताव भेजना अनिवार्य होगा.

    नई आबकारी नीति में 10 प्रतिशत यानी 67 नई दुकान खोलने का निर्णय लिया गया है. इसके लिए भी कलेक्टरों को प्रस्ताव भेजना होगा. इसके पीछे विभाग का तर्क है कि राज्य के कई जिलों में शराब दुकानों के बीच 30 किमी का गैप है. इसके चलते अवैध शराब का कारोबार पनपता है. वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब दुकान नहीं होने के कारण भी अन्य राज्यों की शराब छत्तीसगढ़ आती है, जिसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने 10 प्रतिशत दुकान बढ़ाने का निर्णय लिया है.

    मालूम हो कि नई आबकारी नीति में कंपोजिट दुकानों की स्थिति यथावत रखी गयी है. देशी और विदेशी शराब दुकानों की बिक्री एक ही स्थान पर होगी. इसी तरह अहाता की व्यवस्था भी यथावत रखी गई है. इसके लिए विभाग अलग से निर्देश जारी करेगा. नई आबकारी नीति में भी कांच की बोतल में शराब की बिक्री होगी, जिस पर होलोग्राम के अलावा ईएएल चस्पा करना अनिवार्य किया गया है. अधिकतम 6 बोतल, 12 अद्धी और 24 पौव्वा शराब एक व्यक्ति को बेची जा सकेगी.

    साल में चार दिन शराब दुकानें रहेंगी बंद
    राज्य शासन की नई आबकारी नीति में चार दिन शराब दुकानें बंद रखने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत 26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर गांधी जयंती और बाबा गुरु घासीदास जयंती 18 दिसंबर को शराब दुकानें बंद रहेंगी. इसके अलावा मद्य निषेध नीति के तहत दुकानें भी बंद रहेगी. दुकानों के खुलने के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. दुकानें सुबह 10 से रात्रि 10 बजे तक खुलेंगी और बंद होगी. इसके अलावा मद्य निषेध नीति के तहत दुकानें बंद रखी जाएंगी. होटल, बार और रेस्टोरेंट के खुलने और बंद होने के समय का नीति में उल्लेख नहीं है. इसके लिए भी अलग से निर्देश जारी होंगे.

  • छत्तीसगढ़ में खोली जा रही 67 नई शराब दुकानें

    छत्तीसगढ़ में खोली जा रही 67 नई शराब दुकानें

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में एक अप्रैल 2025 से 67 नई शराब दुकानें खोली जा रही हैं. नई आबकारी नीति में नई दुकान खोलने का निर्णय लिया गया है. साथ ही प्रीमियम शॉप के संचालन की भी अनुमति दी गई है. नई 67 दुकानें खुलने से दुकानों की संख्या बढ़कर 741 हो जाएगी. यह दुकानें सीमावर्ती इलाके और 30 किमी के दायरे के बीच दुकान नहीं होने की स्थिति में खोलने का निर्णय लिया गया है. वर्तमान में राज्य में 674 देशी-विदेशी शराब की दुकानें हैं. इसके अलावा बड़े मॉल या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में प्रीमियम शॉप अलग से संचालित हो रही है. राज्य सरकार ने नए वित्तीय वर्ष में एक भी शराब दुकान बंद नहीं करने का फैसला लिया है. शराब दुकानों की संख्या बढ़ने से राज्य के राजस्व में भी करीब हजार करोड़ की वृद्धि अनुमानित है. आगामी वर्ष आबकारी से साढ़े 12 हजार करोड़ राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया गया है.

    छत्तीसगढ़ सरकार की नई आबकारी नीति वर्ष 2025-26 में भी देशी विदेशी शराब दुकानों का संचालन छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा करने का निर्णय लिया है. नई नीति में अधोसंरचना विकास शुल्क के नाम पर प्रति बोतल 5 रुपए से लेकर 10, 20, 40 और 60 रुपए वसूला जाएगा. नई आबकारी नीति में दुकानों का स्थानांतरण किया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए कलेक्टरों को एक अप्रैल 2025 से पहले आयुक्त आबकारी को प्रस्ताव भेजना अनिवार्य होगा.

    नई आबकारी नीति में 10 प्रतिशत यानी 67 नई दुकान खोलने का निर्णय लिया गया है. इसके लिए भी कलेक्टरों को प्रस्ताव भेजना होगा. इसके पीछे विभाग का तर्क है कि राज्य के कई जिलों में शराब दुकानों के बीच 30 किमी का गैप है. इसके चलते अवैध शराब का कारोबार पनपता है. वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब दुकान नहीं होने के कारण भी अन्य राज्यों की शराब छत्तीसगढ़ आती है, जिसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने 10 प्रतिशत दुकान बढ़ाने का निर्णय लिया है.

    मालूम हो कि नई आबकारी नीति में कंपोजिट दुकानों की स्थिति यथावत रखी गयी है. देशी और विदेशी शराब दुकानों की बिक्री एक ही स्थान पर होगी. इसी तरह अहाता की व्यवस्था भी यथावत रखी गई है. इसके लिए विभाग अलग से निर्देश जारी करेगा. नई आबकारी नीति में भी कांच की बोतल में शराब की बिक्री होगी, जिस पर होलोग्राम के अलावा ईएएल चस्पा करना अनिवार्य किया गया है. अधिकतम 6 बोतल, 12 अद्धी और 24 पौव्वा शराब एक व्यक्ति को बेची जा सकेगी.

    साल में चार दिन शराब दुकानें रहेंगी बंद
    राज्य शासन की नई आबकारी नीति में चार दिन शराब दुकानें बंद रखने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत 26 जनवरी, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर गांधी जयंती और बाबा गुरु घासीदास जयंती 18 दिसंबर को शराब दुकानें बंद रहेंगी. इसके अलावा मद्य निषेध नीति के तहत दुकानें भी बंद रहेगी. दुकानों के खुलने के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. दुकानें सुबह 10 से रात्रि 10 बजे तक खुलेंगी और बंद होगी. इसके अलावा मद्य निषेध नीति के तहत दुकानें बंद रखी जाएंगी. होटल, बार और रेस्टोरेंट के खुलने और बंद होने के समय का नीति में उल्लेख नहीं है. इसके लिए भी अलग से निर्देश जारी होंगे.

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की सौजन्य मुलाकात: कहा- बस्तर के विकास को मिल रही नई दिशा, विकास और पर्यटन पर गृहमंत्री से हुई चर्चा…

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की सौजन्य मुलाकात: कहा- बस्तर के विकास को मिल रही नई दिशा, विकास और पर्यटन पर गृहमंत्री से हुई चर्चा…

    रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सरकार की सख्त नीतियों और सुरक्षा बलों की प्रभावी रणनीति के चलते नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति लौट रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके निवास पर मुलाकात की। इस बैठक में नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने, बस्तर के विकास को तेज करने और पर्यटन व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई।

     

    मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को अवगत कराया कि नक्सलवाद अब अपने आखिरी पड़ाव पर है और सरकार इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए निर्णायक कदम उठा रही है। राज्य और केंद्र के संयुक्त प्रयासों से नक्सली संगठनों की पकड़ कमजोर हो चुकी है। अब अंतिम चरण की रणनीति तैयार कर बस्तर को स्थायी शांति की ओर ले जाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 का असर दिखने लगा है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की सौजन्य मुलाकात

    हाल ही में बीजापुर जिले में 9 ईनामी नक्सलियों समेत कुल 19 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता और पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, ताकि वे समाज में सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। बैठक में बस्तर में विकास कार्यों को तेज करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि सरकार क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और जल जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार और नए रोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर सिर्फ संघर्ष की भूमि न रहकर शांति, विकास और संभावनाओं का नया केंद्र बने।बैठक में बस्तर के समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक सौंदर्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

  • छत्तीसगढ़ की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर: बीजापुर में 19 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, छोड़ा हिंसा का रास्ता, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों को दी बधाई…

    छत्तीसगढ़ की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर: बीजापुर में 19 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, छोड़ा हिंसा का रास्ता, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों को दी बधाई…

    रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बीजापुर जिले में 28 लाख रुपये के इनामी 9 नक्सलियों सहित कुल 19 नक्सलियों के सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ने पर सुरक्षा बलों को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार अपने सुरक्षाबलों के मनोबल को लगातार ऊंचा बनाए रखने और बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण और विकसित भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति – 2025 का सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कैंसर रूपी नक्सलवाद के ताबूत पर आखिरी कील ठोंकने का काम हमारी डबल इंजन की सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कुचक्र में फंसे लोग अब पुनः समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं, जो स्वागतयोग्य है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का पूर्णतः खात्मा तय है।

    सरकार की प्रभावी रणनीति – लोगों का बढ़ा विश्वास

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में राज्य सरकार द्वारा लगातार सुरक्षा कैंप स्थापित करने, नियद नेल्ला नार योजना के तहत सड़क निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से लोगों का सरकार पर विश्वास बढ़ा है। इसी विश्वास के चलते नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं और नक्सली मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार, नक्सलवाद का दामन छोड़ मुख्य धारा में लौटने वाले लोगों के पुनर्वास और पुनरुत्थान के लिए पूरी तरह तत्पर है।

  • पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. देवेंद्र प्रधान के निधन पर मुख्यमंत्री साय ने किया शोक व्यक्त, कहा- डॉ. देवेंद्र प्रधान जी के निधन से देश ने एक प्रखर जननेता, कुशल संगठनकर्ता और संवेदनशील जनप्रतिनिधि को खो दिया…

    पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. देवेंद्र प्रधान के निधन पर मुख्यमंत्री साय ने किया शोक व्यक्त, कहा- डॉ. देवेंद्र प्रधान जी के निधन से देश ने एक प्रखर जननेता, कुशल संगठनकर्ता और संवेदनशील जनप्रतिनिधि को खो दिया…

    रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. देवेंद्र प्रधान के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. देवेंद्र प्रधान जी के निधन से देश ने एक प्रखर जननेता, कुशल संगठनकर्ता और संवेदनशील जनप्रतिनिधि को खो दिया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. देवेंद्र प्रधान जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, संगठन और लोकहित के प्रति समर्पित रहा।

    वे श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व वाली सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रभावी कार्य करते हुए देश के विकास में योगदान देने वाले कर्मठ राजनेता थे। उनकी दूरदर्शिता, संगठनात्मक कौशल और जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदा प्रेरणादायी रहेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. प्रधान जी का निधन राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।

    वे एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने समाज के सभी वर्गों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सदैव समाजसेवा को प्राथमिकता दी। उनकी नेतृत्व क्षमता और समर्पण भावना हमेशा हमें प्रेरित करती रहेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोक संतप्त परिवार, समर्थकों और अनुयायियों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें।